सावधान: अगर सावन में किया ये 12 काम, तो कभी नही मिलती भोलेनाथ से माफ़ी, हो जाएगा नाश

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भगवान शिव के गुस्से के बारे में कौन नहीं जानता. जितनी जल्दी शिवजी प्रसन्न होते हैं उतनी ही जल्दी किसी का विनाश भी कर सकते हैं. कहा जाता है की जिस दिन शिवजी ने अपनी तीसरी आंख खोल दी उस दिन सृष्टि का विनाश निश्चित है. कोई कुछ भी कर ले अच्छा या बुरा, भगवान से कुछ नहीं छुपता. इंसान को उसके कर्मों की सज़ा मिल कर ही रहती है. शिवपुराण में कार्य, बात-व्यवहार और सोच से संबंधित 12 पापों का वर्णन किया गया है. कहा गया है अगर मनुष्य ने इनमें से कोई पाप कर दिया तो वह कभी सुखी नहीं रह पाता. दुःख सिर्फ बात-व्यवहार से नहीं पहुंचाया जाता. किसी के प्रति अगर मन में दुर्भावना है तो उसे भी पाप ही समझा जाता है. भगवान शिव ऐसे मनुष्य को कभी क्षमा नहीं करते. आज हम आपको बतायंगे उन्ही 12 पापों के बारे में जिसे करने से बचना चाहिए.

इन 12 पापों के बारे में जिसे करने से बचना चाहिए :

शादीशुदा लोगों से कभी संबंध नहीं बनाने चाहिए. उनको पाने की इच्छा या बुरी नज़र रखना पाप माना जाता है.
दूसरों के धन पर नज़र नहीं रखना चाहिए. किसी और के धन-दौलत को अपना बनाने की चाहत भी पाप है.

किसी निर्दोष को दुःख पहुंचाने से बचना चाहिए. उसको किसी भी प्रकार का कष्ट देना या उसके मार्ग में बाधाएं पैदा करना घोर पाप है. ऐसे व्यक्ति को भगवान शिव कभी माफ़ नहीं करते.

सदैव अच्छा और सच्चा मार्ग चुनना चाहिए. ग़लत राह पर चलने वालों को भगवान कभी माफ़ नहीं करते. ज़रूरी नहीं की किसी का बुरा सिर्फ किसी कार्य के द्वारा ही किया जाए. किसी के प्रति ग़लत सोच को भी अपने मन से कोसों दूर रखना चाहिए.

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वह महिला जो गर्भवती है या फिर अपने मासिक में है, उन्हें कड़वे शब्द कहना या उन्हें दुःख पहुंचाना भगवान शिव की नज़रों में घोर अपराध है.

किसी को नुकसान पहुंचाने के बारे में सोचना या उस नीयत से झूठ बोलना ‘छल-कपट’ की श्रेणी में आता है. ऐसा करने से बचें.

अगर आप किसी के मान-सम्मान या प्रतिष्ठा को हानि पहुंचाते हैं तो भगवान शिव की दृष्टि में यह भी एक जघन्य अपराध है. किसी की बुराई को पीठ पीछे करने से बचें.

धर्म में जिन चीज़ों को खाने की मनाही है, उसे खाना पाप है. इतना ही नहीं धर्म के विपरीत कोई भी कार्य करना अपराध है.
अपने से कमज़ोर लोगों पर हिंसा नहीं करना चाहिए. बच्चे, औरत, जानवरों पर हिंसा करने वाले लोगों को और असामाजिक कार्य में शामिल होने वाले लोगों को भगवान शिव कभी माफ़ नहीं करते.

किसी और की दौलत को अपना बनाना, ब्राह्मण लोगों की या मंदिरों की संपत्ति चुराना अपराध की श्रेणी में आता है. ऐसे विचार को मन से निकाल दें.

मनुष्य को अपने माता-पिता, गुरु और पूर्वजों का अपमान कभी नहीं करना चाहिए. हमेशा उनको इज्ज़त दें. इनका अपमान करना आपको पाप का भागी बनाता है.

अपने गुरु की पत्नी के साथ संबंध बनाना, शराब का सेवन करना या कोई भी दान की हुई वस्तु वापस ले लेना, सब घोर पापों की श्रेणी में आता है. इन सब कामों को करने से बचें अन्यथा भगवान शिव कभी क्षमा नहीं करेंगे.

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