मोदी सरकार किसानो से जुड़े आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी में बड़ा बदलाव करेगी

लॉकडाउन में किसान के संकट को देखते हुये कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार के लिए मोदी सरकार अहम कदम उठाने जा रही है. कैबिनेट बैठक में सरकार कृषि से जुड़े हुये आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955, एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (एपीएमसी) एक्ट में बदलाव के लिये अध्यादेश को मंजूरी दे सकती है.

सरकार के इस फैसले से कृषि क्षेत्र के नये केंद्रीय कानून एपीएमसी के तहत किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा और इसके लिये उन्हें अपनी उपज को अपनी इच्छा से किसी को कहीं भी बेचने की छूट मिलेगी.

आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में संशोधन कर उपज अनाज से लेकर तिलहन की अधिकतम मात्रा रखने के संबंध में जारी प्रतिबंध (स्टॉक सीमा) को खत्म कर दिया जाएगा.

भारतीय कृषक समाज के अध्यक्ष कृष्णवीर चौधरी ने कहा कि कृषि सुधार के कदम से किसानों को फायदा मिलेगा. किसानों को कृषि उत्पाद बाजार समिति यानी एपीएमसी के चंगुल से मुक्ति दिलाना बहुत जरूरी था. इसी तरह आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे से अनाज, तिलहन जैसे तमाम कृषि उत्पादों को बाहर निकालना भी अच्छा कदम है.

नई व्यवस्था में किसानों को रियल टाइम पर देश के अलग-अलग बाजारों में किसी भी कृषि उत्पाद का क्या भाव या मूल्य मिल रहा है, इसकी जानकारी उन्हें मिलेगी. किसान अपनी मर्जी के मुताबिक अपनी फसल को कहीं भी और किसी को भी बेचने के लिए स्वतंत्र होगा.

कृष्णवीर चौधरी ने कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम से मुक्ति मिलेगी, जो कि खरीदारों और उपभोक्ताओं के हिसाब से बनी है.

उत्पादन साल में सिर्फ एक बार होता है लेकिन उसकी खपत साल भर होती रहती है, इसलिए किसी ना किसी को उसे संग्रहित करना होगा ताकि साल भर हमारी भूख मिटती रहे.

हालांकि, इस व्यवस्था के लिये राज्य सरकारों को अपनी मंडियों को मजबूत करना होगा ताकि वो निजी कंपनी के मुकाबले मजबूती से खड़ी रहे, इससे किसान को फायदा होगा.

कृष्णवीर चौधरी ने ये भी कहा कि जब स्टोर करने की सुविधा काफी नहीं हो, तो फसल काटने के बाद ही सामान के दाम गिरने लगते हैं, क्योंकि किसान सामान जमा कर अपने पास नहीं रख सकता है.

वहीं, इस मसले पर कृषि अर्थशास्त्री विजय जावंधिया ने चिंता जताते हुये कहा कि सरकार ने जिन सुधारों का ऐलान किया है वो पूरी तरह बेतुके और मौजूदा हालात को देखते हुये गैर-जरूरी हैं. ये सिर्फ और सिर्फ तात्कालिक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए किये गये हैं, इससे पीछे कॉरपोरेट का बहुत बड़ा हित छिपा हुआ है.

जावंधिया ने कहा कि कारोबारियों और जमाखोरों से किसानों के शोषण को रोकने के लिए एएमपीसी कानून लाया गया था, जो अनाज के बर्बाद होने के डर से उन्हें जल्दबाजी में अपनी पैदावार बेच देते थे. अगर एएमपीएस कानून और आवश्यक वस्तु अधिनियम का शिकंजा हटा लिया जाएगा, तो इसका वैकल्पिक इंतजाम है?

उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों को फिर से शोषण करने वालों के हवाले छोड़ दिया है. अनाज बेचा जरूर जाएगा लेकिन कब, कहां और कितना, ये फैसले जनकल्याण की जगह मुनाफे के आधार कॉरपोरेट लेंगे. कोई पाबंदी न रही तो इसे दुनिया के किसी भी कोने में, जहां सबसे ऊंची कीमत मिलेगी वहां बेचेंगे.

जाहिर है, यह कोई हल्का-फुल्का मसला नहीं है. हमें देखना होगा कि किसानों का भला करने में हम कहीं फिर से भुखमरी के दौर को न्यौता तो नहीं देने जा रहे हैं.

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