PM मोदी के मन की बात में मगहर को करोड़ों की सौगात देने को कही बात

संतकबीर नगर। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में मगहर से सटे गोरखपुर के टड़वाखुर्द गांव निवासी डा. सुरेंद्र प्रसाद मिश्र से लखनऊ में फोन पर बात की और विभिन्न संदर्भों में संतकबीर के पांच दोहों का उल्लेख किया। मोदी मगहर को कई सौगातें देंगे। वह मगहर के विकास के लिए एक अरब 6 करोड़ 74 लाख 99 हजार रुपये की नौ परियोजनाएं सौंप रहे हैं। दरअसल, मोदी संतकबीर दास के 620वें प्राकट्योत्सव पर उनकी निर्वाण स्थली मगहर में आयोजित संत सम्मेलन के चौथे दिन यहां उपस्थित रहेंगे।PM मोदी के मन की बात में मगहर को करोड़ों की सौगात देने को कही बात

  • कबीर सोई पीर है, जो जाने पर पीर। जो पर पीर न जानही, वो काफिर बेपीर।
  • गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाय, बलिहारी गुरु आपने गोबिंद दियो बताय
  • जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होय। यह आपा तो डाल दे, दया करे सब कोय।
  • जहां दया वहां धर्म है, जहां लोभ तहां पाप, जहां क्रोध तहां काल है, जहां क्षमा, तहां आप।
  • जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान।

 मगहर को मिलेंगी कई सौगातें 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मगहर को कई सौगातें देंगे। इनमें  24 करोड़ 93 लाख 75 हजार रुपये की लागत से कबीर शोध अकादमी की स्थापना होनी है, प्रधानमंत्री इसका शिलान्यास करेंगे। सीएंडडीएस (जल निगम) द्वारा दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत दो करोड़ छह लाख रुपये की लागत से शहरी बेघरों के लिए 50 शैय्या वाला आश्रय, एक करोड़ सात लाख 57 हजार रुपये की लागत से 30 शैय्या वाले डारमेट्री का निर्माण, 18 करोड़ 98 लाख 53 हजार रुपये की लागत से 13 किमी सड़क का चौड़ीकरण, 31 लाख 32 हजार रुपये की लागत से फिटनेस पिट का निर्माण व 35 लाख 72 हजार रुपये की लागत से पशु डायग्नोस्टिक लैब का निर्माण होना है। यहां राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 19 करोड़ 91 लाख 30 हजार रुपये की लागत से 100 शैय्या वाला मैटरनिटी ङ्क्षवग भवन का निर्माण भी प्रस्तावित है। कान्हा पशु आश्रय योजना के तहत दो करोड़ 53 लाख 32 हजार रुपये की लागत से गोशाला का निर्माण भी होना है।

स्वदेश दर्शन हेरीटेज योजना पर भी चल रही पहल

कबीर समाधि स्थल के पास स्थित पुरातत्व विभाग की 8.118 एकड़ जमीन खाली है। यह भूमि कबीर शोध संस्थान के लिए चयनित है, इसका शिलान्यास होना प्रस्तावित है। केंद्र सरकार द्वारा स्वदेश दर्शन हेरीटेज योजना के तहत इंटरप्रिटेशन सेंटर, घाटों व पार्क का विकास प्रस्तावित है।

यह हैं प्रधानमंत्री का कार्यक्रम

28 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गोरखपुर एयरपोर्ट से हेलीकॉप्टर द्वारा मगहर आएंगे। मगहर में वह संत कबीरदास की समाधि स्थल व मजार पर मत्था टेकने के बाद पास में ही स्थित कबीर अकादमी का शिलान्यास करेंगे। फिर सभा को संबोधित करेंगे। यहीं से हेलीकॉप्टर से रवाना हो जाएंगे। वह करीब एक घंटा 55 मिनट तक मगहर में रहेंगे।

अंतरराष्ट्रीय संत समागम 

संतकबीर दास की निर्वाण स्थली मगहर में सोमवार से पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संत समागम के चौथे दिन 28 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ रहे हैं। उनके आगमन की तैयारियां जोरों पर है। मोदी ने मन की बात में बताया कि मैं 28 तारीख को मगहर आ रहा हूं। करीब चार मिनट दस सेकेंड की बातचीत में प्रधानमंत्री ने संतकबीर दास के विचारों को आधुनिक परिप्रेक्ष्य के संदर्भ में समझाया। गुजरात में अपने मुख्यमंत्रित्व काल का जिक्र करते हुए खुद को संतकबीर से जोड़ा भी।

ये रही पूरी बातचीत 

प्रधानमंत्री ने डॉ. मिश्र से कहा कि फोन काल के लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद। यह सही है कि मैं 28 तारीख को मगहर आ रहा हूं, वैसे गुजरात का कबीरवर तो आप भलीभांति जानते ही होंगे,जब मैं वहां काम करता था तौ मैंने संतकबीर की परंपरा से जुड़े लोगों का बड़ा राष्ट्रीय अधिवेशन भी किया था। आप लोग जानते हैं कबीरदास मगहर क्यों गए थे। उस समय एक धारणा थी कि मगहर में जिसकी मृत्यु होती है, वह स्वर्ग नहीं जाता। इसके उलट काशी में जो शरीर त्याग करता है, वह स्वर्ग जाता है। मगहर को अपवित्र माना जाता था लेकिन, संत कबीर इस पर विश्वास नहीं करते थे। अपने समय की ऐसी ही कुरीतियां और अंधविश्वासों को उन्होंने तोडऩे का काम किया, इसलिए वे मगहर गए और वहीं उन्होंने समाधि ली।

शांति और भाईचारे पर बल 

संतकबीर ने अपनी साखियों और दोहों के माध्यम से सामाजिक समानता, शांति और भाईचारे पर बल दिया। यही उनके आदर्श थे। आज के युग में भी वे उतने ही प्रेरक हैं। उनका एक दोहा है… ‘कबीर सोई पीर है, जो जाने पर पीर। जो पर पीर न जानही, वो काफिर बेपीर।’ मतलब सच्चा पीर, संत वही है जो दूसरों की पीड़ा जानता और समझता है। जो दूसरे के दुख को नहीं जानते, वे निष्ठुर हैं। कबीर ने सामाजिक समरसता पर विशेष जोर दिया था। जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होय। यह आपा तो डाल दे, दया करे सब कोय। एक अन्य दोहे में कबीर लिखते हैं, जहां दया वहां धर्म है, जहां लोभ तहां पाप, जहां क्रोध तहां काल है, जहां क्षमा, तहां आप। उन्होंने कहा, जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान। उन्होंने अपील की कि वे धर्म और जाति से ऊपर उठकर लोगों को ज्ञान के आधार पर मानें, उनका सम्मान करें। उनकी बातें आज सदियों बाद भी उतनी ही प्रभावी हैं। अभी जब हम संतकबीर दास जी के बारे में बात कर रहे हैं तो मुझे उनका एक दोहा और याद आता है, जिसमें वे कहते हैं, गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाय, बलिहारी गुरु आपने गोबिंद दियो बताय, ऐसी होती है गुरु की महानता। 

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