अब अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा

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नई दिल्ली। भारत को अब अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। हमें वजनी सैटलाइट्स लॉन्च करने के लिए विदेशी अंतरिक्ष तट पर निर्भर नहीं रहेना पड़ेगा। क्योंकि स्पेस प्रोग्राम को नई ताकत बढ़ाने के लिए यूनियन कैबिनेट ने 10,911 करोड़ रुपए के बजट पर स्वीकृति प्रदान की है।अब अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा

कैबिनेट की 10,911 करोड़ रुपए  की स्वीकृत राशि का उपयोग आने वाले चार सालों में 30  पीएसएलवी और 10 रॉकेट्स को लॉन्च करने में होगा। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि इसरो के सबसे वजनी रॉकेट जीएसएलवी एमके 3 के  के 10 लॉन्चेज करने के लिए 4,338 करोड़ रुपए की कैबिनेट ने मंजूरी दी है।  इस राशि के सहयोग से चार टन से ज्यादा वजनी सैटलाइट्स को उतार सकेंगे।

यह अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में एक बड़ा कदम होगा और इसके बाद वजनी सैटलाइट्स लॉन्च करने के लिए हमें विदेशी अंतरिक्ष तट की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।  यह कार्यक्र म मोदी सरकार  में बना है। यह मेक इन इंडिया कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है।

इस कार्यक्रम की सहायता से इसरो न सिर्फ छोटी विदेशी सैटलाइट्स बल्कि चार टन से ज्यादा वजनी सैटलाइट्स को भी उतार सकने में योग्य हो जाएगा।  सिंह ने बताया कि 30 पीएसएलवी रॉकेट्स उतारने के लिए भी स्वीकृति प्रदान कर  दी है। इसके लिए 6,573 करोड़ रुपए मंजूरी दे दी है। 

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