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	<title>पर्यटन &#060; Ujjawal Prabhat | उज्जवल प्रभात</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles.</description>
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	<title>पर्यटन &#060; Ujjawal Prabhat | उज्जवल प्रभात</title>
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		<title>मुन्नार की वादियां और कुमारकोम के बैकवाटर, &#8216;ईश्वर के अपने देश&#8217; केरल में बिताएं परफेक्ट छुट्टियां</title>
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		<pubDate>Sun, 07 Jun 2026 11:33:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
		<category><![CDATA[ईश्वर के अपने देश]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1031" height="611" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/6-28.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/6-28.jpg 1031w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/6-28-768x455.jpg 768w" sizes="(max-width: 1031px) 100vw, 1031px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%82-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%ae/">मुन्नार की वादियां और कुमारकोम के बैकवाटर, &#8216;ईश्वर के अपने देश&#8217; केरल में बिताएं परफेक्ट छुट्टियां</a></p>
<p>मुन्नार की सुबह पक्षियों की आवाजों से हुई। अलग-अलग डालों पर बैठकर उन्होंने सुर और लय स्वयं ही तय कर लिए थे। काफी दिनों बाद बिना अलार्म के किसी अन्य आवाज से सूर्योदय से पहले नींद खुली। बालकनी में आने पर ठंडी हवाओं और धुंध ने स्वागत किया। सामने दूर-दूर तक आंखों को सुकून देने &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="1031" height="611" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/6-28.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/6-28.jpg 1031w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/6-28-768x455.jpg 768w" sizes="(max-width: 1031px) 100vw, 1031px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%82-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%ae/">मुन्नार की वादियां और कुमारकोम के बैकवाटर, &#8216;ईश्वर के अपने देश&#8217; केरल में बिताएं परफेक्ट छुट्टियां</a></p>

<p>मुन्नार की सुबह पक्षियों की आवाजों से हुई। अलग-अलग डालों पर बैठकर उन्होंने सुर और लय स्वयं ही तय कर लिए थे। काफी दिनों बाद बिना अलार्म के किसी अन्य आवाज से सूर्योदय से पहले नींद खुली। बालकनी में आने पर ठंडी हवाओं और धुंध ने स्वागत किया।</p>



<p>सामने दूर-दूर तक आंखों को सुकून देने वाली हरियाली। चाय के बागान। सूर्य की किरणों से पहाड़ी की चोटी का स्वर्णिम रंग। शांति, चैन और इत्मीनान का अनुभव कराने वाला दृश्य। प्राकृतिक सौंदर्य का साक्षात्कार करते हुए कॉफी या चाय के अलावा कुछ और नहीं चाहिए था।</p>



<p>कोच्ची हवाई अड्डे से लगभग 130 किलोमीटर दूर मुन्नार पहुंचने में हमें चार घंटे लगे थे। घुमावदार सड़कें, पहाड़ी पर हरी लहरों की तरह चाय बागान व नारियल के पेड़ों के साथ चारों तरफ फैली हरियाली ने पता ही नहीं चलने दिया कि समय कैसे निकल गया।</p>



<p>केरलम के इडुक्की जिले में स्थित इस पर्यटन क्षेत्र में पूरे वर्ष सैलानी पहुंचते हैं परंतु आराम और आनंद का समय तो अक्टूबर से फरवरी ही है। मई तक ट्रैकिंग का मजा है मानसून आगमन से जून-जुलाई से सितंबर तक बारिश में हरियाली का अद्भुत नजारा रहता है।</p>



<p><strong>पहाड़ियों और हरियाली का नजारा</strong><br />मुन्नु का अर्थ तीन है तो आरु का अर्थ नदी। समुद्रतल से लगभग 1600 मीटर ऊपर मुथिरापुझा, नल्लाथन्नी और कुंडला नदियों का संगम स्थल मुन्नार अंग्रेजों के जमाने में भी गर्मी का विश्राम स्थल था। इंग्लैंड भेजने के लिए चाय, काफी व गर्म मसालों के संग्रहण का क्षेत्र। यहीं 2700 मीटर ऊंची आनामुड़ी चोटी ट्रैकिंग के लिए अच्छी जगह है तो माट्पेट्टी में सुंदर झील किनारे बैठकर आस-पास की पहाड़ियों व हरियाली का नजारा लिया जा सकता है।</p>



