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	<title>लाइफस्टाइल &#060; Ujjawal Prabhat | उज्जवल प्रभात</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles.</description>
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	<title>लाइफस्टाइल &#060; Ujjawal Prabhat | उज्जवल प्रभात</title>
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		<title>9 से 5 की डेस्क जॉब से अकड़ गई है कमर? अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे करें ये योगासन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Jun 2026 06:32:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
		<category><![CDATA[योगासन]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="877" height="493" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/3-52.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/3-52.jpg 877w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/3-52-768x432.jpg 768w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/3-52-390x220.jpg 390w" sizes="(max-width: 877px) 100vw, 877px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/9-%e0%a4%b8%e0%a5%87-5-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a1%e0%a5%87%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95-%e0%a4%9c%e0%a5%89%e0%a4%ac-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%97%e0%a4%88-%e0%a4%b9/">9 से 5 की डेस्क जॉब से अकड़ गई है कमर? अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे करें ये योगासन</a></p>
<p>आज के समय में 9-5 की डेस्क जॉब हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। चाहे आप ऑफिस जा रहे हों या वर्क फ्रॉम होम कर रहे हों, लगातार 7-8 घंटे कुर्सी पर बैठे रहने का सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है। गलत पोस्चर और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण पीठ, कमर और &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="877" height="493" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/3-52.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/3-52.jpg 877w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/3-52-768x432.jpg 768w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/3-52-390x220.jpg 390w" sizes="(max-width: 877px) 100vw, 877px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/9-%e0%a4%b8%e0%a5%87-5-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a1%e0%a5%87%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95-%e0%a4%9c%e0%a5%89%e0%a4%ac-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%97%e0%a4%88-%e0%a4%b9/">9 से 5 की डेस्क जॉब से अकड़ गई है कमर? अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे करें ये योगासन</a></p>

<p>आज के समय में 9-5 की डेस्क जॉब हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। चाहे आप ऑफिस जा रहे हों या वर्क फ्रॉम होम कर रहे हों, लगातार 7-8 घंटे कुर्सी पर बैठे रहने का सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है। गलत पोस्चर और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण पीठ, कमर और कंधों में दर्द होना आम समस्या बन गई है।</p>



<p>इस कंडीशन में जिम या एक्सरसाइज करने के साथ-साथ काम के बीच भी छोटे-छोटे ब्रेक्स लेकर कुछ आसान योगासन अपनी चेयर पर बैठकर ही करना फायदेमंद साबित हो सकता है। आइए जानें इन योगासनों के बारे में।</p>



<p><strong>चेयर कैट-काउ पोज<br /></strong>यह आसन रीढ़ की हड्डी की फ्लेक्सिबिलिटी को बढ़ाने और पीठ के निचले हिस्से के स्ट्रेस को कम करने के लिए बेहतरीन है। इससे पीठ और गर्दन की मांसपेशियों की जकड़न तुरंत दूर होती है।</p>



<p>कैसे करें- कुर्सी पर सीधे बैठ जाएं और दोनों पैरों को जमीन पर सपाट रखें। अपने हाथों को घुटनों पर रखें। सांस लेते हुए अपनी छाती को आगे की तरफ निकालें और रीढ़ को अंदर की ओर झुकाते हुए ऊपर देखें। अब सांस छोड़ते हुए रीढ़ को बाहर की तरफ घुमावदार बनाएं और अपनी ठुड्डी को छाती से लगाएं।</p>



<p><strong>सीटेड स्पाइनल ट्विस्ट<br /></strong>लगातार बैठने से रीढ़ की हड्डी में जो दबाव बनता है, यह आसन उसे रिलीज करता है। इस आसन को करने से कमर के निचले हिस्से में दर्द से भी आराम मिलता है।</p>



<p>कैसे करें- कुर्सी पर सीधे बैठें। अपने बाएं हाथ को दाहिने घुटने पर रखें और दाहिने हाथ को कुर्सी के पिछले हिस्से पर टिकाएं। सांस छोड़ते हुए अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को दाहिनी ओर मोड़ें और कंधे के ऊपर से पीछे की ओर देखें। 5-10 सेकंड रुकें, फिर यही प्रक्रिया दूसरी तरफ से दोहराएं।</p>



