उत्तराखण्ड टिहरी झील में बना इतिहास, हुई स्कूबा डाइविंग शुरू

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टिहरी: टिहरी झील महोत्सव के दौरान झील में पहली बार स्कूबा डाइविंग का इवेंट भी किया गया। इस दौरान आए विशेषज्ञों ने टिहरी झील में गहराई में जाकर स्कूबा डाइविंग का आनंद लिया और झील में डूबे टिहरी शहर के अवशेष देखे।उत्तराखण्ड टिहरी झील में बना इतिहास, हुई स्कूबा डाइविंग शुरू

शुक्रवार को टिहरी झील महोत्सव के दौरान टिहरी झील के लिए एक ऐतिहासिक पल भी आया। वर्ष 2006 में बनी टिहरी झील में अभी तक वाटर स्पोट्र्स और वोटिंग का संचालन किया जा रहा था। जहां देश विदेश से आने वाले पर्यटक वाटर स्पोट्र्स और नौकायन का आनंद लेते थे, लेकिन आज टिहरी झील महोत्सव के दौरान यहां पर स्कूबा डाइविंग का भी आयोजन किया गया। 

दिनभर में लगभग 15 लोगों ने स्कूबा डाइविंग का आनंद लिया। स्कूबा डाइविंग के दिल्ली से आए विशेषज्ञ गौतम ने बताया कि टिहरी झील में स्कूबा डाइविंग की अपार संभावनाएं हैं यहां पर झील में डूबा शहर उसके अवशेष पर्यटकों को रोमांचित करेंगे। पानी के नीचे शहर के दीदार करने से यहां की संस्कृति के बारे में भी जानकारी मिलेगी।

गोवा से आई स्कूबा डाइविंग की विशेषज्ञ शना ने बताया कि टिहरी झील एक शानदार पर्यटन स्थल है। यहां पर वाटर स्पोट्र्स का देश का सबसे बड़ा हब बन सकता है। थोड़ा सुविधाएं और साहसिक खेलों को बढ़ावा दिया जाए तो यहां के युवा भी साहसिक खेलों में नाम कमा सकते हैं। माउंट एवरेस्ट विजेता अरविंद रतूड़ी ने बताया की टिहरी झील में  स्कूबा डाइविंग शुरू होना अपने आप में बेहद अहम है इस इवेंट के शुरू होने के बाद यहां पर पर्यटन को और इजाफा मिलेगा पर्यटक टिहरी झील के नीचे डूबे शहर के दीदार कर पाएंगे। 

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