<p><strong>संग्रहालय में सफेद चाय<br /></strong>मुन्नार में टाटा टी द्वारा विकसित संग्रहालय में चाय की विकास यात्रा समझ सकते हैं। यह चाय उसी पौधे से बनती है जिससे काली या हरी चाय तैयार होती है, परंतु इसे तैयार करने का तरीका कुछ अलग ही है। सफेद चाय के लिए पौधे की सबसे नई पत्तियों को तोड़ा जाता है।</p>



<p>हरी पत्तियों से चाय तैयार करने की प्रक्रिया देखने के बाद स्वाद का आनंद और खरीदारी करते हुए यात्रा आगे बढ़ी। संग्रहालय में चाय उत्पादन की कहानी के साथ दूरसंचार (टेलीफोन) व्यवस्था के विकास की कहानी भी ताजा हो गई। मुन्नार में ही 1.8 किलोमीटर जिपलाइन हिलटाप एडवेंचर का भी मजा लिया जा सकता है।</p>



<p><strong>कुमारकोम गांव में बैकवाटर<br /></strong>कुमारकोम इसका उदाहरण है कि नारियल के बागानों से ढका कोई गांव कैसे पर्यटन केंद्र बन सकता है। कोट्टायम जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूरी पर देश की सबसे लंबी वेंबनाड़ झील किनारे स्थित इस गांव के शांत बैकवाटर (पश्चजल) में कई हाउसबोट तैरते नजर आते हैं।</p>



<p>झील में केरलम की चार प्रमुख नदियों– अचनकोविल, मणिमला, मीनच्चिल और पंपा के मीठे जल के साथ कोच्चि के पास अरब सागर का खारा पानी भी मिश्रित होता है। हाउसबोट से गुजरते हुए पक्षी अभयारण्य में साइबेरियाई सारस और अन्य पक्षियों की उड़ान देखने के बाद आंखें बंद कर अपने अरमानों को पंख लगया जा सकता है।</p>



<p>पर्यटक यहां केरलम के पारंपरिक आयुर्वेदिक मसाज से तरोताजा होने का अवसर भी नहीं चूकते। पूर्व का वेनिस कहे जाने वाले केरलम के अलप्पुझा की यात्रा में बोट पर ही तैयार भोजन का स्वाद प्राकृतिक नजारे के बीच कुछ और ही बढ़ जाता है।</p>



<p><strong>पद्मनाभस्वामी के दर्शन<br /></strong>कोच्ची से शुरू हुई छह दिवसीय यात्रा तिरुवनंतपुरम होते हुए पूर्णता की तरफ बढ़ी। मध्य केरलम में कोच्ची से मात्र 15 किलोमीटर दूर पेरियार (पर्णा) नदी के तट पर अद्वैत वेदांत के संस्थापक आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली कलाडी है। तिरुवनंतपुरम में परंपरागत धोती में पद्मनाभस्वामी के दर्शन का अनुभव अलौकिक है।</p>