<p><strong>चेयर पिजन पोज<br /></strong>ज्यादा देर बैठने से हमारे हिप फ्लेक्सर्स टाइट हो जाते हैं, जिसका सीधा असर लोअर बैक पर पड़ता है। यह आसन इसी स्ट्रेस को कम करता है। यह कूल्हों और पीठ के निचले हिस्से को स्ट्रेच करके साइटिका के दर्द से भी राहत देता है।</p>



<p>कैसे करें- कुर्सी पर सीधे बैठें। अपने दाहिने पैर के टखने को उठाकर बाएं पैर के घुटने के ऊपर रखें। अब गहरी सांस लें और रीढ़ को सीधा रखते हुए थोड़ा आगे की तरफ झुकें। कुछ सेकंड रुकें और फिर पैर बदल लें।</p>



<p><strong>सीटेड फॉरवर्ड बेंड<br /></strong>यह आसन पूरी पीठ और हैमस्ट्रिंग को एक रिलैक्सिंग स्ट्रेच देता है। यह दिमाग शांत करने और स्ट्रेस रिलीज में भी मदद करता है।</p>



<p>कैसे करें- कुर्सी पर थोड़े आगे की ओर खिसक कर बैठें और पैरों के बीच थोड़ी दूरी बना लें। गहरी सांस लें और छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें, ताकि आपका पेट जांघों को छुए। अपने हाथों को नीचे जमीन की तरफ ढीला छोड़ दें और सिर को भी नीचे झुका लें। 30 सेकंड इसी पोजीशन में रहें।</p>



<p><strong>ईगल आर्म्स<br /></strong>कंप्यूटर पर लगातार टाइपिंग करने से कंधों और ऊपरी पीठ में जो भारीपन आता है, यह आसन उसे दूर करता है।</p>



<p>कैसे करें- सीधे बैठें और दोनों हाथों को सामने लाएं और बाईं कोहनी को दाईं कोहनी के ऊपर रखते हुए आपस में क्रॉस करें। अब दोनों हथेलियों को मिलाने की कोशिश करें। अपनी कोहनियों को कंधे के बराबर ऊपर उठाएं और कंधों को कानों से दूर रखें। कुछ सांसें यहां लें और फिर हाथ बदल लें।</p>
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		<title>चुपके-चुपके आपकी किडनी को डैमेज कर रही हैं रोजमर्रा की ये आदतें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Jun 2026 06:01:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
		<category><![CDATA[किडनी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="870" height="422" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/1-33.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/1-33.jpg 870w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/1-33-768x373.jpg 768w" sizes="(max-width: 870px) 100vw, 870px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a1%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b/">चुपके-चुपके आपकी किडनी को डैमेज कर रही हैं रोजमर्रा की ये आदतें</a></p>
<p>हमारे शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने का काम किडनी करती है। शरीर का कचरा बाहर निकालने के साथ-साथ ये शरीर का बॉडी फ्लूएड बैलेंस भी बनाकर रखती है। हालांकि, हमारी आज की लाइफस्टाइल में कई ऐसी आदतें शामिल हैं, जो हमारी किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं। खतरनाक बात यह है कि शुरुआत में किडनी डैमज &#8230;</p>
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<p>हमारे शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने का काम किडनी करती है। शरीर का कचरा बाहर निकालने के साथ-साथ ये शरीर का बॉडी फ्लूएड बैलेंस भी बनाकर रखती है। हालांकि, हमारी आज की लाइफस्टाइल में कई ऐसी आदतें शामिल हैं, जो हमारी किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं।</p>



<p>खतरनाक बात यह है कि शुरुआत में किडनी डैमज के लक्षण साफ नजर नहीं आते। इसलिए बीमारी चुपके-चुपके बढ़ती रहती है। इसलिए जरूरी है कि आप उन आदतों में सुधार करें, जो आपकी किडनी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं। आइए जानें इन आदतों के बारे में।</p>



