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सुबह सुबह उठते ही लें यह 7 नाम, पायें अपार धन लाभ

कई व्यक्तियों की शिकायत होती है की वह दिन रात मेहनत करते है लेकिन उन्हें उनकी मेह्नत का फल नहीं मिलता है. हर पल वह किस्मत को दोष देते रहते है. उनका ऐसा मानना होता है की दुर्भाग्य उनका पीछा नही छोड़ रहा है. जिस वजह से उन्हें लाभ नहीं मिल पा रहा है.

आप मेहनत तो बहुत करते है लेकिन आपकी मेहनत के अनुसार आपको फल नहीं मिलता है तो इसमें आपकी कुंडली का दोष हो सकता है. या फिर कह सकते है की जाने अनजाने में आपसे हूई गलती का फल आपको मिलता है. जिसके चलते आपको गरीबी का सामना करना पड़ता है.इस स्थिति में आपका साथ शास्त्र और ग्रंथ दे सकते है.

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शास्त्रों और पुराणों में ऐसे कई उपाय बताये गए है जिसके करने से आपके सभी दुखो के साथ बुरा समय भी कट सकता है. पुराणों में मुख्य 7 ऋषियों का सम्पूर्ण वर्णन पाया जाता है. जिनके नाम का प्रतिदिन उठते ही जाप करने सेर आपकी सभी परेशानिया दूर हो सकती है.

ऋषि विश्वामित्र

एक चंद्रवंशी राजकुमार के रूप में जन्म लेने वाले ऋषि विश्वामित्र प्रभु श्रीराम और उनके भाई लक्ष्मण के गुरु थे. ऋषि विश्वामित्र के आश्रम में रहकर ही श्रीराम और लक्ष्मण ने अपने जीवन की शिक्षा प्राप्त की थी. श्री राम और लक्ष्मण ने उस आश्रम में आतंक मचाने वाले असुरों का संहार भी किया था. कई व्यक्ति इस बात से अनजान है की गायत्री मंत्र की रचना विश्र्वामित्र ने ही की थी.

ऋषि वशिष्ठ

राजा दशरथ के कुल गुरु ऋषि वशिष्ठ जी थे. जिनके पिता भगवान ब्रह्मा जी हैं. ऋषि वशिष्ठ का स्वयं ब्रह्माजी की इच्‍छा शक्ति से हुआ था. वही ऋषि वशिष्ठ जी ने ऋग्वेद के 7वें मंडल की रचना कर अपनी अहम् पहचान बनाई थी.

ऋषि अत्री

जिस समय भगवान श्री राम लक्ष्मण और सीता जी वनवास काट रहे थे तो कुछ समय के लिए वनवास के दौरान वह ऋषि अत्री के आश्रम में रहे थे. ऋषि अत्री ने देवी-देवताओं के कई श्लोकों की रचना की थी. ऋषि अत्री के नाम पर ही ऋग्वेद के पांचवें मंडल का नाम रखा गया था.

महर्षि गौतम

कई मंत्रो और स्तुतियों की रचना करने वाले महर्षि गौतम के नाम से ऋग्वेद में कई सूक्तियां हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दे की ऋषि गौतम ही गौतम गौत्र के जनक हैं.

ऋषि जमदग्नि

ऋषि जमदग्नि को भगवान शिव का अवतार माना जाता है. ऋषि जमदग्नि परशुराम जी के पिता थे.

ऋषि भारद्वाज

बृहस्पति देव के पुत्र ऋषि भारद्वाज हैं. ग्रंथों में बताया गया है की ऋषि भरद्वाज को आयुर्वेद का ज्ञान भगवान इन्द्र ने दिया था. जिसका उल्लेख महाभारत में किया गया है.

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ऋषि कश्‍यप

ऋषि कश्यप को अथर्ववेद में विद्वान की उपधि दी गई है. पुराणों में बताई गई जानकारी के अनुसार ऋषि कश्यप की कुल 12 पत्नियां थीं.

सप्तऋषि कहलाते हैं ब्रह्मऋषि

सप्तऋषियों को ब्रह्मऋषि के नाम सम्बोधित किया जाता है. जिनका उल्लेख महाभारत के अलावा गरूड़ पुराण और भी कई ग्रंथों में किया गया है. कहा जाता है की सप्तऋषियों ने देवो के देव महादेव के मार्गदर्शन के चलते प्रथ्वी पर संतुलन स्थापित रखने का कार्य किया था. पुराणों में सभी ऋषियों को ब्रह्मा पुत्र बताया गया है.

करें प्रार्थना

प्रतिदिन सुबह उठने के बाद सर्वप्रथम सप्तऋषियों के नामों का जाप करना चाहिए और उनसे प्राथना करनी चाहिए की वह आपका बुरा वक्त दूर करे और आपको शुभ फल प्रदान करे.

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