विश्व बाजार में पड़ोसी देश चीन का आधिपत्य तोड़ेगा भारत: केंद्रीय मंत्री

रेवाड़ी। इस्पात उत्पादन में जापान और अमेरिका जैसे देशों को पीछे छोड़ने के बाद अब भारत का लक्ष्य चीन का आधिपत्य तोड़ना है। फिलहाल चीन हमसे बहुत आगे हैं, लेकिन हमने जो कार्ययोजना बनाई है उससे आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर भारत की भी धाक कायम होगी। हम न केवल इस्पात क्षेत्र की बीमार इकाइयों को पुनर्जिवित कर रहे हैं, बल्कि स्टील अथारिटी आफ इंडिया (सेल) जैसे सार्वजनिक उपक्रमों को भी घाटे से उबारकर रहे हैं।विश्व बाजार में पड़ोसी देश चीन का आधिपत्य तोड़ेगा भारत: केंद्रीय मंत्री

बीते वित्त वर्ष में हमने सेल का घाटा 10 हजार करोड़ से घटाकर 4200 करोड़ पर ला दिया है। वर्ष 2018-19 तक हम सरकारी क्षेत्र के प्रमुख उपक्रमों को न केवल घाटे से मुक्त कर देंगे बल्कि एनपीए का कलंक भी मिटा देंगे। केंद्रीय इस्पात मंत्री चौ. बीरेंद्र सिंह ने जागरण से बातचीत में यह जानकारी दी।

बीरेंद्र सिंह जाट धर्मशाला के भूमि पूजन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने आए थे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नीतियों की बदौलत हमारी उम्मीदें बुलंद हैं। हमने वर्ष 2030 तक 300 मीलियन टन स्टील उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। हमारा इरादा वर्ष 2030 तक स्टील की मौजूदा खपत को 68 किग्रा प्रति व्यक्ति से बढ़ाकर 160 किग्रा करना है। फिलहाल रेलवे हमारा सबसे बड़ा खरीदार है। हमारे भिलाई कारखाने में 240 मीटर लंबी रेल का निर्माण हो रहा है। इस वर्ष हम रेलवे को 14 लाख टन रेल (पटरियां) देंगे।

घरेलू बाजार में स्टील की मांग बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार उच्च स्तरीय प्रयास कर रही है। हमने सीमेंट-कंक्रीट की बजाय स्टील से ओवरब्रिज व सार्वजनिक भवनों का निर्माण करने का प्रस्ताव रखा है। इससे स्टील की मांग बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि एनपीए से बैंकों की कमर तोड़ने वाली सर्वाधिक इकाइयां स्टील क्षेत्र में ही थी, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। बैंकों को पैसा वापिस मिलने लगा है। इससे बैंक भी ऋण देने में आगे आ रहे हैं। 

एफडीआइ से जुटाएंगे पैसा

चौ. बीरेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2030 तक का लक्ष्य हासिल करने के लिए कुल 10 लाख करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी। हम लगभग 4 लाख करोड़ रुपये एफडीआइ से जुटाएंगे। हमारी वर्तमान क्षमता 132 मीलियन टन प्रतिवर्ष क्षमता है, जबकि हमें आगामी 12 वर्षों में इसे बढ़ाकर 300 मीलियन टन तक ले जाना है। जब हमने सत्ता संभाली थी तब भारत में पर केपिटा स्टील की खपत 58 किग्रा थी, जबकि अब 68 किग्रा है। विश्व में यह खपत 200 किग्रा पर केपिटा है। जाहिर है संभावनाओं के द्वार खुले हुए हैं। 

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