<p><strong>किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं ये आदतें<br /></strong>भरपूर मात्रा में पानी न पीना- किडनी को स्वस्थ रखने के लिए शरीर में पानी का सही स्तर होना जरूरी है। कम पानी पीने से टॉक्सिन्स शरीर में जमा होने लगते हैं, जिससे किडनी पर एक्स्ट्रा प्रेशर पड़ता है। लंबे समय तक यह आदत किडनी फेल्योर का कारण भी बन सकती है।<br />ज्यादा नमक खाना- ज्यादा नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है और यह किडनी की ब्लड वेसल्स को प्रभावित करता है। धीरे-धीरे यह किडनी की फिल्टरिंग क्षमता को कम कर देता है।<br />ज्यादा पेनकिलर लेना- सिरदर्द या बॉडी पेन होने पर बार-बार पेनकिलर लेना सामान्य लगता है, लेकिन इन दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल किडनी को सीधा नुकसान पहुंचाता है।<br />पूरी नींद न लेना- रात में ठीक से नींद न लेने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं, जो ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को प्रभावित करते हैं। यह स्थिति किडनी पर भी दबाव डालती है।<br />ज्यादा जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड- मार्केट के प्रोसेस्ड स्नैक्स, फ्राइड आइटम और पैकेज्ड फूड में प्रिजरवेटिव्स और नमक की मात्रा ज्यादा होती है। इनका लगातार सेवन किडनी की काम करने की क्षमता को कम कर देता है।<br />ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को इग्नोर करना- डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी रोग के सबसे बड़े कारण हैं। इन्हें कंट्रोल न करने से किडनी पर धीरे-धीरे गंभीर असर पड़ता है।<br />ज्यादा प्रोटीन लेना- प्रोटीन हेल्दी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा प्रोटीन लेने से किडनी पर एक्स्ट्रा लोड पड़ता है। यह आदत लंबे समय में किडनी को कमजोर कर देती है।<br />स्मोकिंग और अल्कोहल- सिगरेट और शराब किडनी के सेल्स को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे किडनी फंक्शन धीरे-धीरे कमजोर होता है और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने की क्षमता घट जाती है।</p>



<p>किडनी की देखभाल करना उतना मुश्किल नहीं है, जितना हम सोचते हैं। थोड़ी सजगता और सही लाइफस्टाइल अपनाकर हम इसे लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं। भरपूर मात्रा में पानी पिएं, हेल्दी डाइट लें, नींद पूरी करें और दवाइयों या नशे से बचें।</p>
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		<title>नींद की कमी से कमजोर हो रहा है दिमाग का &#8216;ब्लड-ब्रेन बैरियर&#8217;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 06:06:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
		<category><![CDATA[ब्लड-ब्रेन बैरियर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="853" height="503" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/5-33.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/5-33.jpg 853w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/5-33-768x453.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 853px) 100vw, 853px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be/">नींद की कमी से कमजोर हो रहा है दिमाग का &#8216;ब्लड-ब्रेन बैरियर&#8217;</a></p>
<p>हम सभी जानते हैं कि अच्छी सेहत के लिए एक सुकून भरी नींद लेना कितना जरूरी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ठीक से न सो पाना आपके दिमाग को कितनी गहराई तक नुकसान पहुंचा सकता है? हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि नींद में बार-बार &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="853" height="503" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/5-33.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/5-33.jpg 853w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/5-33-768x453.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 853px) 100vw, 853px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be/">नींद की कमी से कमजोर हो रहा है दिमाग का &#8216;ब्लड-ब्रेन बैरियर&#8217;</a></p>

<p>हम सभी जानते हैं कि अच्छी सेहत के लिए एक सुकून भरी नींद लेना कितना जरूरी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ठीक से न सो पाना आपके दिमाग को कितनी गहराई तक नुकसान पहुंचा सकता है?</p>



<p>हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि नींद में बार-बार खलल पड़ने से हमारे दिमाग के &#8216;ब्लड-ब्रेन बैरियर&#8217; को भारी नुकसान पहुंचता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह रिसर्च क्या कहती है।</p>



<p><strong>दिमाग का &#8216;सिक्योरिटी गार्ड&#8217; है ब्लड-ब्रेन बैरियर<br /></strong>&#8216;ब्लड-ब्रेन बैरियर&#8217; को आप अपने दिमाग का एक बेहद चुस्त सिक्योरिटी गार्ड या एक खास फिल्टर मान सकते हैं। यह दिमाग की रक्त वाहिकाओं के चारों ओर कोशिकाओं की एक परत होती है।</p>



