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	<title>हेल्थ &#060; Ujjawal Prabhat | उज्जवल प्रभात</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles.</description>
	<lastBuildDate>Mon, 29 Jun 2026 05:15:47 +0000</lastBuildDate>
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	<title>हेल्थ &#060; Ujjawal Prabhat | उज्जवल प्रभात</title>
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	<item>
		<title>बच्चे के लिए क्यों अमृत समान माना जाता है मां का दूध? </title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Jun 2026 05:15:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
		<category><![CDATA[मां का दूध]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="607" height="386" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/iuyio.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%83%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a4%ae/">बच्चे के लिए क्यों अमृत समान माना जाता है मां का दूध? </a></p>
<p>&#160;मां का दूध बच्चों के लिए अमृत समान होता है, ये तो हम सभी जानते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि यह सिर्फ पोषण ही नहीं देता, बल्कि बच्चे के डीएनए की संरचना में भी कुछ बहुत खास बदलाव करता है? हाल ही में खून के नमूनों पर हुए एक शोध में यह दिलचस्प &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="607" height="386" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/iuyio.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%83%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a4%ae/">बच्चे के लिए क्यों अमृत समान माना जाता है मां का दूध? </a></p>

<p>&nbsp;मां का दूध बच्चों के लिए अमृत समान होता है, ये तो हम सभी जानते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि यह सिर्फ पोषण ही नहीं देता, बल्कि बच्चे के डीएनए की संरचना में भी कुछ बहुत खास बदलाव करता है?</p>



<p>हाल ही में खून के नमूनों पर हुए एक शोध में यह दिलचस्प और चौंकाने वाली बात सामने आई है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस नई रिसर्च में बच्चों की सेहत और उनके डीएनए को लेकर क्या-क्या खुलासे हुए हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">रिसर्च में क्या सामने आया?</h3>



<p>स्पेन के &#8216;बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ&#8217; और ब्रिटेन की &#8216;एक्सेटर और ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी&#8217; के वैज्ञानिकों ने मिलकर यह महत्वपूर्ण अध्ययन किया है। इस रिसर्च टीम ने कुल 3,421 बच्चों के खून के नमूनों की जांच की।</p>



<p><strong>इस दौरान दो तरह के बच्चों के बीच तुलना की गई:</strong></p>



<p>पहले वो, जिन्हें जन्म के बाद शुरुआती कम से कम तीन महीनों तक सिर्फ मां का दूध पिलाया गया था।<br />दूसरे वो, जिन्हें मां का दूध नहीं मिला था।<br />जांच में यह बात सामने आई कि जिन बच्चों ने तीन महीने तक सिर्फ मां का दूध पिया था, उनके डीएनए में &#8216;एपिजेनेटिक मार्कर&#8217; (यानी डीएनए में होने वाले केमिकल बदलाव) पाए गए।</p>



<p><strong>इम्यूनिटी और विकास से जुड़े जींस पर दिखा सीधा असर<br /></strong>शोधकर्ताओं ने पाया कि मां का दूध पीने वाले बच्चों में &#8216;डीएनए मिथाइलेशन&#8217; नाम की एपिजेनेटिक प्रक्रिया के निशान काफी ज्यादा थे। सबसे खास बात यह है कि ये निशान शरीर के उन जींस पर अधिक पाए गए, जो सीधे तौर पर बच्चे की इम्युनिटी और उसके विकास से जुड़े होते हैं। यह बदलाव उन बच्चों की तुलना में औसतन कहीं अधिक था, जिन्हें मां का दूध नसीब नहीं हुआ था।</p>



<p><strong>क्या है एपिजेनेटिक्स और &#8216;ऑफ स्विच&#8217; का विज्ञान?<br /></strong>विज्ञान के इन भारी-भरकम शब्दों को आसान भाषा में ऐसे समझें:</p>



