मायावती बोली- राज्यसभा से इस्तीफे का बदला सूद समेत वसूलूंगी, अब चुनाव बैलेट पेपर से कराए BJP

यूपी उपचुनाव में जीत के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने वीरवार को चंडीगढ़ में एक विशाल रैली को संबोधित किया। इस रैली में हजारों की संख्या में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से पार्टी समर्थक जुटे। सेक्टर-25 के रैली ग्राउंड में रैली का आयोजन किया गया। रैली को संविधान बचाओ, आरक्षण बचाओ नाम दिया गया है।

मायावती ने रैली को संबोधित करते हुए सबसे पहले पार्टी के संस्थापक कांशीराम के जन्मदिन की बधाई दी। फिर कहा कि पंजाब की सरकारों ने दलितों को हमेशा नजरअंदाज किया है। इसलिए कार्यकताओं को अब खुद मेहनत करनी पड़ेगी। पार्टी को खड़ा करने के लिए खुद संघर्ष करना होगा।

मायावती ने पंजाब के कार्यकर्ताओं को कड़ी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि पंजाब में जिन लोगों को पार्टी संगठन की जिम्मेवारी सौंपी गई है, वे भूल जाएं कि यूपी से उन्हें कुछ मिलेगा। यहां के नेता यूपी में किसी पद के लालच में न रहें, उनके लिए बेहतर रहेगा।

मायावती ने बीजेपी को दलित विरोधी पार्टी कहा। उन्होंने कहा कि देश में गरीबों और दलितों का उत्पीड़न हो रहा है। बीजेपी की सरकार आरएसएस के एजेंडे को लागू करने की कोशिश कर रही है। जब से बीजेपी आई है, दलितों के खिलाफ हिंसा के मामले बढ़ गए हैं। यह कहते हुए मायावती ने हैदराबाद और ऊना की घटना का जिक्र किया।

मुझे राज्यसभा में दलितों की बात ठीक से रखने का मौका नहीं दिया गया। अगर मैं देश की संसद में ही दलितों की बात नहीं रख सकती हूं तो पद पर रहने का क्या फायदा, इसलिए मैंने राज्यसभा से इस्तीफा दिया। अब हमें पंजीवादी पार्टियों को सत्ता में आने से रोकना है।

मायावती ने सहारनपुर में पिछले दिनों हुए दंगों का आरोप भी भाजपा पर मढ़ते हुए कहा कि छोटी सी बात को बड़ा बनाते हुए वहां दलितों का शोषण किया गया। केंद्र की मोदी सरकार पूरी तरह से दलित विरोधी सरकार है, ऐसे में इस सरकार के विरोध में उठ खड़ा होना होगा।

मायावती ने बीजेपी को ललकारते हुए कहा कि पार्टी अगले चुनाव ईवीएम से कराने की बजाय बैलेट पेपर से कराए, पता चला जाएगा कि कौन किसके हक में है। यूपी विधानसभा चुनाव में धांधली हुई थी, इस बार ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।

मायावती ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सोच ही निराली है, लेकिन जनता के हित में नहीं है। कांग्रेस ने मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू नहीं की, ये उनकी सोच का जीता-जागता उदाहरण है। हमने विरोध प्रदर्शन किए, तब जाकर वीपी सिंह की सरकार ने इसे लागू किया।

मायावती ने बाबा साहेब अंबेडकर को भारत रत्न न देने पर भी कांग्रेस की निंदा की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने काफी समय तक बाबा साहेब को भारत रत्न नहीं दिया। वीपी सिंह ने सरकार ने ही यह काम किया, लेकिन उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। क्योंकि बीजेपी ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।

मायावती ने कहा कि आगामी विधानसभा और लोकसभा में अगर बीजेपी को शिकस्त दे दी तो समझो मेरा राज्यसभा सदस्य से इस्तीफा देना का बदला सूत समेत वापिस किया जाए। वैसे भी यूपी में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को बसपा और सपा ने मिलकर जो शिकस्त दी है, उससे सभी की नींद उड़ गई है।

आज बसपा के संस्थापक कांशीराम का जन्मदिवस भी है और कल ही पार्टी नेउत्तरप्रदेश की फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीट जीती। ऐसे में मायावती की इस रैली का महत्व और भी बढ़ गया है। इस रैली को 2019 चुनावों के लिए बसपा की ओर से शंखनाद बताया जा रहा है।

यूपी में सपा-बसपा के गठबंधन की जीत के बाद अब मायावती की कोशिश है कि 2019 में बीजेपी को हराने के लिए सभी विपक्षी दल एक साथ आएं। मायावती इस रैली के साथ अपने कैडर और दलित वोटबैंक को वापस पाना चाहती हैं।

रैली के जरिए पंजाब और देश में दलितों के मुद्दों को उठाया जाएगा। कहा जा रहा है कि 2019 के चुनाव में मायावती खुद को प्रधानमंत्री पद के दावेदार के तौर पर लॉन्च करने की तैयारी में हैं। बता दें कि पंजाब में 31 फीसदी और हरियाणा में 21 फीसदी से ज्यादा दलित रहते हैं।

हालांकि बसपा पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान अपना वोट बैंक संभालने में नाकाम रही थी, लेकिन इस बार वे ऐसा नहीं होने देना चाहती।

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