<p><strong>इसका काम क्या है?<br /></strong>यह बहुत ही चुनिंदा चीजों को ही अंदर जाने देता है। यह दिमाग तक जरूरी ऑक्सीजन और पोषक तत्व तो पहुंचाता है, लेकिन खतरनाक बैक्टीरिया, विषैले पदार्थों और ज्यादातर दवाइयों को बाहर ही रोक देता है। इस तरह यह हमारे दिमाग को गंभीर नुकसान से बचाता है।</p>



<p><strong>नींद में खलल पड़ने से क्या होता है असर?<br /></strong>&#8216;लैबमेड डिस्कवरी&#8217; पत्रिका में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, जब हमारी नींद पूरी नहीं होती या उसमें बाधा आती है, तो इस बैरियर को नुकसान पहुंचता है। शंघाई जिओ टोंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बताया है कि इस बैरियर के डैमेज होने का सीधा संबंध हमारी सोचने-समझने की क्षमता में कमी से है। इसके कारण अल्जाइमर जैसी बीमारी और दिमाग की नसों को प्रभावित करने वाली कई अन्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।</p>



<p><strong>कैसे कमजोर पड़ता है यह बैरियर?<br /></strong>शोधकर्ताओं ने बताया कि जब ब्लड-ब्रेन बैरियर को नुकसान पहुंचता है, तो दो मुख्य परेशानियां होती हैं:</p>



<p>बढ़ी हुई पारगम्यता: कोशिकाओं के बीच की जगह से पानी, आयन और छोटे अणुओं की आवाजाही जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है।<br />सफाई में रुकावट: दिमाग से बेकार पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया में बाधा आती है।<br />इस नुकसान के पीछे मुख्य रूप से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, न्यूरोइन्फ्लेमेशन और आंत के माइक्रोबायोम का असंतुलन जैसे कारण शामिल पाए गए हैं।</p>



<p><strong>सोने-जागने का बिगड़ा हुआ चक्र भी है जिम्मेदार<br /></strong>हमारे शरीर की एक अपनी घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहते हैं। जब सोने और जागने के इस प्राकृतिक चक्र का तालमेल बिगड़ जाता है, तो यह भी ब्लड-ब्रेन बैरियर को तोड़ने का काम करता है। इसके अलावा, नींद से जुड़ी एक खास बीमारी- ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के कारण भी इस बैरियर को नुकसान पहुंचने के प्रमाण मिले हैं।</p>



<p><strong>याददाश्त पर सीधा असर<br /></strong>दिमाग का वह हिस्सा जो हमारी याददाश्त से जुड़ा होता है, उसे &#8216;हिप्पोकैंपस&#8217; कहते हैं। अध्ययन में यह बात सामने आई है कि अगर हिप्पोकैंपस में ब्लड-ब्रेन बैरियर टूटता है, तो यह साफ तौर पर हमारी याद रखने और सोचने-समझने की क्षमता में कमी का संकेत हो सकता है।</p>
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		<title>शरीर के अंदर छिपा ‘साइलेंट किलर’: खून की वो बीमारी जो सारी जिंदगी पकड़ में नहीं आती</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 06:36:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
		<category><![CDATA[साइलेंट किलर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1091" height="588" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/3-43.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/3-43.jpg 1091w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/3-43-768x414.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1091px) 100vw, 1091px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%b6%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%9b%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%82/">शरीर के अंदर छिपा ‘साइलेंट किलर’: खून की वो बीमारी जो सारी जिंदगी पकड़ में नहीं आती</a></p>
<p>कभी-कभी शरीर एकदम हेल्दी दिखता है, जिस वजह से ऐसा लगता है कि शरीर में कोई परेशानी नहीं। जबकि सिकल सेल ऐसी जेनेटिक बीमारी है जिसमें चाहे शरीर भले ही स्वस्थ दिखे, लेकिन अंदर ही अंदर यह बीमारी पनप रही होती है। बता दें कि यह कहानी सिकल सेल से पीड़ित बहुत से मरीजों की &#8230;</p>
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<p>कभी-कभी शरीर एकदम हेल्दी दिखता है, जिस वजह से ऐसा लगता है कि शरीर में कोई परेशानी नहीं। जबकि सिकल सेल ऐसी जेनेटिक बीमारी है जिसमें चाहे शरीर भले ही स्वस्थ दिखे, लेकिन अंदर ही अंदर यह बीमारी पनप रही होती है। बता दें कि यह कहानी सिकल सेल से पीड़ित बहुत से मरीजों की है, जिसके बारे में कुछ लोगों को तो जीवन भर पता नहीं चल पाता।</p>



