राजस्थान में भाजपा के लिए आसान नहीं टिकट बांटना

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जयपुर : बीजेपी के लिए राजस्थान में इस बार टिकटों का बंटवारा बहुत आसान नहीं रहने वाला है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजेऔर आलाकमान के बीच अध्यक्ष पद को लेकर मची खींचतान से हालात बिगड़े हुए हैं। राजस्थान में पिछले डेढ़ माह से कोई अध्यक्ष नहीं है, जबकि वहां पर पांच महीने बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इस खींचतान का सीधा असर टिकट बंटवारे पर पड़ेगा। राजस्थान में भाजपा के लिए आसान नहीं टिकट बांटना

राजे बांटेंगी टिकट? 
यह लगभग तय हो चुका है कि वसुंधरा राजे ही सीएम पद की उम्मीदवार रहेंगी। महासचिव भूपेंद्र यादव पिछली बार की तरह ही अहम भूमिका निभाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही केंद्र में रखकर पार्टी अपना अभियान चलाएगी। लेकिन दो सवाल ऐसे हैं जिनके जवाब नहीं मिल रहे हैं। एक तो यह कि राज्य अध्यक्ष कौन होगा? दूसरा मुख्यमंत्री राजे के पास टिकट बांटने का कितना अधिकार होगा या नहीं? 

बीच का रास्ता क्या है? 
राज्य में वसुंधरा राजे अपने हिसाब से सक्रिय हो गई हैं। पार्टी की बैठकों में वह इस्तीफा दे चुके अशोक परनामी को ही अध्यक्ष के रूप में पेश कर रही हैं। कुछ विधायकों को उन्होंने टिकट काटे जाने के संकेत भी दे दिए हैं। अब अगर गजेंद्र सिंह शेखावत को राजस्थान का अध्यक्ष बनाया जाता है तो टकराव बढ़ना तय है। शेखावत के अध्यक्ष न बनने पर आलाकमान को लेकर सवाल उठेंगे। 

हालांकि इस बीच राजस्थान बीजेपी के वरिष्ठ नेता ओम माथुर राज्य के कुछ नेताओं के साथ बैठक कर बीच का रास्ता तलाशने में जुटे हुए हैं। लेकिन राह आसान नहीं लग रही। स्थिति यह है कि सीएम और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बीच भी कर्नाटक चुनाव से पहले ही एक दौर की बैठक हुई थी। उसके बाद अभी तक बैठक टल रही है। 

मोदी-शाह की सीधी दखल से राजे असहज 
आलाकमान की रणनीति है कि टिकट बंटवारे में मुख्यमंत्री की भूमिका को सीमित कर दिया जाए। पिछली बार इसमें वसुंधरा राजे की ही चली थी क्योंकि उस समय उनके मामले में कोई बोलने वाला नहीं था लेकिन अब हालात बदले हुए हैं। अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी टिकट बंटवारे से लेकर हर मामले में सीधी दखल रखते है। ऐसे में राजे का असहज होना स्वाभाविक है। 

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