<p>खजानों से भरे इस सात तहखानों वाले रहस्यमय मंदिर में ब्रह्मा, विष्णु व महेश एक साथ पूजित हैं। ‘ईश्वर के देश’ केरलम में इस मंदिर की स्थापना और विकास की चर्चा द्वापर में भगवान परशुराम से लेकर 18वीं सदी में त्रावनकोर के राजा मार्तंड वर्मा तक विस्तारित है। राजधानी से मात्र 15 किलोमीटर दूर स्थित कोवलम बीच पर तीन अर्धचंद्राकार समुद्र तटों का अलग आकर्षण है। चट्टानी किनारे, नारियल और ताड़ के पेड़ सुंदर नजारा प्रस्तुत करते हैं।</p>
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		<title>किचन भारत में और बेडरूम म्यांमार में, हैरान कर देगी नागालैंड के इस अनोखे गांव की दिलचस्प कहानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Jun 2026 11:30:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
		<category><![CDATA[बेडरूम म्यांमार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1058" height="610" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/7-28.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/7-28.jpg 1058w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/7-28-768x443.jpg 768w" sizes="(max-width: 1058px) 100vw, 1058px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%ae-%e0%a4%ae%e0%a5%8d/">किचन भारत में और बेडरूम म्यांमार में, हैरान कर देगी नागालैंड के इस अनोखे गांव की दिलचस्प कहानी</a></p>
<p>क्या किसी ऐसी जगह के बारे में सोच सकते हैं, जहां आप खाना एक देश में खाएं और सोने के लिए दूसरे देश चले जाएं? सुनने में यह काल्पनिक कहानी लगता है, लेकिन हमारे नॉर्थ-ईस्ट में एक ऐसा गांव सचमुच मौजूद है। नागालैंड की राजधानी कोहिमा से लगभग 389 किलोमीटर दूर मोन जिले में एक &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="1058" height="610" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/7-28.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/7-28.jpg 1058w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/7-28-768x443.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1058px) 100vw, 1058px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%ae-%e0%a4%ae%e0%a5%8d/">किचन भारत में और बेडरूम म्यांमार में, हैरान कर देगी नागालैंड के इस अनोखे गांव की दिलचस्प कहानी</a></p>

<p>क्या किसी ऐसी जगह के बारे में सोच सकते हैं, जहां आप खाना एक देश में खाएं और सोने के लिए दूसरे देश चले जाएं? सुनने में यह काल्पनिक कहानी लगता है, लेकिन हमारे नॉर्थ-ईस्ट में एक ऐसा गांव सचमुच मौजूद है।</p>



<p>नागालैंड की राजधानी कोहिमा से लगभग 389 किलोमीटर दूर मोन जिले में एक ऐसा गांव बसा है, जो आपको हैरान कर देगा। इस गांव का नाम है लोंगवा। यह गांव भारत की पूर्वी सीमा पर स्थित है और अपनी अनोखी भौगोलिक स्थिति के लिए मशहूर है। दरअसल, यहां एक ऐसा घर है, जो आधा भारत में है और आधा म्यांमार में। आइए जानें इस हैरान करने वाले गांव से जुड़ी दिलचस्प बातें।</p>



<p><strong>आधा भारत और आधा म्यांमार में है घर<br /></strong>लोंगवा मोन जिले के सबसे बड़े गांवों में से एक है। इस गांव की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां के राजा, जिन्हें अंग कहा जाता है, का घर ठीक भारत और म्यांमार की सीमा पर बना हुआ है। भारत और म्यांमार की सीमा इनके घर के ठीक बीच से होकर गुजरता है। यही वजह है कि राजा और उनका परिवार खाना भारत में खाते हैं और सोने के लिए म्यांमार वाले हिस्से का इस्तेमाल करते हैं।</p>



<p><strong>दोनों देशों के गांवों पर राज<br /></strong>लोंगवा समेत कई गांव यहां के राजा के अधीन आते हैं। इनमें से कुछ गांव म्यांमार में हैं, तो कुछ नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में फैले हुए हैं। भले ही यह गांव दो देशों में बंटा है, लेकिन पूरे गांव पर राज सिर्फ एक ही राजा का चलता है।</p>



<p><strong>बिना वीजा-पासपोर्ट के घूमते हैं लोग<br /></strong>भारत और म्यांमार की सीमा पर होने की वजह से यहां के ग्रामीणों को तकनीकी रूप से दोनों देशों की दोहरी नागरिकता मिली हुई है। इसका फायदा यह है कि यहां के लोगों को म्यांमार जाने के लिए न तो किसी वीजा की जरूरत होती है और न ही भारतीय पासपोर्ट की। वे दोनों देशों में पूरी आजादी से घूम-फिर सकते हैं।</p>



