यहाँ दरिंदगी की हदें हुई पार, पति के जूतों में पानी पीती हैं महिलाएं

- in ज़रा-हटके

अंधविश्‍वास – भले ही सालों पहले राजा राम मोहन राय ने देश में सती प्रथा और महिलाओं पर हो रहे अत्‍याचार को खत्‍म करवा दिया हो लेकिन आज भी महिलाएं प्रत्‍यक्ष नहीं पर अप्रत्‍यक्ष रूप से अत्‍याचार का शिकार हो रही हैं।

यहाँ दरिंदगी की हदें हुई पार, पति के जूतों में पानी पीती हैं महिलाएंआज भी देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर की महिलाएं अपने हक के लिए लड़ रही हैं। आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर महिलाओं का जीवन बहुत ही ज्‍यादा निंदनीय है और आपको ये सब जानकर अपने और अपने देश पर शर्म आ जाएगी।

भारत में आप आज भी अंधविश्‍वास को पैर पसारे देख सकते हैं। इस अंधविश्‍वास की आड़ में लोग क्‍या-क्‍या कर जाते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही अंधविश्‍वास के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर आपको अपने कानों और आंखों पर विश्‍वास नहीं हो पाएगा।

राजस्‍थान का मंदिर

राजस्‍थान के भीलवाड़ा इलाके में एक माता का मंदिर बहुत प्रसिद्ध है लेकिन यहां पर महिलाओं के साथ जो किया जाता है उसे जानकर आपको शर्म आ जाएगी। यहां पर महिलाओं को अपने पति के जूते से पानी पीने के लिए मजूबूर किया जाता है।

इतना ही नहीं महिलाओं को अपने पति के जूतों को सिर पर रखकर गली-गली घूमना भी पड़ता है। इस शर्मसार कर देने वाली हरकत को प्रथा के नाम पर सालों से ढोया जा रहा है।

अंधविश्‍वास की आड़

यहां पर अंधविश्‍वास और भूत-प्रेत के नाम पर महिलाओं के साथ क्रूरता की हद तक पार कर दी जाती है। झाड़-फूंक करने वाली पुजारी भी महिलाओं को यातनाएं देते हैं। मंदिर के पुजारी अैर भूत उतारने वाले तांत्रिक भूत भगाने के नाम पर उन्‍हें मारते-पीटते हैं।

उन्‍हें अपने सिर पर गंदे जूते रखकर कई किलोमीटर तक चलने के लिए मजबूर किया जाता है। गांवों की गलियों से ये महिलाएं जूता सिर पर रखकर मुंह में दबाकर गुज़रती हैं। बच्‍चे इन्‍हें देखकर हंसते हैं लेकिन अपने घरवालों के दबाव की वजह से इन्‍हें ऐसा करना पड़ता है

ज़रा सोचिए जिस जूते को हम पैरों में पहनते हैं उसे सिर पर ढोकर कैसे चल सकते हैं। दुनियाभर की गंदगी उसमें लिपटी रहती हैं और उन जूतों को मुंह में दबाकर चलना तो मौत के समान है। यहां के लोगों को औरतों पर हो रहे इस अत्‍याचार से कोई फर्क नहीं पड़ता है, वो तो प्रथा के नाम पर इसे आगे बढ़ने दे रहे हैं। सालों से अंधविश्‍वास के नाम पर ये खेल खोला जा रहा है। लोगों का कहना है कि यहां केवल महिलाएं ही लाई जाती हैं। अब कोई बताए ज़रा कि क्‍या भूत सिर्फ महिलाओं में ही आते हैं, पुरुषों में नहीं।

जो भी महिला किसी भूत-प्रेत के चंगुल में फंस गई है या मानसिक रूप से बीमार है, उसे यहां लाया जाता है। कुछ लोग अपनी बहू को मानसिक रूप से बीमार कह कर भी लाते हैं। कई मामले ऐसे भी सामने आए जहां मर्दों ने औरतों को उनकी असली जगह दिलाने के मकसद से यहां लाकर पटका और उनसे ये काम करवाया।

अब आप बताइए कि क्‍या ये सब जानकर आपको शर्म नहीं आ रही ?

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