अमीर बनने के चक्कर में जीजा-साले ने पकड़ी गलत राह, अपहरण के बाद कर दी हत्या

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द्वारका के बाबा हरिदास नगर थाना पुलिस ने दो अपहरणकर्ताओं को बिहार के मुजफ्फरपुर से गिरफ्तार किया है। इन पर एक युवक को अगवा कर हत्या करने के बाद उसके परिवार वालों से 50 लाख रुपये की फिरौती मांगने का आरोप है।अमीर बनने के चक्कर में जीजा-साले ने पकड़ी गलत राह, अपहरण के बाद कर दी हत्या

पाटर्नरशिप में कारोबार करने का झांसा देकर घर बुलाया
दोनों आरोपी जीजा साले हैं। पुलिस ने उनके निशानदेही पर दिल्ली से युवक के शव के टुकड़ों को सेफ्टी टैंक से बरामद कर लिया है। आरोपियों ने युवक को पाटर्नरशिप में कारोबार करने का झांसा देकर अपने घर बुलाया और उसकी हत्या कर दी थी। उसके बाद से परिवार वालों से फिरौती मांग रहे थे। दस लाख में सौदा तय हो गया था। आरोपियों ने खुलासा किया है कि जल्द अमीर बनने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया। 

फिरौती के लिए 50 लाख रुपये की मांग 
जिला पुलिस उपायुक्त शिबेश सिंह ने बताया कि 13 मई को नांगलोई के अग्रसेन पार्क निवासी रामनाथ यादव ने अपने 22 साल के बेटे सचिन की गुमशुदगी की शिकायत बाबा हरिदास नगर थाने में दर्ज करवाई। शिकायत में उसने बताया कि सचिन छावला स्थित बालाजी कारपेट नाम की दुकान में काम करता था। 12 मई को वह दुकान गया, लेकिन उसके बाद वापस नहीं आया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने दुकानदार ललित मिश्रा से पूछताछ की। ललित ने बताया कि 12 मई को सचिन दुकान नहीं आया था। जब उसने उससे फोन पर बात की तो सचिन ने बताया कि कुछ देर बाद वह दुकान पर पहुंच रहा है। उसके बाद से उसका फोन बंद हो गया। 15 मई को परिवार वालों ने सचिन के नंबर पर फोन लगाया, तब किसी अनजान व्यक्ति ने फोन उठाया और उसने बताया कि सचिन उसके कब्जे में है। कुछ समय के बाद अपहरणकर्ताओं ने परिवार को फोन किया और फिरौती के लिए 50 लाख रुपये की मांग की और पुलिस को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। परिवार वालों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर लिया। 

पत्नी से पूछताछ
थाना प्रभारी अशोक कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम गठित की और जांच शुरू की। पुलिस ने सचिन के परिवार वालों खासकर उसकी पत्नी से पूछताछ की। जांच में पता चला कि उनके बीच कोई विवाद नहीं था। उनका डेढ़ साल का एक बेटा है। 

पत्नी से मिला पुलिस को आरोपियों का सुराग 
पूछताछ में सचिन की पत्नी ने पुलिस को बताया कि 10 मई की रात सचिन के मोबाइल पर एक फोन आया था। उसके बाद सचिन ने अपनी पत्नी को बताया था कि वह वरुण के साथ पाटर्नरशिप में कारोबार करने वाला है। 13 मई की सुबह वह वरुण के पास जाने की बात कही थी। लेकिन परिवार वालों को वरुण के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उसके बाद पुलिस ने सचिन के मालिक से पूछताछ की, जहां से पता चला कि वरुण कारपेट का फर्श डालने का काम करता है। उसके पास से पुलिस को वरुण का नंबर मिला। वरुण का फोन बंद था। वरुण के साथ काम करने वाले कई लोगों से पूछताछ में पता चला कि वरुण छावला के प्रेम नगर कॉलोनी में रहता था। जहां पहुंचकर पुलिस को पता चला कि वरुण अपने मकान को खाली कर जा चुका है। पुलिस ने सचिन के फोन के लोकेशन की जांच की तो पता चला कि अंतिम बार सोनीपत के राय गांव से फिरौती की रकम मांगी गई थी, जहां जाने पर पुलिस को मकान खाली मिला। 

दस लाख में सौदा तय हुआ 
17 मई को अपहरकर्ताओं ने सचिन के पिता से संपर्क कर फिरौती की रकम देने के लिए कहा। बातचीत के बाद सौदा दस लाख में तय हुआ। अपहरणकर्ताओं ने रकम लेकर आजादपुर आने के लिए कहा। पुलिस की टीम के साथ परिवार वाले वहां पहुंचे, लेकिन वहां अपहरणकर्ता नहीं आए। पुलिस को वरुण पर शक गहरा गया था, इसलिए पुलिस ने एक टीम बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित वरुण के घर पर भेज दी। वरुण वहां नहीं पहुंचा था। पुलिस की टीम ने छानबीन कर उसके ससुराल में दबिश देकर 26 वर्षीय वरुण को गिरफ्तार कर लिया। 

जल्द अमीर बनने के लिए जीजा के साथ रची साजिश
पूछताछ में वरुण का असली नाम भूषण कुमार सिंह के तौर पर हुई। वरुण ने बताया कि जल्द अमीर बनने के लिए उसने अपने जीजा ऋतुराज सिंह उर्फ विक्की (24 वर्ष) के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया। उसने बताया कि दोनों ने उसे पाटर्नरशिप में कारोबार करने का झांसा देकर घर बुलाया और गला घोंटकर हत्या कर दी। उसके बाद शव के टुकड़े करने के बाद उसे निर्माणाधीन मकान के सेफ्टी टैंक में डाल दिया। पुलिस ने उनके निशानदेही पर शव को बरामद कर लिया।

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