पीएम आवास तक केजरीवाल की मार्च की तैयारी, कर सकते हैं कुछ ऐसा

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दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल के घर पर धरने पर बैठे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल रविवार को दिल्ली के लोगों के साथ प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकालेंगे. उन्होंने कहा है कि वो पीएम मोदी के सामने अपनी मांगें रखेंगे.पीएम आवास तक केजरीवाल की मार्च की तैयारी, कर सकते हैं कुछ ऐसा

अरविंद केजरीवाल का उपराज्यपाल के घर पर पिछले छह दिनों से धरना जारी है. केजरीवाल के साथ उनके तीन मंत्री भी धरने पर बैठे हैं. केजरीवाल आईएएस अफ़सरों की हड़ताल ख़त्म करने को लेकर धरना दे रहे हैं. उन्होंने उपराज्पाल से हड़ताल ख़त्म कराने की मांग की है. अभी तक एक भी मांग पूरी न होने की वजह से उन्होंने कहा है कि वो दिल्ली की जनता के साथ 17 जून को प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकालेंगे.

केजरीवाल ने 15 जून को एक वीडियो जारी किया था जिसमें उन्होंने पूरी स्थिति पर अपना पक्षा रखा था. इस वीडियो में उन्होंने अपनी मांगें दोहराई हैं और मांगें न पूरी होने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है. अरविंद केजरीवाल के साथ उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल राय और स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन भी 11 जून से धरने पर बैठे हैं.

चार मुख्यमंत्रियों का समर्थन

वहीं, अरविंद केजरीवाल को चार अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों का भी समर्थन मिला है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी, केरल के सीएम पिनराई विजयन और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू शनिवार को दिल्ली पहुंचे. उन्होंने पहले आंध्र भवन में एक बैठक की और उसके बाद उपराज्यपाल से मिलने के लिए समय मांगा. लेकिन, उन्हें समय नहीं मिल पाया. उन्हें मुख्यमंत्री केजरीवाल से भी मिलने की अनुमति नहीं मिली.

इसके बाद चारों मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर पहुंचे और उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल से मुलाकात की. फिर उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर अरविंद केजरीवाल को अपने समर्थन का एलान किया और दिल्ली के हालात पर चिंता जताई. प्रेस कांफ्रेंस में ममता बनर्जी ने कहा, ”​दिल्ली में पिछले चार महीनों से काम रुका हुआ है. इससे ज़्यादा दुर्भाग्यपूर्ण कुछ नहीं हो सकता. एलजी एक नियुक्त किए गए लीडर हैं. अगर उनसे नहीं तो फिर किससे मिलने और बातचीत के लिए समय मांगा जाएगा. यह एक संवैधानिक संकट है, लेकिन इसके कारण आम आदमी परेशान नहीं होना चाहिए.”

पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने भी ट्वीट करके केजरीवाल के धरने का समर्थन किया है. रविवार को चारों मुख्यमंत्री नीति आयोग में एक बैठक में शामिल होंगे. इस घटना को विपक्षी एकता के नज़रिए से भी देखा जा रहा है. अरविंद केजरीवाल कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल हुए थे.

क्या है पूरा मामला?

इस मामले की शुरुआत इस साल फ़रवरी में हुई थी. 19 फ़रवरी की देर रात को दिल्ली के मुख्यमंत्री निवास पर एक बैठक बुलाई गई थी. दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश का आरोप था कि इस बैठक में उनके साथ बदसलूकी की गई. अब दिल्ली सरकार का आरोप है कि अफ़सर काम नहीं कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मुताबिक आईएएस अफ़सर हड़ताल पर हैं जिसके चलते दिल्ली सरकार की कई योजनाएं रुकी हुई हैं. उन्होंने उपराज्यपाल अनिल बैजल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि वो अधिकारियों की हड़ताल ख़त्म कराएं और उन्हें काम पर लौटने के आदेश दें. उन्होंने इस संबंध में पीएम मोदी को दो चिट्ठियां भी लिखी हैं जिनमें वो काम गिनाए गए हैं जिन पर हड़ताल का असर पड़ा है.

इसके साथ ही अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग भी रखी है. उनकी ये भी शिकायत है कि दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘डोर स्टेप डिलीवरी’ को भी अधिकारियों ने रोक रखा है. हालांकि, आईएएस अफ़सर एसोसिएशन इन आरोपों से इनकार करती है. एसोसिएशन का कहना है कि ‘अधिकारी अंशु प्रकाश के साथ हुई घटना से हम आहत हैं. एसोसिएशन के सदस्य हर दिन लंच ब्रेक में मौन रखकर अपना विरोध जताते आ रहे हैं. लेकिन ऐसा नहीं है कि हम काम नहीं कर रहे हैं.’

अधिकारियों की सरकार से दो मांगें हैं. पहली कि 19 फ़रवरी की घटना के लिए मुख्यमंत्री माफ़ी मांगें. दूसरी ये कि सरकार अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो. वहीं, अरविंद केजरीवाल ने 11 जून को उपराज्यपाल से हुई मुलाक़ात में अपनी मांगें रखी थीं. इसके बाद उपराज्यपाल की तरफ़ से मुख्यमंत्री को सूचित किया गया था कि ‘अफ़सरों की ऐसी कोई हड़ताल नहीं चल रही है. अफ़सरों में एक डर और अविश्वास का माहौल है. उसे ख़त्म करने के प्रयास किए जाएं.’ अब देखना ये है कि दिल्ली सरकार और अधिकारियों की इस तनातनी से प्रभावित हो रहे आम आदमी को राहत कब तक मिल पाती है.

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