अंतरराज्यीय विवाद और नशे से निपटने को हरियाणा सरकार ने संभाला मोर्चा

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चंडीगढ़ । अंतरराज्यीय जल विवादों और नशे से निपटने में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल संकट मोचक के रूप में उभरे हैं। चार दशकों से कागजों में उलझी लखवार बहुउद्देश्यीय राष्ट्रीय परियोजना को परवान चढ़ाने में उनका अहम रोल रहा।

रेणुका, लखवार, किसाउ बांध परियोजना के लिए संजीदा प्रदेश सरकार ने जिस तरह सतलुज-यमुना लिंक नहर (एसवाईएल) का पानी लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की, उससे हरियाणा के पक्ष में उम्मीदें बंधी हैं। उत्तरी भारत में नशे की बढ़ती समस्या से निपटने को सात राज्यों को एक मंच ला चुके मनोहर अब उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर को इस मुहिम में शामिल करने में जुटे हैं।

मुख्यमंत्री मनोहर हरियाणा के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के हितों का भी ध्यान रखते हुए अपना दायरा बढ़ा रहे हैं। इससे न केवल बड़ी परियोजनाओं को साकार करने में मदद मिलेगी, बल्कि पड़ोसी राज्यों से संबंध भी सुधरेंगे। इसी कड़ी में उन्होंने लंबे अरसे से लटकी लखवार बांध परियोजना को साकार करने के लिए दो साल पहले केंद्र का दरवाजा खटखटाया था।

उन्होंने वर्ष 2016 में तत्कालीन जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्री उमा भारती को पत्र लिखते हुए परियोजना के 90 फीसद खर्च को केंद्र सरकार से वहन करने की गुजारिश की थी। इस पर केंद्र की मुहर के साथ ही प्रोजेक्ट को शुरू करने का रास्ता खुल गया।

मुख्यमंत्री मनोहर ने निजी स्तर पर लखवार बांध के अधूरे पड़े काम का मुआयना कर सभी तकनीकी अड़चनों को समझने और उनके समाधान के लिए लगातार अधिकारियों के साथ मंथन किया। इसके अलावा यमुना की सहयोगी नदी गिरी पर हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में बनने वाले रेणुका बांध सहित अन्य बांधों के जल्द निर्माण के लिए अपर यमुना नदी बोर्ड की बैठकों में दबाव बनाया।

राष्ट्रपति संदर्भ के लिए दस साल लटका रहा एसवाईएल नहर का मामला

एसवाईएल के पानी को लेकर  सुप्रीम कोर्ट में गंभीर रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मजबूती से पैरवी करने के निर्देश दिए थे। उनके हस्तक्षेप का असर रहा कि वर्ष 2004 से राष्ट्रपति संदर्भ के लिए अटके मामले का समाधान निकला और सुप्रीम कोर्ट का फैसला हरियाणा के हक में रहा।

नशे से जंग में बड़ी कामयाबी

उत्तरी भारत में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति से युवाओं को निकालने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सात राज्यों को एक मंच पर लाने में सफलता पाई। पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों और राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्तबैठक में नशे के  खिलाफ शिकंजा कसने की रणनीति तैयार की गई। इसके तहत पंचकूला में संयुक्त सचिवालय स्थापित किया जाएगा, जहां से सभी राज्यों में नशाखोरी रोकने के लिए संयुक्त अभियान चलेगा।

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