कुछ ऐसे पुलिस ने किया मुन्ना बजरंगी को मृत घोषित

बागपत। मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले में पुलिस की एक के बाद एक लापरवाही उजागर हो रही है। परिजनों का दावा है कि पुलिस ने ही मुन्ना बजरंगी को मृत घोषित कर दिया। इसके लिए डॉक्टरों का इंतजार नहीं किया गया। उसको अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं समझी। वारदात के सात घंटे बाद शव को सीधे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। उधर, एसपी जय प्रकाश का कहना है कि मुन्ना बजरंगी की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसलिए अस्पताल नहीं ले जाया गया।  कुछ ऐसे पुलिस ने किया मुन्ना बजरंगी को मृत घोषित

अच्छी क्वालिटी की प्रयुक्त पिस्टल

हत्याकांड में प्रयुक्त पिस्टल को पुलिस ने गटर से बरामद किया। एसपी जय प्रकाश का कहना है कि पिस्टल देशी है या विदेशी इसका अभी पता नहीं चला है। यह जरूर है कि पिस्टल अच्छी क्वालिटी की है। पोस्टमार्टम के दौरान मुन्ना बजरंगी के शरीर से एक गोली मिली है। 20 साल पूर्व पुलिस मुठभेड़ में उसको गोलियां लगी थीं। ऑपरेशन के बाद भी एक गोली नहीं निकल पाई थी। अब जो गोली निकली है वह पुरानी है या अभी की, इसका पता लगाने के लिए पुलिस फॉरेंसिक जांच कराएगी। 

एडीएम करेंगे मजिस्ट्रीयल जांच

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बागपत जेल में हुई मुन्ना बजरंगी की हत्या की मजिस्ट्रीयल व न्यायिक जांच करने के आदेश दिए थे। इस पर डीएम ऋषिरेन्द्र कुमार ने मजिस्ट्रीयल जांच के लिए जांच अधिकारी की नियुक्ति कर दी है। डीएम ने बताया कि मुन्ना बजरंगी की जेल में हुई हत्या की मजिस्ट्रीयल जांच एडीएम वित्त एवं राजस्व लोकपाल करेंगे। 

गोलियों की तड़तड़ाहट सुन कई शातिर सो गए

जेल के अंदर हाई सिक्योरिटी बैरक में सोमवार सुबह अचानक जब गोलियों की तड़तड़ाहट हुई तो आठों सेल में कई शातिर अपराधी जागे हुए थे, तो कई सोए थे। माफिया डॉन को ढेर होते देखा तो कई शातिर जानबूझकर सो गए। हालत यह है कि कोई भी जुबान खोलने को तैयार नहीं है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जेल के अंदर हाई सिक्योरिटी बैरक में 10 सेल हैं, जिनमें दो नंबर सेल में मुन्ना बजरंगी और 10वीं सेल में सुनील राठी बंद था। आठ अन्य सेल में भी शातिर अपराधी बंद हैं। सुबह लगभग 6.10 मिनट पर गोलियां चलने के बाद बैरक में सन्नाटा पसर गया। कैदी और बंदी अपनी-अपनी सेल में ऐसे दुबक गएजैसे उन्होंने कुछ देखा ही न हो। एसपी जयप्रकाश ने बताया कि बंदियों से पूछताछ की गई तो किसी ने यह नहीं बताया कि उन्होंने घटना को होते देखा है। 

हत्या से जेल प्रशासन कटघरे में : मौर्य

प्रदेश के श्रम, सेवायोजन एवं समन्वय मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य का कहना है कि बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या से जेल प्रशासन कठघरे में आ गया है। बिना जेल प्रशासन की मिलीभगत से हथियार अंदर नहीं जा सकते हैं। मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जा रही है, जो भी दोषी होगा। उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंगलवार शाम सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में श्रम मंत्री ने पूर्व सपा सरकार पर निशाना साधा। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर गुंडों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। महागठबंधन के सवाल पर श्रम मंत्री ने कहा कि गठबंधन अखिलेश के लिए आत्मघाती कदम साबित होगा। 