<p><strong>चार नदियों से घिरी प्राकृतिक सुंदरता<br /></strong>यह गांव जितना अनोखा है, उतना ही खूबसूरत भी है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता देखने लायक है। इस पूरे गांव से होकर कुल चार नदियां बहती हैं, जिसमें से दो नदियां भारत के हिस्से में हैं और दो नदियां म्यांमार के हिस्से में बहती हैं।</p>



<p><strong>कभी कहलाते थे हेड हंटर्स<br /></strong>इस गांव में रहने वाली कोन्याक जनजाति के लोगों को पहले हेड हंटर्स के नाम से जाना जाता था। पुराने समय में इस ट्राइब के लोग इंसानों को मारकर उनका सिर अपने साथ ले जाते थे। हालांकि, साल 1960 के दशक के बाद से यहां हेड हंटिंग की यह प्रथा पूरी तरह से बंद हो चुकी है।</p>



<p><strong>कैसे पहुंचें मोन जिला?<br /></strong>अगर आप इस अनोखे गांव की यात्रा करना चाहते हैं, तो आपको पहले मोन जिला मुख्यालय पहुंचना होगा।</p>



<p>हवाई मार्ग- सबसे नजदीकी एयरपोर्ट असम का जोरहाट है, जो मोन से लगभग 161 किलोमीटर दूर है। वहां से सीधे मोन के लिए बस नहीं है, इसलिए आपको पहले सोनारी या सिमुलगुरी पहुंचना होगा और फिर वहां से मोन के लिए आगे बढ़ना होगा।</p>



<p>रेल मार्ग- मोन के लिए कोई सीधी ट्रेन सेवा नहीं है। आप असम के भोजू रेलवे स्टेशन तक आ सकते हैं और वहां से 7 किमी दूर सोनारी पहुंचकर मोन जा सकते हैं। दूसरा विकल्प सिमुलगुरी रेलवे स्टेशन है, जहां से आपको पहले नगिनीमोरा जाना होगा और फिर वहां से मोन जा सकते हैं।</p>



<p>सड़क मार्ग- असम के शिवसागर जिले के सोनारी के रास्ते बस से मोन पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा सिमुलगुरी के रास्ते भी आ सकते हैं, लेकिन सीधी बस न होने के कारण पहले नगिनीमोरा आना होगा और फिर वहां से मोन जिला मुख्यालय के लिए बस लेनी होगी।</p>
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		<title>सस्ता दिखने वाला ट्रैवल पैकेज आखिर में क्यों पड़ जाता है महंगा?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:51:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
		<category><![CDATA[ट्रैवल पैकेज]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="830" height="448" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/7-65.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/7-65.jpg 830w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/7-65-768x415.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 830px) 100vw, 830px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%b8%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%96%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%88%e0%a4%b5%e0%a4%b2-%e0%a4%aa/">सस्ता दिखने वाला ट्रैवल पैकेज आखिर में क्यों पड़ जाता है महंगा?</a></p>
<p>जब भी हम सोशल मीडिया या इंटरनेट पर स्क्रॉल करते हैं, तो अक्सर हमें ऐसे विज्ञापन दिखते हैं &#8211; &#8220;मात्र ₹9,999 में मनाली की शानदार ट्रिप!&#8221; या &#8220;दुबई का सबसे सस्ता टूर पैकेज!&#8221;। ये ऑफर देखकर किसी का भी मन ललचा सकता है और हम तुरंत बुकिंग करने का मन बना लेते हैं। हालांकि, क्या &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="830" height="448" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/7-65.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/7-65.jpg 830w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/7-65-768x415.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 830px) 100vw, 830px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%b8%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%96%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%88%e0%a4%b5%e0%a4%b2-%e0%a4%aa/">सस्ता दिखने वाला ट्रैवल पैकेज आखिर में क्यों पड़ जाता है महंगा?</a></p>

