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उत्तराखंड में मंत्री के भरोसे टला छात्र संघर्ष समिति का आंदोलन

देहरादून: उच्च शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. धन सिंह रावत से वार्ता के बाद दून छात्र संघर्ष समिति ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों में किए गया संशोधनों के विरोध में छात्र मुखर थे। छात्रों के आंदोलन के चलते राजधानी के चारों महाविद्यालयों में दाखिला प्रक्रिया भी ठप थी। अब मंगलवार से कालेज खुल जाएंगे। उत्तराखंड में मंत्री के भरोसे टला छात्र संघर्ष समिति का आंदोलन

डीएवी कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष शुभम सिमल्टी ने दावा किया कि उच्च शिक्षा राज्य मंत्री ने छात्र संघर्ष समिति के कई सुझाव पर अपनी ओर से सहमति जताई है। जिन महाविद्यालय में छात्रसंख्या पांच हजार से अधिक है वहां छात्रसंच चुनाव की खर्च सीमा पचास हजार तक कर करने पर सहमति जताई। चुनावी जूलूस, नामांकन रैली व विजय जुलूस महाविद्यालय परिसर से एक किमी की परिधि में निकालने की अनुमति पर भी हामी भरी। प्रत्येक महाविद्यालय व विश्वविद्यालय में छात्राओं के लिये उप सचिव का पद आरक्षित था। उसे समाप्त  करके उपाध्यक्ष व सचिव का अलग पद सृजित किया जाएगा। 

किसी भी छात्र का क्रेडिट पूर्ण होने पर बैक पेपर में शामिल छात्र अगली कक्षा में तो प्रवेश पा जाता है लेकिन छात्रसंघ चुनाव नहीं लड़ सकता। बैक पेपर की यह शर्त अब नहीं रहेगी और क्रेडिट पूरा करने पर कोई भी छात्र चुनाव लड़ पाएगा। छात्रसंघ चुनाव में डिजिटल माध्यम से प्रचार की अनुमति रहेगी। उत्तराखंड की शिक्षा प्रणाली के संबंध में यदि उच्च शिक्षा विभाग समिति गठित करता है तो उसमें डीएवी पीजी कालेज व एमबी पीजी कालेज हल्द्वानी के छात्रसंघ अध्यक्ष को सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा। 

ये छात्र नेता रहे मौजूद 

डीएवी कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष शुभम सिमल्टी, डीबीएस के अध्यक्ष योगेश घाघट, उपाध्यक्ष हिमांशु नेगी, पूर्व अध्यक्ष राहुल कुमार, एसजीआरआर छात्रसंघ अध्यक्ष शुभम रावत, एनएसयूआइ के जिला अध्यक्ष सौरभ ममगाईं, एनएसयूआई के नेता विकास नेगी, आर्यन छात्र संगठन से सोनू बिष्ट, दिवाकर दूबे, सत्यम छात्र संगठन से संदीप शर्मा, अरविंद चौहान, तरुण जैन, जितेंद्र बिष्ट, राहुल चौहान, सारश्वत खंडूरी आदि। 

 उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत का कहना है कि छात्र प्रतिनिधियों से वार्ता के दौरान उनकी मांगों को सुना और समझाया कि छात्र हितों को ध्यान में रखकर ही लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों की समीक्षा की गई। छात्रों ने जिन बिंदुओं पर आपत्ति जताई है। उनको दोबारा देखा जाएगा। छात्र चुनाव की गरिमा बनी रहे और पढ़ाई भी प्रभावित न हो दोनों पहलुओं को देखते जो निर्णय लिया जाएगा वह छात्रों के हक में होगा। 

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