LIVE: गोरखपुर में काउंटिंग पर उठा बड़ा सवाल, प्रशासन नहीं दे रहा नतीजों की जानकारी

योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के चलते खाली हुई गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव के बाद आज नतीजे आ रहे हैं. 11 मार्च को हुई वोटिंग में यहां करीब 47 फीसदी वोटरों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था. इस सीट पर मुख्य मुकाबला बीजेपी बनाम सपा-बसपा गठबंधन का माना जा रहा है.

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-शुरुआती रुझानों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस परंपरागत सीट पर बीजेपी को बढ़त मिल रही है. यहां से बीजेपी के उपेंद्र दत्त शुक्ल फिलहाल 1666 वोटों से आगे हैं. उपेंद्र शुक्ल को पहले राउंड की मतगणना के बाद 15577 वोट मिले हैं, जबकि प्रवीण निषाद को 13911 मिले हैं.

-प्रशासन मीडिया को सूचना नहीं दे रहा है. यहां तक कि अंदर नहीं जाने दिया रहा है. हालांकि, आठ राउंड की मतगणना जारी है, लेकिन नतीजे सिर्फ पहले राउंड के ही घोषित किए गए हैं. डीएम मतगणना केंद्र पर मौजूद कर्मचारियों की सुस्ती का हवाला दे रहे हैं.

-वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने इस घटना को गुंडागर्दी और आतंक जैसे सख्त शब्दों से जोड़ा है.

-सपा उम्मीदवार प्रवीण निषाद ने ईवीएम पर सवाल उठाए हैं. काउंटिंग बूथ के अंदर सपा के एजेंट ने इसका विरोध भी किया है. निषाद ने कहा है कि हमारे समर्थकों को बाहर निकाला गया है. उन्होंने स्ट्रॉन्ग रूम से ऑब्जर्वर को बाहर निकालने का आरोप लगाया गया है.

गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव को कम से कम यूपी में 2019 का सेमीफाइनल माना जा रहा है. इस सीट पर बीजेपी की ओर से उपेंद्र शुक्ला मैदान में हैं जबकि समाजवादी पार्टी ने यहां से प्रवीण निषाद को प्रत्याशी बनाया है. खास बात ये है कि बहुजन समाज पार्टी ने भी खुलेतौर पर यहां प्रवीण निषाद का समर्थन करने का ऐलान किया हुआ है.

कांग्रेस की ओर से इस सीट पर सुरहिता करीम मैदान में हैं. हालांकि मुख्य मुकाबला यहां बीजेपी और सपा उम्मीदवार के बीच ही माना जा रहा है. रविवार को हुए मतदान में 47.4 फीसदी वोट पड़े थे. अगर 2014 के लोकसभा चुनाव से इसकी तुलना की जाए तो आंकड़ा करीब सवा सात फीसदी कम है क्योंकि 2014 के चुनाव में यहां 54.64 फीसदी वोट पड़े थे.

गौरतलब है कि बीजेपी ने पिछले साल यूपी विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के साथ सूबे की सत्ता में वापसी की तो मुख्यमंत्री का ताज योगी आदित्यनाथ के सिर सजा. इसके बाद उन्होंने गोरखपुर लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. इसी के चलते यहां उपचुनाव हुआ.

गोरखपुर बीजेपी का मजबूत दुर्ग माना जाता है. ये बीजेपी की परंपरागत सीट है. महंत अवैद्यनाथ ने 1970 में निर्दलीय के रूप में जीत का जो सिलसला शुरू किया, वह आज तक जारी है. महंत अवैद्यनाथ गोरखपुर से चार बार सांसद रहे, 1970 में निर्दलीय तो 1989 में वो हिंदू महासभा से सदस्य बने.

गोरखपर में महंत अवैद्यनाथ की राजनीतिक विरासत को योगी आदित्यनाथ ने 1998 में संभाला तो फिर पलटकर नहीं देखा. पिछले पांच बार से लगातार योगी बीजेपी के टिकट से संसद पहुंचते रहे हैं. 1991 और 1998 में बीजेपी को समाजवादी पार्टी से कड़ी टक्कर मिली थी लेकिन 2004 के बाद से अभी तक बीजेपी के योगी आदित्यनाथ एकतरफा जीत हासिल करते रहे हैं.

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