<p>एपिजेनेटिक्स: यह हमारे जींस और हमारे आस-पास के पर्यावरण के बीच का तालमेल है। इसी आपसी असर से यह तय होता है कि कोई जीन कैसा व्यवहार करेगा।<br />डीएनए मिथाइलेशन: यह प्रक्रिया शरीर में एक &#8216;ऑफ स्विच&#8217; की तरह काम करती है। इसका काम किसी भी जीन को खुद को अभिव्यक्त करने से रोकना होता है। यह प्रक्रिया भ्रूण के विकास, जीनोमिक स्थिरता और शरीर के अन्य जरूरी कामों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।</p>



<p><strong>अभी भी असमंजस में हैं वैज्ञानिक<br /></strong>यह पूरी स्टडी &#8216;क्लीनिकल एपिजेनेटिक्स&#8217; नाम के मशहूर जर्नल में प्रकाशित हुई है। हालांकि, इस शोध में एक बात स्पष्ट की गई है- रिसर्च में डीएनए पर पड़े इन निशानों को तो देखा गया, लेकिन यह नहीं परखा गया कि इन एपिजेनेटिक बदलावों का असल में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता या उनके शारीरिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ा।</p>
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]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>अनजाने में की गई ये गलतियां बिगाड़ देती हैं महिलाओं का हार्मोनल बैलेंस</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 05:41:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
		<category><![CDATA[हार्मोनल बैलेंस]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="716" height="396" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/o9uijk.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%88-%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/">अनजाने में की गई ये गलतियां बिगाड़ देती हैं महिलाओं का हार्मोनल बैलेंस</a></p>
<p>महिलाओं को उम्र के कई पड़ावों पर हार्मोनल बदलाव से गुजरना होता है, जो उनकी पूरी सेहत, एनर्जी और मूड को प्रभावित करता है। हालांकि, कई बार महिलाएं अनजाने में कुछ ऐसी आदतें अपना लेती हैं, जो चुपके-चुपके उनके हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ता है। इन छोटी-छोटी आदतों का शरीर पर काफी गहरा असर पड़ता है। &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="716" height="396" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/o9uijk.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%88-%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/">अनजाने में की गई ये गलतियां बिगाड़ देती हैं महिलाओं का हार्मोनल बैलेंस</a></p>

<p>महिलाओं को उम्र के कई पड़ावों पर हार्मोनल बदलाव से गुजरना होता है, जो उनकी पूरी सेहत, एनर्जी और मूड को प्रभावित करता है। हालांकि, कई बार महिलाएं अनजाने में कुछ ऐसी आदतें अपना लेती हैं, जो चुपके-चुपके उनके हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ता है।</p>



<p>इन छोटी-छोटी आदतों का शरीर पर काफी गहरा असर पड़ता है। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि इन आदतों में सुधार करके हार्मोनल बैलेंस में सुधार किया जा सकता है। आइए जानें क्या हैं ये आदतें।</p>



<p><strong>हार्मोनल बैलेंस प्रभावित करती हैं ये आदतें<br /></strong>बिगड़ा हुआ स्लीप पैटर्न- आजकल देर रात तक मोबाइल चलाना आम हो गया है, लेकिन यह आदत स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल को बढ़ाकर एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे प्रमुख हार्मोन्स को असंतुलित कर देती है। हर दिन 7-8 घंटे की गहरी नींद हार्मोन्स को सही रखने के लिए जरूरी है।</p>



<p>बहुत ज्यादा स्ट्रेस लेकर चलना- महिलाएं अक्सर परिवार, काम और जिम्मेदारियों में खुद को भूल जाती हैं। लगातार स्ट्रेस हार्मोनल फंक्शन को सबसे पहले प्रभावित करता है और थायरॉइड, पीसीओडी, अनियमित पीरियड्स जैसी समस्याओं को बढ़ावा देता है।</p>



<p>ज्यादा चीनी और प्रोसेस्ड फूड खाना- पैकेट फूड, मीठे ड्रिंक्स, बेकरी आइटम और फ्राई स्नैक्स इंसुलिन बढ़ाते हैं, जिससे शरीर में सूजन और हार्मोनल डिस्टर्बेंस होता है। हाई शुगर डाइट पीसीओएस और वजन बढ़ने का बड़ा कारण बनती है। इनकी जगह घर का खाना, फ्रूट्स, सलाद और हेल्दी फैट्स को प्राथमिकता दें।</p>