<p>जब भी हम सोशल मीडिया या इंटरनेट पर स्क्रॉल करते हैं, तो अक्सर हमें ऐसे विज्ञापन दिखते हैं &#8211; &#8220;मात्र ₹9,999 में मनाली की शानदार ट्रिप!&#8221; या &#8220;दुबई का सबसे सस्ता टूर पैकेज!&#8221;। ये ऑफर देखकर किसी का भी मन ललचा सकता है और हम तुरंत बुकिंग करने का मन बना लेते हैं।</p>



<p>हालांकि, क्या सच में ये पैकेज इतने सस्ते होते हैं? असल जिंदगी में जब आप ट्रिप पर जाते हैं, तो आपको एहसास होता है कि आपने अपनी तय की गई बजट से कहीं ज्यादा पैसा खर्च कर दिया है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इन सस्ते पैकेजों के पीछे का असली खेल क्या है।</p>



<p><strong>&#8216;हिडेन&#8217; खर्चे का जाल<br /></strong>सस्ते पैकेज की सबसे बड़ी चालाकी यही होती है कि वे आपको सिर्फ बेस प्राइस दिखाते हैं। जैसे ही आप बुकिंग के आखिरी पेज पर पहुंचते हैं, उसमें कई तरह के टैक्स, सर्विस चार्ज, और कन्वीनियंस फीस जुड़ जाती है। अंतरराष्ट्रीय ट्रिप के मामले में, वीजा और ट्रैवल इंश्योरेंस का खर्च अक्सर पैकेज में शामिल नहीं होता, जो बाद में आपकी जेब ढीली करता है।</p>



<p><strong>फ्लाइट और सामान का चक्कर<br /></strong>कई बार सस्ते पैकेज में ऐसी एयरलाइन्स की टिकट दी जाती है, जिनका समय बहुत अजीब होता है (जैसे रात के 2 बजे या सुबह 4 बजे)। इसके अलावा, सबसे बड़ा धोखा सामान को लेकर होता है। आपको सिर्फ केबिन बैग ले जाने की अनुमति होती है। जैसे ही आप बड़ा बैग लेकर एयरपोर्ट पहुंचते हैं, आपको भारी भरकम एक्स्ट्रा फीस चुकानी पड़ती है।</p>



<p><strong>शहर से बहुत दूर वाले होटल<br /></strong>पैकेज को सस्ता रखने के लिए ट्रैवल एजेंसियां अक्सर ऐसे होटल बुक करती हैं, जो शहर के मुख्य बाज़ार या घूमने वाली जगहों से बहुत दूर होते हैं। ऐसे में होटल सस्ता तो मिल जाता है, लेकिन आप हर दिन कैब या टैक्सी में इतना पैसा खर्च कर देते हैं कि वह किसी महंगे होटल के बराबर ही पड़ जाता है। इसके अलावा आपका कीमती समय भी सफर में ही बर्बाद हो जाता है।</p>



<p><strong>फूड और साइटसीन की आधी-अधूरी सच्चाई<br /></strong>&#8220;Breakfast Included&#8221; यानी नाश्ता मुफ्त- यह लाइन हर सस्ते पैकेज में होती है, लेकिन दोपहर और रात के खाने का क्या? आपको वह अपनी जेब से देना होता है। इसके अलावा, घूमने के नाम पर आपको कई जगहों को सिर्फ बाहर से दिखा दिया जाता है। म्यूजियम, किले या किसी भी खास जगह के अंदर जाने का टिकट आपको खुद खरीदना पड़ता है। कई बार तो गाइड का खर्चा भी पैकेज में नहीं होता।</p>



<p><strong>एयरपोर्ट से होटल तक जाने का खर्च<br /></strong>सस्ते पैकेज में &#8216;एयरपोर्ट ट्रांसफर&#8217; शामिल नहीं होता। किसी अनजान शहर या देश में एयरपोर्ट से उतरकर प्राइवेट टैक्सी लेने में आपको एक मोटी रकम चुकानी पड़ सकती है, जो पहले से आपके बजट का हिस्सा नहीं थी।</p>



