केजरीवाल सरकार कराएगी दिल्ली के बुजुर्गों को मुफ्त तीर्थयात्रा, हुआ ये फरमान जारी

दिल्ली में रहने वाले बुजुर्गों को दिल्ली सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है. अरविंद केजरीवाल सरकार ने उपराज्यपाल अनिल बैजल की सभी आपत्तियों को दरकिनार कर तीर्थयात्रा योजना को मंजूरी दे दी है. इसके तहत 70 साल से ज्यादा उम्र वाले बुजुर्गों को मुफ्त में तीर्थयात्रा कराई जाएगी.केजरीवाल सरकार कराएगी दिल्ली के बुजुर्गों को मुफ्त तीर्थयात्रा, हुआ ये फरमान जारी

हर साल 77 हजार बुजुर्गों को मिलेगा लाभ

दिल्ली सरकार की इस योजना के तहत तीर्थयात्रा पर बुजुर्गों के साथ परिवार का एक सदस्य भी जा सकेगा. इस योजना के पहले चरण में हर विधानसभा क्षेत्र से 11 हजार वरिष्ठ नागरिकों को तीर्थयात्रा कराई जाएगी, यानी करीब 77 हजार श्रद्धालुओं को इसका लाभ मिलेगा.

पांच तीर्थस्थलों का होगा रूट

इस तीर्थयात्रा योजना के तहत दिल्ली सरकार ने जो रूट चुने हैं, उसमें लोगों को दिल्ली से मथुरा, फिर वृंदावन, आगरा और फतेहपुर सीकरी होते हुए वापस दिल्ली लाया जाएगा. वहीं दूसरे रूट पर दिल्लीवासियों को हरिद्वार, ऋषिकेश और नीलकंठ की यात्रा कराई जाएगी, जबकि तीसरा रूट दिल्ली से अजमेर, पुष्कर, अमृतसर और फिर बाघा बॉर्डर व आनंदपुर साहिब का है. इसके अलावा दिल्ली के लोगों को जम्मू-कश्मीर व वैष्णो देवी की भी यात्रा कराई जाएगी.

पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर मिलेगा मौका

दिल्ली सरकार की इस तीर्थयात्रा योजना के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी. इसके लिए वृद्धि नागरिकों को एक माह के अंदर अपने क्षेत्र के विधायक, राजस्व विभाग के उपायुक्त और तीर्थ कमेटी के अध्यक्ष कार्यालय में आवेदन कर सकेंगे. पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर मौका दिया जाएगा और सरकार की मंजूरी के लिए राजस्व विभाग को आवेदन भेजा जाएगा.

केजरीवाल सरकार और LG के बीच विवाद के कारण रुकी हुई थी योजना

तीर्थयात्रा योजना दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच विवाद के चलते फंसी हुई थी. आपको बता दें कि दिल्ली सरकार ने योजना को मंजूरी के लिए एलजी के पास भेजा था, जिन्होंने इसे केवल बीपीएल कैटेगरी के लोगों तक ही सीमित रखने की सलाह दी थी, लेकिन दिल्ली सरकार हर वर्ग को यह लाभ देना चाहती थी. हालांकि अब इस योजना पर विवाद खत्म हो गया है.

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के अनुसार, योजना पर इस बात को लेकर विवाद था कि इसे लागू कौन करेगा. लेकिन दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों के बंटवारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब कोई विवाद नहीं रह गया, इसलिए सरकार ने अब इस योजना को मंजूरी दे दी है.

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