<p>खाने में पोषक तत्वों की कमी- कई महिलाएं कैल्शियम, आयरन, विटामिन-डी, बी12, ओमेगा-3 और मैग्नीशियम की कमी का शिकार होती हैं। ये सभी हार्मोन्स को बैलेंस रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए रोजाना दाल, हरी सब्जियां, दही, फल, नट्स, बीज और सही मात्रा में प्रोटीन लेना जरूरी है।</p>



<p>पानी कम पीना- डिहाइड्रेशन शरीर की मेटाबॉलिक और हार्मोनल एक्टिवीज को सीधे प्रभावित करता है। कम पानी पीने से शरीर में टॉक्सिन्स जमा होते हैं और स्किन, पीरियड्स, मूड स्विंग्स से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं। इसलिए दिनभर में कम से कम 7-8 गिलास पानी जरूर पिएं।</p>



<p>फिजिकल एक्टिविटी की कमी- लंबे समय तक बैठकर काम करने से हार्मोन इंसुलिन, थायरॉइड और मेटाबालिज्म कमजोर हो जाते हैं। रोज 30 मिनट तेज चलना, योग या हल्का वर्कआउट हार्मोनल बैलेंस को बहुत अच्छी तरह सुधारता है।<br />अनियमित खाने की आदतें- खाना छोड़ना, देर से खाना, या बार-बार जंक फूड खाना शुगर लेवल और हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ देता है।</p>



<p>सेहत पर ध्यान न देना- अक्सर महिलाएं अपनी हेल्थ को प्राथमिकता नहीं देतीं। शरीर की जरूरतों को नजरअंदाज करना, समय पर जांच न करवाना या लक्षणों को हल्के में लेना हार्मोनल समस्याओं को बढ़ाता है।</p>
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		<title>कहीं आपका आयरन इनटेक दिमाग को वक्त से पहले बूढ़ा तो नहीं कर रहा? </title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jun 2026 04:44:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="729" height="403" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/iuyoi-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a4%b0%e0%a4%a8-%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be/">कहीं आपका आयरन इनटेक दिमाग को वक्त से पहले बूढ़ा तो नहीं कर रहा? </a></p>
<p>शोधकर्ताओं ने पाया है कि दिमाग के न्यूरान में ज्यादा आयरन दिमाग के सेल्स की रक्षा को कम कर सकता है, जिससे तनाव व अन्य सेलुलर नुकसान के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है। इसे उन्होंने &#8216;क्रोनोफेरोप्टोसिस&#8217; नाम दिया है।&#160; एक्स्ट्रा आयरन सेल्स की रक्षा करने वाले एंटीआक्सीडेंट प्रोटीन को खत्म कर देता है, जिससे दिमाग &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="729" height="403" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/iuyoi-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a4%b0%e0%a4%a8-%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be/">कहीं आपका आयरन इनटेक दिमाग को वक्त से पहले बूढ़ा तो नहीं कर रहा? </a></p>

<p>शोधकर्ताओं ने पाया है कि दिमाग के न्यूरान में ज्यादा आयरन दिमाग के सेल्स की रक्षा को कम कर सकता है, जिससे तनाव व अन्य सेलुलर नुकसान के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है। इसे उन्होंने &#8216;क्रोनोफेरोप्टोसिस&#8217; नाम दिया है।&nbsp;</p>



<p>एक्स्ट्रा आयरन सेल्स की रक्षा करने वाले एंटीआक्सीडेंट प्रोटीन को खत्म कर देता है, जिससे दिमाग के सेल्स बाहरी तनावों के प्रति संवेदनशील व कमजोर हो जाती हैं। सेल डेथ डिस्कवरी नामक पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि दिमाग की सेल्स में आयरन का संचय न्यूरोडीजेनेरेशन रोगों की भविष्यवाणी, रोकथाम और उपचार के प्रयासों में महत्वपूर्ण लक्ष्य हो सकता है। शोधकर्ताओं ने यह जानकारी दी।</p>



