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भगवान शिव के साले कई युगों से बन्द है इस कैदखाने में, इसलिए देवी पार्वती ने स्वयं दिया था दण्ड

भगवान शिव और मां पार्वती के बारे में भक्तजन कई पौराणिक कथाएं सुनते आ रहे हैं.. लोग इनके पुत्र गणेश जी, कुमार कार्तिकेय के साथ साथ कैलाश पर रहने वाले नन्दी समेत शिवगणों के बारें में जानते और सुनते आ रहे हैं। देवी पार्वती के पिता हिमालय और मां देवी मैना के बारे में सब जानते हैं पर क्या आपने कभी देवी पार्वती के भाई और शिव जी के साले के बारे में सुना है … क्या आप जानते हैं कि देवी पार्वती के एक ऐसे भाई भी थें जो आज भी हिमालय की तलहटी के पहाड़ो में स्थित एक कैदखाने में बन्द हैं और इससे भी रोचक बात ये है कि इन्हें कैद का दण्ड भी स्वयं देवी पार्वती ने ही दिया था। हम आपकों बता रहे हैं इनके बारें में ..जानिए क्यों दी थी मां पार्वती ने इन्हे ऐसी सजा और कहां कैद हैं ये अभी भी।

एक मात्र ऐसे देवता हैं जिनके दर्शन पुजारी भी नहीं कर पाते

उत्तराखंड के एक देवता ऐसे हैं जो युगों से कैदखाने में बंद हैं.. कैदखाना ही इनका मंदिर है.. ये देवता हैं लाटू देवता।साल में सिर्फ एक बार वैशाख पूर्णिमा को कुछ घंटों के लिए मंदिर का द्वार खुलता है। यह एक मात्र ऐसे देवता हैं जिनके दर्शन पुजारी भी नहीं कर पाते हैं। क्योंकि मंदिर का द्वार खोलते समय पुजारी के आंखों पर पट्टी बंधी होती है। कैदखानें में बन्द ये देवता और कोई नही बल्कि शिव जी के साले हैं।

इस वजह से देवी पार्वती ने दिया था दण्ड

लाटू देवता के विषय में ऐसी कथा है कि देवी पार्वती के साथ जब भगवान शिव का विवाह हुआ तो पार्वती जी को विदा करने के लिए सभी भाई कैलाश की ओर चल पड़े। इसमें चचेरे भाई लाटू भी शामिल थे.. मार्ग में लाटू को इतनी प्यास लगी कि पानी के लिए इधर-उधर भटकते हुए घर के अंदर पहुंच गए। घर में एक बुजुर्ग था जिसने लाटू देवता से कहा कि कोने में मटका है पानी पी लो.. संयोग से वहां दो मटके रखे थे। लाटू देवता ने एक मटके को उठाया और पूरा का पूरा मटका खाली कर दिया।

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प्यास के कारण लाटू समझ नहीं पाए कि जिसे वह पानी समझकर पी गए वह पानी नहीं मदिरा था। कुछ देर में मदिरा ने असर दिखाना शुरु कर दिया और लाटू देवता नशे में उत्पात मचाने लगे। इसे देखकर देवी पार्वती क्रोधित हो गई और लाटू को कैद में डाल दिया। पार्वती ने आदेश दिया कि इन्हें हमेशा कैद में ही रखा जाए।

माना जाता है कि कैदखाने में लाटू देवता एक विशाल सांप के रुप में विरामान रहते हैं। इन्हें देखकर पुजारी डर न जाएं इसलिए यह आंखों पर पट्टी बांधकर मंदिर का द्वार खोलते हैं। उत्तराखण्ड में लाटू देवता के प्रति लोगों में बड़ी श्रद्धा है। ऐसी मान्यता है कि यहां मांगी मनोकामना जरुर पूरी होती है।

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