PWD scam का हुआ बड़ा खुलासा प्रभाव का इस्तेमाल कर केजरीवाल ने दिलाया था करीबी को ठेका

नई दिल्ली। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में हुए घोटाले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी बुरी तरह घिरते नजर आ रहे हैं। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने एक दिन पहले बृहस्पतिवार सुबह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साढ़ू सुरेंद्र कुमार बंसल के बेटे विनय कुमार बंसल को पीतमपुरा स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया था। PWD scam का हुआ बड़ा खुलासा प्रभाव का इस्तेमाल कर केजरीवाल ने दिलाया था करीबी को ठेका

सीएम तक पहुंच सकती है जांच की आंच

वहीं, एसीबी के मुताबिक जांच में पता चला कि मुख्यमंत्री केजरीवाल ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर 2015 में पीडब्ल्यूडी द्वारा दिल्ली के बवाना इलाके में शनि मंदिर से बकौली गांव तक नाले के निर्माण का टेंडर अपने साढ़ू सुरेंद्र कुमार बंसल की रेनू कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिलवाई थी। ऐसे में पीडब्ल्यूडी घोटाले में जांच की आंच अरविंद केजरीवाल तक पहुंच सकती है।

कपिल मिश्रा लगा चुके हैं गंभीर आरोप

एसीबी चीफ के मुताबिक, पीडब्ल्यूडी के संबंधित अफसरों समेत सुरेंद्र व विनय कुमार बंसल से कई बार पूछताछ की गई थी। पिछले साल दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने जिस दिन मंत्री सत्येंद्र जैन व सुरेंद्र बंसल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, उसी दिन दिल का दौरा पड़ने से सुरेंद्र बंसल की मौत हो गई थी, जिससे एसीबी ने कार्रवाई रोक दी थी।

यह है पूरा मामला

बाहरी दिल्ली व अन्य इलाके में सड़कों व नालों के निर्माण में करोड़ों के घोटाले के आरोप में एसीबी ने गत वर्ष मई में तीन एफआइआर दर्ज की थी। एक एफआइआर में सुरेंद्र कुमार बंसल व उनके बेटे विनय कुमार बंसल भी आरोपित बनाए गए थे।

फर्जी बिलों से करोड़ों का भुगतान लेने का आरोप

रोड एंटी करप्शन आर्गनाइजेशन के संस्थापक राहुल शर्मा ने सूचना का अधिकार के तहत जानकारी जुटाने के बाद आइपी एस्टेट थाने में शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि बंसल ने मुख्यमंत्री केजरीवाल की मदद से पीडब्ल्यूडी का 10 करोड़ का ठेका लिया था। इन पर फर्जी बिलों के जरिये सरकार से करोड़ों का भुगतान लेने का आरोप है।

बिना जांच किया गया था भुगतान

मुख्यमंत्री के साढ़ू से जुड़ा मामला होने से उनकी कंपनी ने जितने भी फर्जी बिल दिए, पीडब्ल्यूडी अफसरों ने बिना जांच किए भुगतान कर दिया था। आइपी एस्टेट थाना पुलिस ने मामले को आर्थिक अपराध शाखा के पास भेज दिया था। वहां केस दर्ज नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने तीस हजारी कोर्ट की शरण ली थी। कोर्ट के आदेश पर एसीबी में नौ मई 2017 को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, धोखाधड़ी व फर्जीवाड़ा की धाराओं में केस दर्ज किया गया था 

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