<p><strong>कैसे बचें इस धोखे से?<br /></strong>सस्ते ट्रैवल पैकेजों से बचना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। अगली बार कोई भी लुभावना ऑफर देखने के बाद सीधा अपना क्रेडिट कार्ड न निकालें। उस पैकेज की &#8220;Terms &amp; Conditions&#8221; और &#8220;What&#8217;s Not Included&#8221; वाला हिस्सा बहुत ध्यान से पढ़ें।</p>



<p>अगर आप इन हिडेन चार्जेस को पहले ही जोड़ लेंगे, तो आपको समझ आ जाएगा कि वह पैकेज असल में कितना सस्ता या महंगा है। एक समझदार यात्री बनें और अपनी मेहनत की कमाई को सही जगह खर्च करें।</p>
<p>आप पढ़ रहे हैं : UjjawalPrabhat.Com</p>
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		<title>IRCTC लाया 6 दिनों का &#8216;जन्नत-ए-कश्मीर&#8217; टूर, रहना-खाना और फ्लाइट टिकट भी है शामिल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 May 2026 06:25:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
		<category><![CDATA[जन्नत-ए-कश्मीर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="874" height="468" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/2-30.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/2-30.jpg 874w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/2-30-768x411.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 874px) 100vw, 874px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/irctc-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be-6-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%a4-%e0%a4%8f-%e0%a4%95%e0%a4%b6%e0%a5%8d/">IRCTC लाया 6 दिनों का &#8216;जन्नत-ए-कश्मीर&#8217; टूर, रहना-खाना और फ्लाइट टिकट भी है शामिल</a></p>
<p>इस भयंकर गर्मी में अगर आप कश्मीर की बर्फीली वादियों और खूबसूरत झीलों के बीच छुट्टियां बिताने का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए एक शानदार खबर है। इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) पर्यटकों के लिए एक हवाई यात्रा पैकेज लेकर आया है, जिसका नाम है &#8216;जन्नत-ए-कश्मीर&#8217;। इस पैकेज के जरिए आप &#8230;</p>
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<p>इस भयंकर गर्मी में अगर आप कश्मीर की बर्फीली वादियों और खूबसूरत झीलों के बीच छुट्टियां बिताने का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए एक शानदार खबर है।</p>



<p>इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) पर्यटकों के लिए एक हवाई यात्रा पैकेज लेकर आया है, जिसका नाम है &#8216;जन्नत-ए-कश्मीर&#8217;। इस पैकेज के जरिए आप बिना किसी परेशानी के कश्मीर की सैर कर सकते हैं। आइए जानते हैं इससे जुड़ी सभी जरूरी डिटेल्स।</p>



<p><strong>ट्रिप की तारीख और समय</strong><br />यह टूर पैकेज कुल 5 रातों और 6 दिनों का होगा। सफर की शुरुआत 20 जून 2026 को होगी और वापसी 25 जून 2026 को होगी। यात्रियों को लखनऊ से श्रीनगर तक फ्लाइट के जरिए ले जाया जाएगा, ताकि सफर आरामदायक और छोटा रहे।</p>



<p><strong>क्या-क्या सुविधाएं हैं शामिल?<br /></strong>आईआरसीटीसी ने इस ट्रिप को बेहद सुविधाजनक बनाया है:</p>



<p>रहने का इंतजाम: टूरिस्ट्स को थ्री-स्टार होटलों में ठहराया जाएगा। इसके साथ ही, डल झील के खूबसूरत हाउस बोट में भी रुकने का शानदार अनुभव मिलेगा।<br />खान-पान: पूरी ट्रिप के दौरान खाने-पीने की बेहतरीन व्यवस्था पैकेज के अंदर ही शामिल की गई है।</p>



<p><strong>किन-किन जगहों पर मिलेगा घूमने का मौका?<br /></strong>इस 6 दिन की ट्रिप में कश्मीर के लगभग सभी प्रमुख और लोकप्रिय पर्यटन स्थल कवर किए जाएंगे:</p>



