लाहौर सहित 5 शहरों में घूमा जुगराज, ट्रेन में पकड़ा गया बिना टिकट 

- in राजस्थान

जयपुर.पाकिस्तान की कराची जेल में बंद 20 वर्षीय जुगराज भील के बारे में अहम खुलासा हुआ है। बूंदी का रहने वाला जुगराज पांच सालों से लापता था। जुगराज पाकिस्तान कैसे पहुंचा। इसका जवाब सरहद के इस तरफ किसी के पास नहीं है। हालांकि, सरहद पार से आए पाकिस्तानी दस्तावेज बताते हैं कि जुगराज ट्रैक्टर से बॉर्डर पार कर पाकिस्तान पहुंचा।लाहौर सहित 5 शहरों में घूमा जुगराज, ट्रेन में पकड़ा गया बिना टिकट 

जुगराज को पाकिस्तान में उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वह लाहौर से झेलम जा रहा था। ट्रेन में बिना टिकट पाए जाने पर उससे पूछताछ हुई, जब खुलासा हुआ कि वह भारतीय है और बिना किसी वैध दस्तावेजों के पाकिस्तान में भटक रहा है, तो उसे गिरफ्तार कर लिया गया। मई माह में भारतीय नागरिक सत्यापन की पड़ताल के लिए पाकिस्तान से दस्तावेज आए थे। इससे दो राजस्थानी नागरिकों के पाक जेल में बंद होने का मामला सामने आया था। पहला जुगराज और दूसरा जयपुर से 36 साल पहले लापता 68 वर्षीय गजानंद शर्मा का। गजानंद शर्मा पाक की लाहौर जेल में बंद हैं।

मां बोली- मेरा बेटा तो बिना दिमाग का…वहां कैसे पहुंच गया
कोटा-बूंदी बॉर्डर पर रामपुरिया गांव में भीलों का झोपड़ा। यही पता है जुगराज का। जब उसकी मां पानाबाई से बात की गई तो वे रुंधे गले से इतना ही बोलीं- मेरे जुगराज में तो दिमाग नहीं है, जाने कैसे वहां पहुंच गया। वो तो किसी भी चलती गाड़ी पर लटक जाता था। सात बेटे-बेटियों में जुगराज उनकी चौथी संतान है। पानाबाई बताती हैं- जुगराज जब 16 साल का था, तब विक्षिप्त हो गया। किसी के पीछे चल देना। गाड़ियों पर लटक जाना। एक दिन तो वह कोटा चला गया, वहां चौराहे पर एक प्रतिमा के घोड़े पर बैठ गया था। परिवार की आर्थिक स्थित बेहद कमजोर है। जुगराज के पिता भैरुलाल को उसे लापता होने की तारीख या साल पता नहीं, बस यही जानते हैं कि सर्द नवरात्र में वह गायब हो गया था।

900 किमी. दूर है बूंदी से अटारी

– नागरिकता की जांच के लिए पाक से भारत आए दस्तावेजों के मुताबिक, जुगराज अटारी बॉर्डर से पाकिस्तान में आया। अटारी, बूंदी से 900 किमी दूर है। जुगराज ट्रैक्टर पर बैठकर पाकिस्तान में आया। लेकिन, जुगराज ने कब और कैसे बॉर्डर क्रॉस किया, इसकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। 
– अटारी से पाक आने के बाद जुगराज सियालकोट गया। वहां सेलाहौर, फिर बेगमकोट और इसके बाद गुजरांवाला। दस्तावेजों के मुताबिक, जुगराज लाहौर से झेलम बिना टिकट के ट्रेन में सफर कर रहा था। तब उसे पकड़ा गया। वह लाहौर में सूफी दरगाह दाता दरबार में ठहरा था। पैसे न होने से वह कहीं ठहरा नहीं।

मई- 2014 में जुगराज की सजा पूरी हो गई

– जुगराज की सजा मई, 2014 में पूरी हो गई थी। जनवरी 2015 में उसे काउंसलर असेस दिया गया। किसी भी व्यक्ति के विदेश में पकड़े जाने के बाद उसकी नागरिकता की जांच करवाने की प्रक्रिया काउंसलर एसेस कहलाती है। इसके अंतर्गत विदेश में पकड़े गए किसी व्यक्ति को जब वापस उसके देश भेजना होता है तब काउंसलर उस संबंधित बंदी का पता सत्यापित करवाते हैं। 
-जुगराज के भारतीय होने की पुष्टि हो चुकी है। केन्द्र को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। अब केन्द्र यह रिपोर्ट पाकिस्तान को देगा।

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