जेलर ने भेजी थी राठी को शिफ्ट कराने की चिट्ठी

बागपत जेल के जेलर ने 15 दिन पहले ही सुनील राठी को दूसरी जेल में शिफ्ट कराने के लिए शासन को लिखा था। वह 31 जुलाई 2017 हरिद्वार जेल से बागपत जेल में आया था। दरअसल सुनील पर जिले में दो मुकदमे दर्ज हैं। जिला कारागार में 860 बंदी हैं। इन बंदियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी 135 के बजाय मात्र 20 बंदीरक्षक ही निभा रहे हैं। जेल में सीसीटीवी कैमरे व जैमर जैसी सुविधा भी नहीं है। इसी के चलते जिला जेल से पिछले एक साल में 25 से अधिक शातिर बंदियों को अन्य जेलों में शिफ्ट कर दिया गया, लेकिन सुनील राठी को जेल प्रशासन शिफ्ट कराने में नाकाम रहा।

जेल या होटल

ये जेल है या होटल? यहां पैर दबाने को छुटभैया बंदी हैं। मनोरंजन को टीवी है। परिजनों या गुर्गों से बात करने अथवा धन्ना सेठों से रंगदारी मांगने को स्मार्ट फोन हैं। विरोधी को ठिकाने लगाने को पिस्टल है। जायका बदलने को लजीज व्यंजन हैं, नशे का हर सामान उपलब्ध होता है, यारों-रिश्तेदारों से मुलाकात की विशेष सुविधा, और भी बहुत कुछ है। बस यह सुख-सुविधा भोगने को बाहुबल और सेटिंग होनी चाहिए। 2016 में शुरू हुई बागपत जेल के महज दो साल के सफर पर नजर डालें तो इसने कई मामलों में पुरानी जेलों को भी पीछे छोड़ दिया है। हाल-फिलहाल छूटे कई बंदियों की मानें तो जेल में बदमाशों को घर जैसी सुविधा और रोटी मिलती है। अंदर जेल कर्मियों का नहीं बदमाशों का राज चलता है। बंदी ही नहीं बल्कि जेलकर्मी भी चीख-चाीखकर जेल में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं होने का आरोप लगा चुके हैं। दो माह पहले बंदी रक्षक एकजुट होकर डीएम के आवास पर पहुंचे और जेल अधिकारी पर कुख्यातों का पक्ष लेने, मिलाई वालों से पैसा ऐंठने, आम बंदियों तथा बंदी रक्षकों का उत्पीडऩ करने समेत कई गंभीर आरोप लगा कार्रवाई की मांग की थी। बावजूद इसके अफसरों ने जेल में सुधार की कोई व्यवस्था नहीं की। 

सुनील का दावा सच तो बजरंगी कैसे ले गया पिस्टल और मैगजीन?

एक गैंगस्टर ने दूसरे गैंगस्टर की हत्या कर दी और वो भी जेल के अंदर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर। मुन्ना बजरंगी का शव जौनपुर भी चला गया, लेकिन इस घटना के पीछे वे तमाम सवाल हैं, जिन्होंने जेल प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सबसे अहम सवाल यह है कि जेल के अंदर पिस्टल और दो मैगजीन कैसे पहुंचीं? सुनील राठी ने दावा किया है कि पिस्टल मुन्ना बजरंगी के पास थी, और उसने अपने बचाव में पिस्टल छीनकर उसको मौत के घाट उतार दिया। सुनील की बात सच मानी जाए तो मुन्ना बजरंगी की जेल में एंट्री के वक्त जेल प्रशासन आंखों पर पट्टी बांधकर बैठ गया था? तीन लेयर वाली जेल के अंदर बैरक में हथियार कैसे पहुंच गया? इस सवाल का जवाब पुलिस ढूंढ़ रही है। इस घटना में जेल प्रशासन बुरी तरह फंसता नजर आ रहा है। 

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