<p>मुख्य शहर: श्रीनगर, गुलमर्ग, पहलगाम और सोनमर्ग।<br />प्राकृतिक नजारे: डल झील, बर्फीले पहाड़, अरु घाटी, चंदनवारी, बेताब घाटी और खिलनमर्ग।<br />ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल: हजरतबल दरगाह, शंकराचार्य मंदिर, चश्मेशाही, मुगल गार्डन, शालीमार बाग और निशात बाग।<br />अगर आप मशहूर गोंडोला केबल कार की सवारी का आनंद लेना चाहते हैं, तो इसका टिकट आपको अपनी तरफ से खरीदना होगा।</p>



<p><strong>कितना है पैकेज का खर्च?<br /></strong>किराये को यात्रियों की संख्या के हिसाब से अलग-अलग रखा गया है:</p>



<p>अकेले यात्रा करने पर (सिंगल): ₹68,800<br />दो लोगों के साथ रहने पर (डबल): ₹52,300<br />तीन लोगों के साथ रहने पर (ट्रिपल): ₹49,950<br />बच्चे का किराया (अलग बेड के साथ): ₹41,100 (माता-पिता के साथ)<br />बच्चे का किराया (बिना बेड के): ₹36,800 (माता-पिता के साथ)</p>



<p><strong>कैसे करें बुकिंग?<br /></strong>IRCTC के मुताबिक, यह बुकिंग &#8216;पहले आओ, पहले पाओ&#8217; के नियम पर आधारित है। इसलिए जितनी जल्दी हो सके, अपनी सीट पक्की कर लें। बुकिंग के लिए आपके पास दो ऑप्शन हैं:</p>



<p>ऑनलाइन मोड: आप सीधे IRCTC की वेबसाइट www.irctctourism.com पर जाकर घर बैठे पैकेज बुक कर सकते हैं।<br />ऑफलाइन मोड: आप लखनऊ के गोमती नगर में मौजूद पर्यटन भवन स्थित आईआरसीटीसी के कार्यालय जाकर भी बुकिंग करा सकते हैं।</p>
<p>आप पढ़ रहे हैं : UjjawalPrabhat.Com</p>
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		<title>होटल के कमरे में रखी इन चीजों को भूलकर भी ना समझें फ्री!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 May 2026 11:48:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
		<category><![CDATA[होटल]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="761" height="401" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/5-72.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%96%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%a8-%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%9c/">होटल के कमरे में रखी इन चीजों को भूलकर भी ना समझें फ्री!</a></p>
<p>पहली बार किसी होटल में रुकने का अनुभव जितना रोमांचक होता है, अंदर से उतनी ही घबराहट भी महसूस होती है। अक्सर उत्साह में या सही जानकारी न होने के कारण हम अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो हमारी जेब ढीली करने के साथ-साथ पूरी ट्रिप का मजा भी किरकिरा कर सकती &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="761" height="401" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/5-72.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%96%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%a8-%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%9c/">होटल के कमरे में रखी इन चीजों को भूलकर भी ना समझें फ्री!</a></p>

<p>पहली बार किसी होटल में रुकने का अनुभव जितना रोमांचक होता है, अंदर से उतनी ही घबराहट भी महसूस होती है। अक्सर उत्साह में या सही जानकारी न होने के कारण हम अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो हमारी जेब ढीली करने के साथ-साथ पूरी ट्रिप का मजा भी किरकिरा कर सकती हैं।</p>



<p>अगर आप भी पहली बार किसी होटल में स्टे की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपको थोड़ा स्मार्ट बनने की जरूरत है। आइए जानते हैं उन 5 आम गलतियों के बारे में, जिनसे बचकर आप अपने अनुभव को शानदार और टेंशन-फ्री बना सकते हैं।</p>



<p><strong>चेक-इन के समय आईडी और बुकिंग पेपर्स न रखना<br /></strong>होटल में जाते ही सबसे पहला काम चेक-इन होता है। कई बार लोग जल्दीबाजी में अपना आधार कार्ड, पासपोर्ट या बुकिंग कंफर्मेशन का प्रिंटआउट/डिजिटल कॉपी ढूंढने में परेशान हो जाते हैं।</p>