<p>इस बारे में गुरुग्राम और फरीदाबाद स्थित मारेन्गो एशिया अस्पतालों में हेमेटो-ऑन्कोलॉजी और बीएमटी के क्लिनिकल डायरेक्टर और एचओडी डॉ. मीत कुमार और पीडियाट्रिक हेमेटो-ऑन्कोलॉजी और बीएमटी के कंसल्टेंट और हेड डॉ. नीरज तेवतिया बता रहे हैं कि सिकल सेल बीमारी क्या है और इसका सबसे बेहतर रोकथाम क्या हो सकता है।</p>



<p><strong>वर्ल्ड सिकल सेल डे : 19 जून<br /></strong>हर साल 19 जून को वर्ल्ड सिकल सेल डे मनाया तो जाता है लेकिन लोग इस बीमारी को लेकर ज्यादा जागरूक नहीं है। हमें यह समझने की जरूरत है कि सिकल सेल सिर्फ एक व्यक्ति की बीमारी नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार और समाज से जुड़ी बीमारी है। ऐसा इसलिए क्योंकि बहुत से लोगों के जीन में सिकल सेल मौजूद होता है, पर उन्हें पता नहीं होता।</p>



<p><strong>सिकल सेल की बड़ी समस्या क्या है?<br /></strong>सिकल सेल में एक परेशानी यह है कि माता-पिता दोनों ही इस असामान्य जीन के कैरियर होते हैं जिनसे यह सेल बच्चे में प्रवेश करता है। यह एक गंभीर ब्लड डिसऑर्डर है जिसके चलते शरीर भयंकर एनिमिया की चपेट में आ जाता है। इस बीमारी में शरीर में दर्द की शिकायत, इन्फेक्शन और ऑर्गन डैमेज तक का खतरा रहता है।</p>



<p>यही वजह है कि सिकल सेल को लेकर जागरूकता और समय पर स्क्रीनिंग की खास आवश्यकता है। जानने वाली बात यह है कि एक साधारण से ब्लड टेस्ट से असामान्य सेल की जांच की जा सकती है। कई बार तो ऐसा देखा गया है कि बहुत से परिवारों में इसके कैरियर के बारे में तब पता चलता है जब घर में कोई बच्चा इससे पीड़ित हो जाता है।</p>



<p><strong>सिकल सेल से बचाव के लिए उपाय<br /></strong>जल्दी से जल्दी स्क्रीनिंग, जेनेटिक कॉउन्सलिंग और सामाजिक शिक्षा सिकल से बचाव में बड़ी मदद कर सकती है, साथ ही इससे समय पर इलाज की व्यवस्था भी होती है। भारत कई इलाकों में बड़े स्तर पर यह बीमारी देखी जा रही है।</p>



