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दो साल तक मनाई जाएगी महात्मा गांधी की 150वीं जयंती

लखनऊ। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती प्रदेश में भव्य उत्सव के रूप में दो साल तक मनाई जाएगी। इस दौरान विद्यालयों, संस्थाओं और सरकार के स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। गांधीजी को श्रद्धांजलि देने के लिए विधानमंडल का संयुक्त अधिवेशन भी बुलाया जा सकता है। आयोजनों को मूर्त रूप देने के लिए कार्यकारी समिति का गठन भी किया गया है। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाने के लिए राज्य स्तरीय आयोजन समिति की बैठक मंगलवार को शास्त्री भवन में हुई, जिसकी अध्यक्षता राज्यपाल राम नाईक ने की।दो साल तक मनाई जाएगी महात्मा गांधी की 150वीं जयंती

अधिवेशन में गांधी को श्रद्धांजलि 

अधिवेशन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉ. दिनेश शर्मा समेत मंत्रि परिषद के सभी सदस्य व विपक्षी दलों में कांग्रेस के सांसद प्रमोद तिवारी व रालोद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मसूद अहमद भी शामिल थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के प्रतिनिधि के रूप में जस्टिस विक्रम नाथ भी पहुंचे। राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि यह कार्यक्रम पूरे देश में प्रदेश की प्रतिष्ठा बढ़ाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि संयुक्त अधिवेशन में गांधीजी को श्रद्धांजलि देने के साथ ही आजादी के बाद से अब तक के कार्यों का सिंहावलोकन किया जाए। राज्यपाल ने इस अवसर पर कुष्ठ रोगियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास दिए जाने का भी सुझाव दिया।

गांधी संस्कृति, धर्म, दर्शन का प्रकाशन 

विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि विश्वविद्यालयों में गोष्ठियों का आयोजन किए जाने के साथ गांधीजी की पुस्तकों में भारतीय संस्कृति, धर्म, दर्शन पर व्यक्त विचारों का सूचना विभाग से प्रकाशन कराया जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वच्छता से गांधीजी के विशेष लगाव को देखते हुए इस अवसर पर विशेष अभियान संचालित किया जाए। उन्होंने सोलर चरखे को प्रोत्साहन दिये जाने की बात भी कही। जस्टिस विक्रम नाथ ने सुझाव दिया कि 14 वर्ष से अधिक समय से बंद और साठ साल की उम्र पार कर चुके कैदियों को रिहा भी किया जाना चाहिए।बैठक में पूर्व सांसद राजनाथ सिंह सूर्य, सर्वोदय आंदोलन से जुड़े नीरज अरोड़ा, गांधी विचार मंच के निदेशक बीके राय, कबीर मठ, वाराणसी के विवेक दास, प्रो, राम प्रकाश द्विवेदी, अयोध्या प्रसाद गुप्त, सिटी मांटेसरी स्कूल के संस्थापक डॉ. जगदीश गांधी, उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजा कांत मिश्र, प्रो, सदानंद गुप्त, योगेश प्रवीन, मुजफ्फर अली, मंजीत सिंह, सूर्य प्रसाद दीक्षित आदि ने भी कार्यक्रमों के संबंध में सुझाव दिए। 

सोलह साल बाद पंचम तल पहुंचे राज्यपाल

प्रदेश में सोलह साल बाद यह पहला अवसर था जब किसी मुख्यमंत्री के कार्यालय में राज्यपाल पहुंचे हों। सोलह साल पहले राष्ट्रपति शासन में तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री ने इस कार्यालय में बैठकें की थीं। राज्यपाल राम नाईक ने मुख्यमंत्री की मौजूदगी में उनके कार्यालय जाने की परंपरा को शुरू किया। एक सवाल पर राज्यपाल ने इसे सामान्य बात बताया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कभी मुझे बुलाया नहीं। यदि वह बुलाते तो मैैं उनके समय में भी आ जाता। 

नहीं पहुंचे मुलायम, मायावती और अखिलेश

आयोजन समिति की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री के नाते मुलायम सिंह यादव, मायावती और अखिलेश यादव को भी बुलाया गया था। मुलायम सिंह यादव ने पत्र भेजा कि वह संसद चलने की वजह से आने में असमर्थ हैैं। अखिलेश ने पत्र भेजकर कहा कि उनका पूर्व में ही कार्यक्रम नियत हो चुका था, जिसमें फेरबदल नहीं किया जा सकता था। मायावती ने न कोई पत्र भेजा, न आईं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी भी बैठक में नहीं पहुँचे।

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