<p>इससे चेक-इन में देरी होती है और अगर आपकी होटल बुकिंग की जानकारी मिलने में समस्या आए, तो आपको कमरा मिलने में भी दिक्कत हो सकती है। हमेशा अपनी ऑरिजनल आईडी और बुकिंग वाउचर को एक अलग फोल्डर में या फोन के फ्रंट पेज पर तैयार रखें।</p>



<p><strong>हिडन चार्जेस और मिनी-बार की सुविधाओं को न समझना<br /></strong>होटल के कमरों में फ्रिज के अंदर रखी ठंडी ड्रिंक्स, चॉकलेट्स और स्नैक्स देखते ही खाने का मन करने लगता है। पहली बार रुकने वाले लोग अक्सर इसे कॉम्प्लिमेंट्री यानी फ्री समझकर इस्तेमाल कर लेते हैं।</p>



<p>ध्यान रखें कि केवल पानी की दो बोतलें और टी-मेकर ही आमतौर पर मुफ्त होते हैं। फ्रिज के सामान और एक्स्ट्रा लॉन्ड्री सर्विसेज के लिए चार्जेस लगते हैं। कुछ होटलों में रिजॉर्ट फीस भी होती है। रूम का इस्तेमाल शुरू करने से पहले वहां रखी रेट लिस्ट को जरूर पढ़ें।</p>



<p><strong>चेक-आउट के समय की अनदेखी करना<br /></strong>हर होटल का अपना एक चेक-इन और चेक-आउट समय होता है। कई बार पहली बार आने वाले लोग अपनी मर्जी से देर तक रुकते हैं। ये सोचकर कि अभी तो दिन बाकी है। अगर आप चेक-आउट के समय में देरी करते हैं, तो होटल आपसे आधे दिन या पूरे दिन का एक्स्ट्रा किराया वसूल सकता है।</p>



<p>अगर आपकी ट्रेन या फ्लाइट शाम की है, तो आप रिसेप्शन पर अपना सामान लगेज रूम में जमा करा सकते हैं और शहर घूम सकते हैं, लेकिन कमरे को समय पर खाली करना ही समझदारी है।</p>



<p><strong>रिव्यु और होटल की लोकेशन न जांचना<br /></strong>सिर्फ कम कीमत या शानदार फोटो देखकर होटल बुक करना सबसे बड़ी गलती हो सकती है। हो सकता है कि फोटो में दिख रहा कमरा असल में वैसा न हो, या होटल शहर के मेन हिस्से से इतना दूर हो कि आपका आधा समय और पैसा केवल आने-जाने में ही खर्च हो जाए।</p>



<p>बुकिंग से पहले दूसरे लोगों के रिव्यु पढ़ें और गूगल मैप्स पर होटल की लोकेशन जरूर देखें कि वह रेलवे स्टेशन या टूरिस्ट स्पॉट्स से कितनी दूर है।</p>



<p><strong>होटल स्टाफ के साथ गलत व्यवहार और सुरक्षा की अनदेखी<br /></strong>होटल में रुकते समय सुरक्षा सबसे अहम है। कुछ लोग कमरे का दरवाजा ठीक से बंद नहीं करते या अपनी की-कार्ड को कहीं भी छोड़ देते हैं। साथ ही, स्टाफ के साथ बुरा व्यवहार आपकी सर्विस को प्रभावित कर सकता है।</p>



<p>होटल स्टाफ, जैसे- हाउसकीपिंग या बेलबॉय के साथ अच्छे से व्यवहार करें। कमरे के अंदर मौजूद सेफ का इस्तेमाल अपने कीमती सामान और पासपोर्ट के लिए करें। साथ ही, कमरे से बाहर निकलते समय हमेशा चेक करें कि दरवाजा ऑटो-लॉक हो गया है।</p>
<p>आप पढ़ रहे हैं : UjjawalPrabhat.Com</p>
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