माल्या और नीरव की मुसीबतें बढ़ीं, अर्थिक भगोड़ा बिल को राज्यसभा ने दी मंजूरी

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नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे बड़े आर्थिक अपराधियों को रोकने के लिए सख्त कानून का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। बुधवार को इससे संबंधित आर्थिक भगोड़ा बिल 2018 राज्यसभा में पास हो गया। पिछले हफ्ते लोकसभा ने भी इसे हरी झंडी दे दी थी। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह बिल कानून का शक्ल ले लेगा।  

नए कानून के तहत आर्थिक अपराधी देश की न्यायिक व्यवस्था की अनदेखी कर विदेश में शरण नहीं ले सकेंगे। इसमें विभिन्न सरकारी एजेंसियों को ऐसे अपराधियों की संपत्ति जब्त करने का अधिकार है। यह नया कानून आर्थिक अपराधियों की संपत्ति जब्त करने वाली धन शोधन बचाव अधिनियम (पीएमएलए) से भिन्न है। 

नए कानून  में इससे सबंधित पुराने कानून में मौजूद सभी कमियों को दूर किया गया है। ताकि अपराधियों के लिए कानूनी प्रक्रिया को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। सरकार ने इस बजट में इस कानून के लाने की घोषणा की थी।
  
वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि प्रवर्तन निदेशालय (ईड़ी) इस कानून से सबंधित जांच की नोडल एजेंसी होगी। विपक्ष केसवाल के जवाब में गोयल ने कहा कि इस कानून में 100 करोड़ के उपर के डिफॉल्टर को सख्ती से निबटने के प्रावधान जरुर है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि 100 करोड़ से कम के आर्थिक अपराधियों पर शिकंजा नहीं कसेगा। गोयल ने बताया कि इस श्रेणी के अपराधी की निबटारा अलग कानून के तहत होगा।

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