<h2 class="wp-block-heading">न्यूरान तनाव के प्रति अधिक संवेदनशील&nbsp;</h2>



<p>अमेरिका के साल्क इंस्टीट्यूट फार बायोलाजिकल स्टडीज में शोध प्रोफेसर पाम माहेर ने कहा, &#8220;अल्जाइमर रोग और अन्य न्यूरोडीजेनेरेशन विकारों के संदर्भ में लचीलापन एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गया है, जिसका उद्देश्य दिमाग को उन तनावों का सामना करने में अधिक लचीला बनाना है, जो न्यूरोडीजेनेरेशन में योगदान करते हैं।&nbsp;</p>



<p>महेर ने कहा कि अध्ययन दर्शाता है कि जब आयरन एक निश्चित स्तर पर पहुंचता है, तो सेल्स लचीलापन खो देती हैं, जिससे न्यूरान्स तनाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं जो उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">आयरन का संचय न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से संबंधित&nbsp;</h2>



<p>शोधकर्ताओं ने कहा कि पिछले अध्ययनों में पाया गया है कि आयरन धीरे-धीरे न्यूरान्स के अंदर जमा हो सकता है। जबकि जीवन के प्रारंभिक चरण में आयरन का संचय न्यूरॉन के काम पर कम प्रभाव डालता है, लेकिन जीवन के बाद के चरण में यह धीरे-धीरे न्यूरोनल की मृत्यु में योगदान कर सकता है। टीम ने यह पता लगाने के लिए न्यूरॉन्स का अध्ययन किया कि क्या और कैसे यह आयरन का संचय न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से संबंधित है।&nbsp;</p>



<p>लंबे समय तक आयरन की अधिकता फेरोप्टोटिक स्ट्रेस की स्थिति पैदा करती है, जिसमें नर्व सेल्स जीवित तो रहती हैं, लेकिन ऑक्सीडेटिव चोट के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं। आयरन हरे पत्तेदार साग, स्टार्च वाले अनाज, लीन मीट, समुद्री भोजन और दूसरी खाने की चीजों में पाया जाता है ।</p>



<h2 class="wp-block-heading">न्यूरान्स पर तनाव डालने लगता है आयरन का जमाव</h2>



<p>हालांकि, लंबे समय तक संपर्क में रहने वाले न्यूरॉन्स में कुछ प्रक्रियाओं का बढ़ना और कुछ का कम होना देखा गया। इसमें हानिकारक केमिकल का जमा होना, फायदेमंद केमिकल का कम होना और लिपिड पेरोक्सीडेशन का बढ़ना शामिल था।&nbsp;</p>



<p>जब हर ग्रुप को और ज्यादा तनाव का सामना करना पड़ा, तो कम समय तक संपर्क में रहने वाले न्यूरान्स तनाव झेल पाए, जबकि लंबे समय तक संपर्क में रहने वाले न्यूरान्स ऐसा नहीं कर पाए। माहेर की लैब में लेखक नवाब जान डार ने कहा, इन सेल्स का भविष्य आयरन की मात्रा से तय नहीं होता, बल्कि इस बात से तय होता है। कि वे कितने समय तक तनाव में रहती हैं।&#8221;&nbsp;</p>



