दिल्ली गए तो क्या, उत्तराखंड में लोकसभा का चुनाव तो लड़ेंगे हरीश रावत

कांग्रेस आलाकमान की ओर से उत्तराखंड की सियासत से हटाकर केंद्र में अहम जिम्मा दिए जाने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत का सूबे में अहम सियासी दखल जारी रहेगा। यह लगभग तय है कि हरदा आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड से पार्टी का एक महत्वपूर्ण चेहरा होंगे। रावत का कहना है कि अगर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चाहेंगे, तो वह चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दिल्ली गए तो क्या, उत्तराखंड में लोकसभा का चुनाव तो लड़ेंगे हरीश रावत

यह बात दीगर है कि वर्ष 2014 में, जब हरीश रावत मुख्यमंत्री बने, उसके बाद कांग्रेस के कई दिग्गज पार्टी का साथ छोड़ते चले गए। पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री सतपाल महाराज, फिर पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा व पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत समेत दस विधायकों ने कांग्रेस से दामन झटका।

पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव से ऐन पहले दो बार पार्टी प्रदेश अध्यक्ष व विधानसभा अध्यक्ष रहे यशपाल आर्य भी कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए। विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद हरीश रावत के सियासी भविष्य को लेकर कयास लगने लगे क्योंकि वह स्वयं भी चुनाव हार गए। इसके बाद कांग्रेस में वजूद कायम रखने की होड़ में पार्टी के अंदरूनी मतभेद सतह पर आते देर नहीं लगी। 

उत्तराखंड कांग्रेस में चल रहे शीतयुद्ध की जानकारी दस जनपथ पहुंचने पर आलाकमान ने हरीश रावत के लिए फिर से केंद्र की राजनीति में वापसी का रास्ता चुना। उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के दायित्व के साथ ही कांग्रेस कार्यसमिति में बतौर सदस्य जगह दी गई। साथ ही असोम का प्रभार भी सौंप दिया गया। 

नई जिम्मेदारी मिलने के बाद रावत की सूबे में सक्रियता खासी कम दिख रही है, लेकिन इसके बावजूद वह उत्तराखंड से लोकसभा चुनाव लड़ने को पूरी तरह तैयार हैं। सूत्रों के मुताबिक हरदा अपनी पुरानी लोकसभा सीट हरिद्वार या फिर नैनीताल से ताल ठोक सकते हैं। 

इस संबंध में स्वयं हरीश रावत का कहना है, ‘मैं तो वह पाहुना हूं जो हर बात के लिए हर वक्त तैयार रहता है। अगर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी चाहेंगे, तो लोकसभा चुनाव लड़ने से कोई गुरेज नहीं।’ 

एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘कुछ समय पहले तक राज्य में हालात पूरी तरह कांग्रेस के पक्ष में थे लेकिन अब भाजपा स्वयं को पुनर्गठित करने में सफल रही है। अब कांग्रेस को इसी के मुताबिक अपनी रणनीति बनानी होगी। 

इस सबके बावजूद आज एडवांटेज कांग्रेस के पास है और पार्टी 2017 के मुकाबले बहुत बेहतर स्थिति में है।’ राहुल गांधी के नेतृत्व पर रावत ने कहा, ‘कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जो आक्रामक रुख अख्तियार किया है, उसका फायदा पार्टी को मिल रहा है। भाजपा की नीतियों का पर्दाफाश होने के अलावा कांग्रेस को अब बहुत बेहतर सोशल एजेंडा मिला है। इससे पार्टी और उसके तमाम आनुषांगिक संगठनों की सक्रियता भी बढ़ी है।’

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