एचएसएससी मामले में भाजपा को चुनावी मिशन में लाभ देगा मनोहर का कड़ा फैसला

चंडीगढ़। प्रदेश सरकार ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) के चेयरमैन के खिलाफ कार्रवाई कर बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। विवादों में घिरे चेयरमैन भारत भूषण भारती हालांकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के बेहद अजीज हैैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई कर सरकार ने विपक्ष के हाथों से बड़ा मुद्दा छीन लिया है। जाट आरक्षण आंदोलन और पंचकूला हिंसा का दाग झेल रही सरकार ने चेयरमैन को निलंबित कर जहां अपने कड़े होने का संदेश दिया है, साथ ही ब्राह्मणों का भरोसा भी जीतने की भी कोश्‍ािश की है।एचएसएससी मामले में भाजपा को चुनावी मिशन में लाभ देगा मनोहर का कड़ा फैसला

जाट आरक्षण आंदोलन व डेरा प्रकरण में बनी सरकार की छवि में हो सकता है सुधार

एचएसएससी के चेयरमैन भारत भूषण भारती के खिलाफ कार्रवाई के फैसले से हालांकि पंजाबी समुदाय में नाराजगी बढ़ सकती है, लेकिन ब्राह्मणों को साधना भाजपा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। राज्य में ब्राह्मणों की आबादी छह से सात फीसद के बीच है। भाजपा सरकार में एक मंत्री, एक सांसद, एक राज्यसभा सदस्य, तीन विधायक ब्राह्मणों का प्रतिनिधित्व करते हैैं। एक बसपा विधायक और एक आजाद विधायक भी ब्राह्मण ही हैैं, जिन्होंने सरकार को बिना शर्त समर्थन दे रखा है। ऐसे में सरकार चाहकर भी ब्राह्मणों को नजर अंदाज नहीं कर सकती थी।

भाजपा ने अपने मिशन 2019 का आगाज भी हरियाणा से ही किया है। जींद में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह एक रैली के जरिए मिशन 2019 की शुरुआत कर चुके हैैं। इस मिशन की शुरुआत से पहले राज्य में तीन बार जाट आंदोलन हो चुके। एक बार रामपाल प्रकरण और दूसरी बार डेरा प्रकरण ने सरकार के सामने कई चुनौतियां पेश की। ऐसे में सरकार किसी सूरत में नहीं चाहती थी कि चुनाव के मुहाने पर खड़ी भाजपा को ब्राह्मणों की नाराजगी झेलनी पड़े।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने विदेश से लौटते ही बड़े कूटनीतिक अंदाज में जिस तरह से ब्राह्मणों को साधने में सफलता हासिल की है, उसे देखकर लग रहा कि उनके इस अंदाज का पार्टी को लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव में लाभ मिल सकता है। रही चेयरमैन के खिलाफ कार्रवाई पर पंजाबियों के नाराज होने की बात तो उसके भी कई पहलू हैैं।

भारत भूषण भारती को कानूनी तथा पुलिस कार्रवाई से बिल्कुल अलग रखा गया है। उन्हें तब तक निलंबित किया गया है, जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती। यदि सरकार को किसी सूरत में भारती को पूरी तरह से हटाना भी पड़ जाए तो उनके लिए किसी दूसरी चेयरमैनी का विकल्प भी तलाशा जा सकता है।

साढ़े तीन साल में बोल्ड फैसला, ब्राह्मण नेताओं के आएगा काम

हरियाणा में पिछले साढ़े तीन साल के कार्यकाल में यह पहला मौका है, जब सरकार ने आगे बढ़कर कडा फैसला लिया है। इस फैसले के बाद विरोधी राजनीतिक दल सकते हैैं। खास बात यह है कि सीएम के इस फैसले में अहम भूमिका भाजपा के सत्ता व संगठन में बैठे ब्राह्मण प्रतिनिधियों ने ही निभाई है। सरकार का यह फैसला भाजपा सरकार के कई मंत्रियों, सांसदों व विधायकों के हक में भी अहम भूमिका निभाएगा।

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