<p>शोधकार्ताओं ने कहा कि ऐसे उपाय विकसित किए जा सकते हैं जिनसे उस स्थिति में मदद मिल सके, जब दिमाग कमजोर होने लगता है यानी जब आयरन का जमाव न्यूरॉन्स पर तनाव डालने लगता है। इससे आयरन के असंतुलन को ठीक किया जा सकेगा और न्यूरॉन्स को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखा जा सकेगा।</p>
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		<title> इन वजहों से रातभर बदलते हैं आप करवटें&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 05:18:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="714" height="371" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/oiyy.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%87%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%ad%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%88/"> इन वजहों से रातभर बदलते हैं आप करवटें&#8230;</a></p>
<p>लॉजिक कहता है कि दिनभर की थकान के बाद शरीर को रात में गहरी नींद आनी चाहिए, जबकि कुछ लोगों के मामले में यह लॉजिक फेल हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो रातभर करवटें बदलते रहते हैं पर नींद आती ही नहीं। पर कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? चलिए नींद न &#8230;</p>
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<p>लॉजिक कहता है कि दिनभर की थकान के बाद शरीर को रात में गहरी नींद आनी चाहिए, जबकि कुछ लोगों के मामले में यह लॉजिक फेल हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो रातभर करवटें बदलते रहते हैं पर नींद आती ही नहीं। पर कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? चलिए नींद न आने के कारणों के बारे में डिटेल में बात करते हैं।</p>



<p><strong>थकान के बावजूद नींद न आने के कारण<br /></strong>रात में नींद न आने के बहुत से कारण होते हैं, आइए इनके बारे में जानते हैं:</p>



<p><strong>इंसोम्निया<br /></strong>जब शरीर पूरी तरह से थकने के बाद भी रात में सो नहीं पाता तो इसे अक्सर इंसोम्निया कहा जाता है। इंसोम्निया एक तरह का स्लीप डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति को सोने में परेशानी होने के साथ ही गंभीर मामलों में रातभर नींद तक नहीं आती।</p>



<p><strong>तनाव और एंग्जाइटी<br /></strong>सोते समय दिमाग में विचार आते रहना, किसी बात को लेकर लंबे समय से चिंता और एंग्जाइटी जैसी समस्याएं स्लीप साइकल बिगाड़ देती हैं।</p>



<p><strong>थायरॉइड<br /></strong>अगर आपका थायरॉइड लेवल बैलेंस नहीं है तो यह नींद न आने का सबसे बड़ा कारण हो सकता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अकेले नींद न आने की दिक्कत को थायरॉइड डिसऑर्डर से नहीं जोड़ा जा सकता है।</p>



<p><strong>मेनोपॉज</strong><br />महिलाओं को नींद न आने की एक वजह मेनोपॉज भी है, क्योंकि इस दौरान शरीर में कई तरह के हॉर्मोनल बदलाव होते हैं। इसके साथ अगर हॉट फ्लैश और पसीना बहुत आ रहा है तो इस संकेत को अनदेखा न करें।</p>



<p><strong>दवाइयां<br /></strong>ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन और एंग्जाइटी से बचने के लिए ली जा रही दवाइयां भी स्लीप साइकल बिगाड़ती हैं। इस बारे में डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है।</p>



<p><strong>बेहतर नींद के लिए टिप्स<br /></strong>सोते समय कमरे में पर्याप्त अंधेरा होने के साथ हल्की ठंडक भी होनी चाहिए। वहीं, नींद के लिए शांति कितनी जरूरी है यह तो आप जानते ही हैं।</p>



<p>सोने का एक समय तय करें ताकि बॉडी क्लॉक उसी तरह से खुद को ढाल पाए।</p>



<p>कैफीन, शराब, निकोटीन के सेवन और सोने के समय के बीच कम से कम 4-6 घंटे का गैप रखें।</p>



<p>ज्यादा स्क्रीन टाइम भी स्लीप साइकल खराब करता है, सोने से 1 घंटे पहले ही मोबाइल और लैपटॉप अलग रख दें।</p>
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		<title>क्या लोहे की कड़ाही में खाना पकाना सच में फायदेमंद है?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Jun 2026 05:11:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
		<category><![CDATA[लोहे की कड़ाही]]></category>
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<p>आजकल हमारी रसोई में एक बड़ा और अच्छा बदलाव देखने को मिल रहा है। लोग मॉडर्न बर्तनों की जगह वापस अपने पुराने और पारंपरिक बर्तनों की तरफ लौट रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा चलन &#8216;लोहे की कड़ाही&#8217; का बढ़ रहा है। दादी-नानी के जमाने से माना जाता रहा है कि लोहे की कड़ाही में बना &#8230;</p>
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<p>आजकल हमारी रसोई में एक बड़ा और अच्छा बदलाव देखने को मिल रहा है। लोग मॉडर्न बर्तनों की जगह वापस अपने पुराने और पारंपरिक बर्तनों की तरफ लौट रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा चलन &#8216;लोहे की कड़ाही&#8217; का बढ़ रहा है।</p>



