कर्नाटक मामले पर थोड़ी देर में SC में सुनवाई, चिदंबरम, शांतिभूषण भी पहुंचे कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की पीठ उस याचिका पर आज फिर से सुनवाई शुरू करेगी, जिसमें कांग्रेस और जेडी-एस ने राज्यपाल वजुभाई वाला द्वारा येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता दिए जाने को चुनौती दी है.

10.34 AM: वरिष्ठ वकील शांति भूषण और राम जेठमलानी भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे.

10.30 AM: कांग्रेस नेता और वकील पी. चिदंबरम सुप्रीम कोर्ट पहुंचे.

10:28 AM: बीजेपी के वकील मुकुल रोहतगी और अटॉर्नी जनरल केसी वेणुगोपाल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, दोनों लोग कोर्ट रूम में मौजूद

10:20 AM: सुब्रह्मणयम स्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण को नहीं पलटा जा सकता, बहस का केवल एक ही मुद्दा है और वो है कि मुख्यमंत्री ने 7 दिनों का समय मांगा था, लेकिन राज्यपाल ने 15 दिन दे दिए और इस मामले पर कोर्ट में बहस हो सकती है. 

10:11 AM: वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि हम कोर्ट को येदियुरप्पा की ओर से राज्यपाल को भेजे गए पत्र दिखाएंगे, जहां तक समर्थन की बात है तो ये सदन में साबित किया जाएगा और विधायकों की संख्या को गिनाएंगे. विधायकों की खरीद फरोख्त का कोई मामला नहीं है.

कर्नाटक के राज्यपाल ने येदियुरप्पा को दिया था न्यौता

बता दें कि कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला ने पहले बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता दिया था, जिसके बाद इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई. शीर्ष कोर्ट आज इसी याचिका पर फिर सुनवाई शुरू करेगी.

इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार तड़के बी.एस. येदियुरप्पा के कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर रोक नहीं लगाई. शीर्ष अदालत ने आधी रात को घंटों चली सुनवाई में कांग्रेस और जनता दल-सेक्युलर (जेडी-एस) की येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक लगाने की संयुक्त याचिका के मद्देनजर शपथ ग्रहण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और कहा कि राज्यपाल ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल किया है.

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इस मामले की कार्यवाही की अध्यक्षता ए.के.सीकरी, एस.ए. बोबडे और अशोक भूषण ने की. येदियुरप्पा ने तय योजना के अनुरूप गुरुवार सुबह नौ बजे शपथ ली, लेकिन शपथ ग्रहण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई शुक्रवार को सुबह 10.30 बजे होगी.

सुप्रीम कोर्ट में पेश होंगे राज्यपाल को भेजे गए येदियुरप्पा के पत्र

येदियुरप्पा को 15 और 16 मई को राज्यपाल वजुभाई वाला को लिखे वे दोनों पत्र पेश करने होंगे, जिनमें उन्होंने सरकार बनाने का दावा किया है. येदियुरप्पा ने पत्रों में सदन में बहुमत होने का दावा किया है, लेकिन सवाल है कैसे? इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है.

कर्नाटक में 222 सीटों पर चुनाव हुए थे, जिसमें से भाजपा को 104, कांग्रेस को 78 और जेडी-एस को 38 सीटें मिली थीं. दो निर्दलीय विधायकों में से एक ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की थी, लेकिन उसे गुरुवार को विधानसभा के सामने गांधी की प्रतिमा के सामने कांग्रेस और जेडी-एस के धरने में शामिल देखा गया.

धरने में पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा भी शामिल हुए. इस तरह कर्नाटक के नाटक का पटाक्षेप जल्द होने के आसार नहीं हैं.

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