How medical personnel will चिकित्‍सा कर्मी आधे भूखे पेट रहकर कैसे लड़ेंगे कोरोना से लड़ाई ?

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-लखनऊ के होटल में ठहरे कर्मियों को पूरा खाना नहीं मिलने का लगा आरोप

-उत्‍तर प्रदेश नर्सिंग एसोसिएशन के महामंत्री ने लिखा मुख्‍यमंत्री को पत्र

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। वैश्विक महामारी कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई जारी है, लड़ाई लड़ रहे योद्धाओं के स्‍वास्‍थ्‍य का खयाल रखने नियम-कानून सब बने हुए हैं, लेकिन ये लागू कितने हो रहे हैं इसकी एक बानगी देखिये। केजीएमयू के मेडिसिन विभाग के विभागाध्‍यक्ष ने जिस कोरोना का इलाज करने वालों के लिए भोजन का जो मेनू बताया है, उसके हिसाब से राजधानी लखनऊ में ही नहीं मिल रहा है, दूसरी जगह तो यह जांच का विषय है।

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उत्‍तर प्रदेा नर्सिंग एसोसिएशन के महामंत्री अशोक कुमार ने आरोप लगाते हुए कहा है कि होटल जैमिनी कान्टिनेटल लखनऊ में बलरामपुर चिकित्सालय की नर्सेज व अन्य लोग क्वॉरेंटाइन के लिए रखे गये हैं, उन्हें कल यानी 2 मई को दोपहर लंच में कुछ नहीं खाने को मिला, जब इन लोगों ने बोला तो लगभग 5 बजे शाम सैन्डविच जिसमें (1पीस खीरा,टमाटर ब्रेड) और चाय मिली,  इसके बाद रात के खाने में केवल दो रोटी चावल सब्जी दाल दी गयी।

उन्‍होंने कहा कि दूध,फल भी माँगने पर कहा जा रहा है अपनी अपनी तरफ से व्यवस्था करें। पानी भी आर ओ का स्वयं भरना पड रहा है, कमरों में प्रतिदिन सफाई के लिए भी मना किया जा रहा है, बाथरूम स्वयं साफ करना है।

उन्‍होंने बताया कि आज यानी 3 मई को सुबह नाश्ते में हलवा और चना देकर ड्यूटी भेज दिया गया। यह सरासर अन्याय हो रहा है।

आपको बता दें कि जो हेल्‍दी खुराक केजीएमयू के मेडिसिन विभाग द्वारा निर्धारित की गयी है, उसमें आवश्‍यक विटामिन, मिनरल्‍स, फैट आदि का ध्‍यान रखा गया है। डायटीशियम शालिनी श्रीवास्‍तव द्वारा विभागाध्‍यक्ष प्रो वीरेन्‍द्र आतम के निर्देशानुसार तैयार किया गया है।

 http://sehattimes.com/knowनिर्धारित डायट के बारे में सेहत टाइम्‍स ने अपनी खबर में दिया था, देखने के लिए क्लिक करें

अशोक कुमार ने आरोप लगाया कि सरकार के द्वारा दिए हुए धन का दुरुपयोग अधिकारी और होटल मालिक मिलकर कर रहे हैं, यह गलत है एक तरफ तो नर्सेज को योद्धा बनाकर मैदान में उतार दिया गया है, कहीं कहीं फूलों की बरसात हो रही है, दूसरी तरफ उनको भरपेट भोजन भी नहीं मिल रहा है, ऐसी परिस्थितियों में कहां तक करौना नामक महामारी से सघर्ष कर किया जा सकता है। अगर मरीजों की सेवा करने वाले ये कर्मी ही अपनी-अपनी डायट नहीं पायेंगे तो मरीजों की देखभाल क्‍या कर  पायेंगे।

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