…तो इस कारण पंजाब के सरकारी कर्मचारी सड़क पर बैठ कर निपटाने लगे फाइलें

अमृतसर। शहर के मजीठा राेड क्षेत्र में अजीब नजारा था। यहां सड़क पर कार्यालय लगा हुआ था अौर कर्मचारी कुर्सी लगाकर और चादर व टाट बिछाकर बैठे फाइलें निपटा रहे थे। यह कर्मचारी बाल विकास प्रोजेक्ट कार्यालय के थे। ये लोग कार्यालय के बाहर सड़क के किनारे बैठकर रुटीन की फाइलें निपटा रहे थे। दरअसल वे सुबह जब कार्यालय में पहुंचे तो ताला लटका हुआ मिला। इसके बाद वे सड़क किनारे बैठ कर विभागीय कामकाज निपटाने लगे। दरअसल उनका कार्यालय ‘बेघर’ हो गया। मकान मालिक ने किराया न देने पर कार्यालय के गेट पर ताला जड़ दिया।...तो इस कारण पंजाब के सरकारी कर्मचारी सड़क पर बैठ कर निपटाने लगे फाइलें

किराये के मकान में चला रहा है बाल विकास प्रोजेक्ट कार्यालय, मकान मालिक ने गेट पर लगाया ताला

मजीठा रोड स्थित बाल विकास प्रोजेक्ट कार्यालय किराये की कोठी में चल रहा था। मकान मालिक ने इस कोठी पर ताला जड़कर स्टाफ को ‘बे कार्यालय’ कर दिया। सुबह जब ये कर्मचारी कार्यालय पहुंचे तो बाहर ताला लटका देख परेशान हो गए। कोठी मालिक को फोन किया तो जवाब मिला कि यह ताला उसने ही लगाया है और अब वह अपना बंदोबस्त कहीं और कर लें। इसके बाद कर्मचारियों ने उच्चाधिकारियों को मामले की जानकारी दी। एक घंटा बीतने के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला तो कर्मचारी अपने घरों से लाई फाइलें निकालकर सड़क के किनारे ही बैठ गए।

बाल विकास प्रोजेक्ट कार्यालय में कार्यरत सीडीपीओ सुमन बाला ने बताया कि जिला प्रशासन ने छह वर्ष पूर्व यह कोठी किराये पर ली थी। हर माह 7200 रुपये निर्धारित किराया मकान मालिक को दिया जाता है। कुछ समय पूर्व मकान मालिक की मौत हो गई। इसके बाद उसकी पत्नी ने कोठी खाली करने को कहा था। उसका तर्क था कि वह इस कोठी को बेचना चाहती है, इसलिए आप कोई अन्य इमारत किराये पर ले लें। सीडीपीओ सुमन बाला ने कहा, इस संबंध में हमने जिला प्रशासन को अवगत करवा दिया था, लेकिन हमें इमारत नहीं मिली।

सीडीपीओ सुमन बाला ने बताया कि यही कारण है कि मकान मालिक की पत्नी ने इस इमारत में ताला लगा दिया।ऐसे में हमें बाहर बैठकर विभागीय काम निपटाने पड़े। बाल विकास प्रोजेक्ट कार्यालय में बुढ़ापा, विधवा व दिव्यांग जनों की पेंशन लगाने की प्रक्रिया पूरी होती है। इसके अतिरिक्त अमृतसर 2 के अंतर्गत आने वाले आंगनबाड़ी सेंटरों का संचालन भी यही कार्यालय करता है। जनता से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े इस विभाग को छत न मिलने के कारण स्टाफ परेशान है। जाहिर सी बात है कि इससे काम भी प्रभावित हो रहा है।

सुमन बाला ने बताया कि वह इस कोठी का हर साल कांट्रेक्ट रिन्यू होता था। हम सभी नियमों व शर्तों को पूरा करके किराया समय पर दे रहे थे। मकान मालिक के कहने पर कोठी खाली करने की तैयारी कर चुके थे। ज्यादातर फाइलों को बोरियों में बंद कर दिया था, लेकिन नए कार्यालय न मिलने की वजह से यहीं काम कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि अचानक ताला लगाने के कारण विभागीय कामकाज बाहर निपटाना पड़ा और इससे कई कार्य प्रभावित हुए। दोपहर बाद डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम आॅफिसर हरजीत कौर के कहने पर उन्हें मजीठा रोड स्थित एक इमारत में शिफ्ट किया गया है। लेकिन, अभी हमारे दस्तावेज उसी कोठी में है, जिस पर ताला जड़ा हुआ है।

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