जानिए क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का पर्व और क्या है इसके पीछे की मान्यता

सामाजिक समरसता और सद्भाव का पर्व लोहड़ी इस बार घर, परिवार और मोहल्ले में सादगी से मनाया जाएगा। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए विभिन्न आयोजक समितियों ने होटल व पंडालों में होने वाले भव्य आयोजन रद किए हैं। वहीं, मिठास से भरे इस पर्व को मनाने के लिए व्यक्तियों ने बाजार में खरीदारी शुरू कर दी है।

उत्तर भारत का प्रमुख पर्व लोहड़ी हिंदू पंचांग के अनुसार पौष माह की आखिरी रात को मनाया जाता है। इस बार यह पर्व गुरुवार को मनाया जाएगा। दून में भी यह पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पर्व वाले दिन घरों में और घरों के बाहर रात को सामूहिक रूप से आग जलाकर लोग नृत्य करते हैं। बीते कुछ महीने से कोरोना की स्थिति सामान्य होने के चलते विभिन्न आयोजक समितियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम, भांगड़ा और विभिन्न प्रतियोगिता के लिए भव्य आयोजन की तैयारी की थी। यहां तक कि इसके लिए स्थल का चयन और कई होटल बुक किए गए थे, लेकिन नए साल के शुरुआत से ही कोरोना की रफ्तार ने आयोजन फीके कर दिए।

उत्तरांचल पंजाबी महासभा के प्रदेश महामंत्री हरीश नारंग का कहना है कि जिस गति से कोरोना फैल रहा है, उससे बचना सबसे जरूरी है। ऐसे में इस बार होने वाले कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं। श्याम सुंदर मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी भूपेंद्र चड्ढा ने बताया कि पटेलनगर स्थित मनभावन पैलेस में हर वर्ष सांस्कृतिक आयोजन के बीच लोहड़ी जलाई जाती थी। इस बार समिति के सदस्यों से अपील की है कि घर परिवार के बीच ही इस पर्व को मनाएं, जरूरी होने पर ही दूसरों से मिलें। साडा विरसा साडी शान करीर सोसायटी की अध्यक्ष डा. अमरजीत कौर करीर ने कहा कि इस बार सोसायटी की सभी महिलाएं घर पर ही इस आयोजन को मनाएंगी।

बाजार में खरीदारी को उमड़ रही भीड़

लोहड़ी पर्व को घर पर मनाने के लिए बाजार में खरीदारी में कोई कमी नहीं है। गुरुवार को पर्व के दिन बाजार में ज्यादा भीड़ न रहे, इसके लिए अधिकांश लोग बाजार में खरीदारी को उमड़ रहे हैं। मंगलवार देर शाम तक हनुमान चौक, पलटन बाजार, करनपुर बाजार, प्रेमनगर बाजार, पटेलनगर में लोग ने पापकार्न, मूंगफली, रेवड़ी, तिलबुग्गा, लड्डू की खूब खरीदारी की।

एक सप्ताह पूर्व से बांटते हैं लोहड़ी

जिन घरों में नई-नई शादियां हुई है अथवा जिनके घरों में बच्चों की किलकारियां गूंजी है, उन घरों में यह त्योहार विशेष रूप से मनाया जाता है। उनमें अपने रिश्तेदारों में लोहड़ी का त्योहार बांटने की परंपरा है। यही कारण है कि ऐसे परिवार एक सप्ताह पूर्व से ही खरीदारी कर लोहड़ी बांटने का सिलसिला शुरू कर देते हैं।

क्यों मनाते हैं लोहड़ी का पर्व

मान्यता है कि लोहड़ी का पर्व फसल की कटाई और नवीन अन्न तैयार होने की खुशी में मनाया जाता है। इस दिन शाम को आग जलाकर लोग आग के चारों ओर इकट्ठे हो जाते हैं और फिर इसके चारों ओर घूमते हैं। इस दौरान आग में रेवड़ी, मूंगफली, खील, चिक्की, गुड़ से निर्मित चीजें डालते हैं। इसके बाद यहीं बैठकर गज्जक और रेवड़ियां खाते हए गीत गाए जाते हैं। कुछ लोग नृत्य भी करते हैं।

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