<p><strong>सिकल सेल का समाधान<br /></strong>सिकल सेल के समाधान के लिए स्क्रीनिंग के साथ ही यह भी मायने रखता है कि हम लोगों को इस बीमारी से रोकथाम के लिए क्या बता रहे हैं। इस बारे में हेमेटो-ऑन्कोलॉजी और बीएमटी के क्लिनिकल डायरेक्टर और एचओडी डॉ. मीत कुमार का कहना है कि कई बार बीमारी का पता लगाना जरूरी नहीं है, बल्कि यह जानना जरूरी है कि शरीर में सिकल सेल के जीन मौजूद हैं जिसके बारे में पता ही नहीं।</p>
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		<title>महिलाओं और पुरुषों के शरीर में बीमारी से लड़ने की क्षमता क्यों होती है अलग?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 06:05:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
		<category><![CDATA[बीमारी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1102" height="624" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/5-31.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/5-31.jpg 1102w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/5-31-768x435.jpg 768w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/5-31-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 1102px) 100vw, 1102px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a4%b0%e0%a5%80/">महिलाओं और पुरुषों के शरीर में बीमारी से लड़ने की क्षमता क्यों होती है अलग?</a></p>
<p>क्या आपने कभी सोचा है कि जब कोई बीमारी आती है या उम्र बढ़ती है, तो पुरुषों और महिलाओं का शरीर एक ही स्थिति में अलग-अलग तरीके से क्यों प्रतिक्रिया देता है? हाल ही में हुए एक नए शोध ने इस बड़े सवाल का जवाब ढूंढ लिया है। इसका असली कारण हमारे शरीर में मौजूद &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="1102" height="624" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/5-31.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/5-31.jpg 1102w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/5-31-768x435.jpg 768w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/5-31-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 1102px) 100vw, 1102px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a4%b0%e0%a5%80/">महिलाओं और पुरुषों के शरीर में बीमारी से लड़ने की क्षमता क्यों होती है अलग?</a></p>

<p>क्या आपने कभी सोचा है कि जब कोई बीमारी आती है या उम्र बढ़ती है, तो पुरुषों और महिलाओं का शरीर एक ही स्थिति में अलग-अलग तरीके से क्यों प्रतिक्रिया देता है? हाल ही में हुए एक नए शोध ने इस बड़े सवाल का जवाब ढूंढ लिया है।</p>



<p>इसका असली कारण हमारे शरीर में मौजूद एक खास प्रोटीन है, जिसे &#8216;एसआइआरटी 7&#8217; कहा जाता है। यह प्रोटीन मुख्य रूप से हमारे जीन की सुरक्षा करता है और उसकी गतिविधियों को कंट्रोल करता है।</p>



<p><strong>वैज्ञानिक क्या कह रहे हैं?<br /></strong>अमेरिका के &#8216;मैस जनरल ब्रिघम&#8217; और स्पेन के &#8216;जोसेप कैरेरास ल्यूकेमिया इंस्टीट्यूट&#8217; के शोधकर्ताओं ने इस विषय पर गहराई से स्टडी की है। विशेषज्ञों के अनुसार, बीमारी के बढ़ने या शरीर के बूढ़े होने की प्रक्रिया में लिंग के आधार पर होने वाले बदलावों के पीछे के जैविक कारणों को अभी तक पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है। इन्हीं कारणों और अंतरों को बेहतर ढंग से समझने के लिए वैज्ञानिक अब सेक्स क्रोमोसोम की बारीकी से जांच कर रहे हैं।</p>



<p><strong>&#8216;एसआइआरटी 7&#8217; प्रोटीन का क्या काम है?<br /></strong>प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका &#8216;नेचर&#8217; में प्रकाशित इस स्टडी से एक अहम खुलासा हुआ है। &#8216;एसआइआरटी 7&#8217; एक ऐसा प्रोटीन है जो तनाव और उम्र बढ़ने पर हमारे शरीर की कोशिकाओं के रिएक्शन को संभालता है। शोध में पता चला है कि यह प्रोटीन हमारे एक्स क्रोमोसोम के स्वास्थ्य को बनाए रखने में एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।</p>



<p><strong>एक्स क्रोमोसोम का पूरा गणित<br /></strong>किसी भी इंसान का जैविक लिंग तय करने वाले दो सेक्स क्रोमोसोम होते हैं, जिनमें से एक एक्स क्रोमोसोम है।</p>



<p>महिलाओं में: आमतौर पर दो एक्स क्रोमोसोम (XX) पाए जाते हैं।<br />पुरुषों में: एक एक्स और एक वाई क्रोमोसोम (XY) होता है।</p>



<p>इस शोध में सामने आया है कि महिलाओं की कोशिकाओं में जीन की एक्टिविटी को संतुलित रखने के लिए शरीर आमतौर पर एक एक्स क्रोमोसोम को इनएक्टिव कर देता है। यही क्रोमोसोम और &#8216;एसआइआरटी 7&#8217; प्रोटीन का तालमेल महिलाओं और पुरुषों की स्वास्थ्य प्रतिक्रियाओं में बड़ा अंतर पैदा करता है।</p>
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