जोकीहाट उपचुनाव में जनाधार गिरा पर RJD के हौसले को परवाज देगी जीत

पटना। जोकीहाट में आकर्षण-विकर्षण, श्रद्धा-समर्पण, लगाव-झुकाव और घात-प्रतिघात के कयासों के बावजूद राजद प्रत्याशी शाहनवाज आलम ने 41254 मतों से जदयू प्रत्याशी मुर्शीद आलम को हराया। उपचुनाव का परिणाम प्रत्यक्ष तौर पर राजद के पक्ष में आया है, किंतु इसका परोक्ष मतलब दोनों ही प्रतिद्वंद्वियों को सतर्क करने वाला है।जोकीहाट उपचुनाव में जनाधार गिरा पर RJD के हौसले को परवाज देगी जीत

अररिया संसदीय उपचुनाव में 81 हजार से अधिक मतों से प्रतिद्वंद्वी पर बढ़त बनाने वाले राजद का दबदबा ढाई महीने में ही आधा क्यों रह गया और लगातार चार बार से जीत रहे जदयू का सिलसिला क्यों टूट गया? आत्ममंथन का दौर अब शुरू होगा, लेकिन एक बात साफ है कि सीमांचल में तस्लीमुद्दीन का तिलस्म बरकरार है, जो राजद के हौसले को परवाज देगा। 

राजद सांसद तस्लीमुद्दीन के निधन के बाद अररिया संसदीय उपचुनाव में राजद ने उनके बड़े पुत्र सरफराज को अपनाया था, जो जोकीहाट से जदयू के विधायक थे। उनके इस्तीफे से खाली हुई सीट पर राजद ने तस्लीमुद्दीन के परिवार पर भरोसा बरकरार रखा और सरफराज के छोटे भाई शाहनवाज आलम पर दांव लगाया।

संसदीय उपचुनाव में सरफराज को जोकीहाट में कुल 81 हजार 348 मतों से बढ़त मिली थी। माना जा रहा था कि शाहनवाज भी इस बड़े फासले को बरकरार रखेंगे, किंतु जीत का अंतर 41 हजार पर सिमट गया, जो राजद को सावधान करने वाला है। 

आसान नहीं राजद की राह

राजद के प्रतिबद्ध मतदाताओं एवं 70 फीसद मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्र में महज ढाई महीने में जीत के फासले में कमी यह सत्यापित करती है कि लालू प्रसाद की अनुपस्थिति में माय समीकरण पूरी तरह अटूट नहीं रह गया है। जदयू के प्रयासों ने इसमें सेंध लगाई है। भाजपा के साथ सरकार चलाते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिस तरह अपनी छवि को धर्मनिरपेक्ष बना रखा है, उससे राजद की राह में अवरोध आना तय है।

रामनवमी के मौके पर पटना के गांधी मैदान से असामाजिक तत्वों को चेतावनी और बाद में भागलपुर, दरभंगा एवं औरंगाबाद में उत्पात पर भाजपा की परवाह किए बिना राज्य सरकार के सख्त संदेश से नीतीश ने मुस्लिम बिरादरी में भरोसा पैदा किया है।

ऐसे में जदयू की मंशा पर राजद को नजर रखकर अपने वोट बैंक के दायरे को बढ़ाने की जरूरत है। तेजस्वी को यह भी समझना पड़ेगा कि मुस्लिम-यादव (माय) के अलावा भी मतदाताओं की सूची लंबी है। 

तस्लीमुद्दीन का तिलिस्म 

जोकीहाट में जदयू ने प्रत्याशी बदलकर तस्लीमुद्दीन परिवार के प्रभाव को कम करने की कोशिश की थी, जो पूरी तरह कामयाब नहीं हो सकी। इसका दूसरा पक्ष है कि तस्लीमुद्दीन परिवार ने पार्टी बदलकर भी राजनीतिक प्रभाव को बरकरार रखा। संसदीय उपचुनाव के बाद विधानसभा में भी राजद के लिए जीत का दरवाजा खोला।

 1969 में जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र के गठन के बाद से अबतक हुए कुल 15 चुनावों में तस्लीमुद्दीन परिवार की यह 10वीं जीत है। पांच बार पिता और पांच बार दोनों पुत्रों की संयुक्त ताकत के सामने प्रतिद्वंद्वियों का प्रयास बेबस नजर आया। 

लालू फैक्टर से इनकार नहीं 

जोकीहाट ने यह भी सिद्ध किया कि तमाम आरोपों के बावजूद लालू प्रसाद की सियासी ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि लालू की अनुपस्थिति में तेजस्वी ने भी जमकर मुकाबला किया, लेकिन नीतीश कुमार की छवि के आगे कामयाबी के दायरे का विस्तार नहीं हो सका। युवाओं, बेरोजगारों एवं अल्पसंख्यकों के लिए नीतीश सरकार की तमाम योजनाओं ने लालू एवं तस्लीमुद्दीन फैक्टर को काफी हद तक नियंत्रण में रखा। 

जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र

लोकसभा चुनाव 2014 : 

राजद : 92575

भाजपा : 29436

जदयू : 16836

विधानसभा चुनाव 2015: 

जदयू : 92890

निर्दलीय : 38910

हम : 4206

जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र

लोकसभा उपचुनाव 2018: 

राजद : 1,20,765

भाजपा : 39,417

अंतर : 81,348

विधानसभा उपचुनाव 2018: 

राजद : 81,240 

जदयू :  40,016

अंतर : 41,254

नोट : दोनों चुनावों के बीच गिरा राजद का जनाधार 

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