GST के दायरे में आ सकती है नेचुरल गैस और एटीएफ

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पेट्रोल और डीजल के बढ़ते भाव के चलते भले ही इनको जीएसटी में लाने की मांग उठ रही हो लेकिन सरकार इन दोनों पेट्रोलियम उत्पादों से पहले एटीएफ और नेचुरल गैस को जीएसटी के दायरे में ला सकती है। माना जा रहा है कि जीएसटी काउंसिल आने वाले दिनों में इस दिशा में कदम उठा सकती है। ऐसा होने पर पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) और सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) कुछ सस्ती हो सकती है।GST के दायरे में आ सकती है नेचुरल गैस और एटीएफ

फिलहाल पांच पेट्रोलियम उत्पाद कच्चा तेल, डीजल, पेट्रोल, एटीएफ और नेचुरल गैस जीएसटी से बाहर हैं। जीएसटी काउंसिल को तय करना है कि इन पांचों उत्पादों पर कब से जीएसटी लगाया जाए। जीएसटी लागू करने के लिए संसद से पारित संविधान संशोधन 101वें अधिनियम में इसका स्पष्ट उल्लेख भी किया गया है।1सूत्रों ने कहा कि जो पांच पेट्रोलियम उत्पाद फिलहाल जीएसटी के दायरे से बाहर हैं, उनमें से एटीएफ और नेचुरल गैस को जीएसटी के दायरे में लाना आसान रहेगा। इसलिए इस संबंध में जल्द ही कदम उठाया जा सकता है।

केंद्र और राज्यों का बड़ा राजस्व पेट्रोल और डीजल से प्राप्त होता है, इसलिए इनको जीएसटी के दायरे में लाने से पहले काउंसिल में केंद्र और राज्यों के बीच व्यापक स्तर पर आम राय बनाने की जरूरत पड़ेगी। इन दोनों उत्पादों पर टैक्स (वैट व उत्पाद शुल्क जोड़कर) कीमत के लगभग बराबर बैठता है। इसलिए इन्हें जीएसटी के किस स्लैब में रखा जाए, यह तय करना भी मुश्किल होगा। दरअसल जीएसटी की अधिकतम स्लैब 28 प्रतिशत ही है जबकि पेट्रोल और डीजल पर केंद्र और राज्यों के करों की वर्तमान दर को जोड़ लें तो यह इससे काफी अधिक बैठती है। यही वजह है कि फिलहाल एटीएफ और नेचुरल गैस को ही जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार चल रहा है। हाल में केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्रलय ने भी एटीएफ को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग उठायी है। उल्लेखनीय है कि एटीएफ पर फिलहाल 14 प्रतिशत केंद्रीय उत्पाद शुल्क लगता है। वहीं अलग-अलग राज्यों में एटीएफ पर वैट की दर भिन्न-भिन्न है।

हालांकि लिक्विडीफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) पर आयात शुल्क ढाई प्रतिशत है जबकि इस पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क की दर शून्य है। वहीं सीएनजी पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क 14 प्रतिशत जबकि सीएनजी और पीएनजी पर वैट की दर विभिन्न राज्यों में अलग अलग है। कुछ राज्यों में सीएनजी पर पांच प्रतिशत वैट लगता है जबकि कुछ राज्यों में 15 प्रतिशत है। दिल्ली में पीएनजी पर वैट की दर पांच प्रतिशत है।

सूत्रों ने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नेचुरल गैस और एटीएफ को जीएसटी की किस स्लैब में रखा जाएगा। हालांकि इतना तय है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा मिलने से इनकी कीमतों पर सकारात्मक असर जरूरत पड़ सकता है

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