<p>दादी-नानी के जमाने से माना जाता रहा है कि लोहे की कड़ाही में बना खाना न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होता है, बल्कि हमारी सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। आइए, दिल्ली के मैक्योर अस्पताल के कंसल्टेंट मेडिसिन, डॉ. प्रतीक कादयान से जानते हैं कि इस बात में कितनी सच्चाई है।</p>



<p><strong>आयरन की कमी को दूर करने में मददगार<br /></strong>जब हम लोहे की कड़ाही में खाना पकाते हैं, तो बर्तन से प्राकृतिक रूप से थोड़ी मात्रा में आयरन निकलकर हमारे भोजन में घुल जाता है। यह प्रक्रिया शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में काफी मदद कर सकती है। खासतौर पर उन लोगों के लिए यह बहुत फायदेमंद है, जिन्हें आयरन की कमी या एनीमिया का खतरा बना रहता है।</p>



<p>एक दिलचस्प बात यह भी है कि जब आप इस कड़ाही में टमाटर, इमली या कोई अन्य खट्टी चीजें डालकर खाना पकाते हैं, तो भोजन में आयरन की मात्रा थोड़ी और बढ़ जाती है।</p>



<p><strong>बेहतरीन स्वाद और शानदार मजबूती<br /></strong>लोहे की कड़ाही की एक बड़ी खासियत यह है कि यह हीट को बहुत लंबे समय तक अपने अंदर बनाए रखती है। इस वजह से इसमें खाना बहुत अच्छी तरह और समान रूप से पकता है। यही कारण है कि लोहे के बर्तन में बनी सब्जियां, पराठे और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद दोगुना हो जाता है।</p>



<p>इतना ही नहीं, अगर मजबूती की बात करें तो लोहे की कड़ाही आजकल के नॉन-स्टिक बर्तनों की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत और सालों-साल टिकने वाली होती है।</p>



<p><strong>क्या हर किसी के लिए फायदेमंद है?<br /></strong>डॉ. प्रतीक कादयान के अनुसार, आमतौर पर लोहे की कड़ाही में पकाना सेहतमंद है, लेकिन हर व्यक्ति को ज्यादा आयरन की जरूरत नहीं होती।</p>



<p>जिन लोगों के शरीर में पहले से ही आयरन की मात्रा जरूरत से ज्यादा है, या जो आयरन से जुड़ी किसी खास बीमारी या स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें लोहे के बर्तनों का उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।</p>



<p><strong>कैसे करें लोहे की कड़ाही की सही देखभाल?<br /></strong>लोहे की कड़ाही का अगर सही तरीके से रखरखाव न किया जाए, तो यह खराब भी हो सकती है। इसलिए इसके इस्तेमाल में कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए:</p>



<p>सूखा रखें: इस्तेमाल करने और धोने के बाद कड़ाही को अच्छी तरह से सुखाना बहुत जरूरी है। अगर इसमें पानी या नमी रह गई, तो इसमें जंग लग सकती है।<br />तेल लगाएं: कड़ाही की क्वालिटी को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए, समय-समय पर इसके अंदरूनी हिस्से में हल्का-सा तेल लगाकर इसे &#8216;ग्रीस&#8217; करते रहना चाहिए।</p>



<p>लोहे की कड़ाही सिर्फ एक बर्तन नहीं, बल्कि सेहत और स्वाद का एक बेहतरीन तालमेल है। सही देखभाल और थोड़ी-सी सावधानी के साथ, यह आपकी रसोई का सबसे भरोसेमंद साथी बन सकती है।</p>
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