मोदी सरकार: ग्रेच्युटी के नियम में बदलाव से प्राइवेट और सरकारी क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

कोरोना वायरस और लॉडाउन के बाद बने हालात से निपटने के लिए व्यापक कोशिशें जारी हैं। केंद्र सरकार और राज्य सरकारें भी अपनी तरफ से हर संभव कोशिश कर रही हैं।

इस बीच केंद्र सरकार ऐसा संकेत दिया है जिससे प्राइवेट और सरकारी क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों को लाभ हो सकता है। खबर यह है कि सरकार Gratuity ग्रेच्युटी के नियम में बदलाव करने पर विचार कर रही है।

अब तक जो ग्रेच्युटी 5 साल पूरे होने पर मिलती थी, वह 1 साल बाद ही लागू हो सकती है। हालांकि सरकार को इस नियम में बदलाव के लिए संसद सत्र का इंतजार करना होगा।

दरअसल वित्त मंत्रालय ने लेबर संबंधी कानूनों में फेरबदल किया है इसमें Gratuity का यह नियम भी शामिल है। बता दें, जिस कंपनी में 10 से ज्यादा कर्मचारी होते हैं उन्हें नियमानुसार Gratuity देना होती है।

सर्विस में 5 साल पूरे होने पर कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार बनता है। 5 साल से पहले नौकरी छोड़ने पर उसे यह राशि नहीं मिलती है।

Gratuity से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि यदि 5 वर्ष की सेवा से पहले ही कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है तो कंपनी को परिवार को वे Gratuity की रकम देना होती है। इसी तरह यदि कोई कर्मचारी नौकरी के दौरान दिव्यांग हो जाता है तो भी कंपनी को उसे ग्रेच्युटी देना होती है।

Gratuity भुगतान की सीमा पांच से घटकर 1 साल होती है तो इससे उन कर्मचारियों को फायदा होगा, जिन्हें पांच साल से पहले ही नौकरी छोड़ना पड़ जाती है या किसी अन्य कारण से छोड़ देते हैं।

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