उत्तर प्रदेश के 414 थानों में अब तैनात होंगे चार इंस्पेक्टर

लखनऊ। प्रदेश पुलिस की बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए पुलिस अब कोतवाली में अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षकों की तैनाती के फार्मूले पर काम करेगी। डीजीपी ओपी सिंह ने गुरुवार को नई व्यवस्था का फैसला लेते हुए क्षेत्राधिकारी मुख्यालय के थानों में मुख्य प्रभारी निरीक्षक के अधीन तीन अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षक तैनात किए जाने का आदेश दिया।उत्तर प्रदेश के 414 थानों में अब तैनात होंगे चार इंस्पेक्टर

अब प्रदेश में क्षेत्राधिकारी मुख्यालय के 414 थानों में प्रशासन, अपराध व कानून-व्यवस्था के लिए अलग-अलग तीन अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षक पोस्ट होंगे। तीनों मुख्य प्रभारी निरीक्षक से जूनियर होंगे। डीजीपी ने अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षकों की तैनाती का आदेश देने के साथ ही सभी एडीजी जोन व आइजी रेंज को इस व्यवस्था का निकट पर्यवेक्षण करने का निर्देश भी दिया है। दिल्ली और मुंबई की तर्ज पर अब प्रदेश पुलिस ने भी इस तरह का प्रयोग किया है। यह पहला मौका है जब प्रदेश में इस प्रकार से थानों का वर्गीकरण किया गया है।

प्रदेश पुलिस में बीते दिनों हुई पदोन्नति के बाद निरीक्षकों की संख्या बढ़ गई है। इसके दृष्टिगत थानों पर दो अतिरिक्त निरीक्षकों के पद सृजित किए जाने की व्यवस्था पर मंथन हुआ था और योजना को अमली जामा पहनाने के लिए 31 मई को एडीजी तकनीकी सेवाएं आशुतोष पांडेय के नेतृत्व में एक कमेटी गठित की गई थी। कमेटी की सिफारिश पर प्रदेश के 414 थानों में अब मुख्य प्रभारी निरीक्षक के अधीन प्रशासन, कानून-व्यवस्था व अपराध की जिम्मेदारी संभालने के लिए तीन अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षक तैनात किए जाएंगे। डीआइजी कानून-व्यवस्था ने बताया कि डीजीपी मुख्यालय स्तर से एक कमेटी इस माडल का रिव्यू करेगी, जिसके बाद निरीक्षकों व पुलिस बल की उपलब्धता के अनुरूप इस व्यवस्था को प्रदेश के अन्य थानों में लागू किया जाएगा। 

ये होंगी जिम्मेदारियां

प्रभारी निरीक्षक (भार साधक अधिकारी)

  • तीनों अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षकों व एसएसआइ के कामों का पर्यवेक्षण।
  • सभी डाक को देखना। 
  • गंभीर अपराधों में घटनास्थल निरीक्षण, मुकदमा पंजीकरण व जघन्य अपराधों की विवेचना। 
  • मासिक सम्मेलन व वेलफेयर से संबंधित सभी काम। 
  • अधीनस्थों के अवकाश संबंधी प्रार्थनापत्रों का निस्तारण। 
  • जन सुनवाई। 
  • कोर्ट से जुड़ी कार्रवाई की जिम्मेदारी। 
  • मालखाने का प्रभार व महत्वपूर्ण अभिलेखों का रख रखाव। 
  • जघन्य अपराध, नक्सल व आतंकी गतिविधियों की अभिसूचना संकलन कर डेटाबेस तैयार कराना। 

अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षक (प्रशासन)

  • संपूर्ण प्रशासन, आंकिक कार्य व सभी प्रकार के सत्यापन। 
  • जीपी लिस्ट व थाने से जुड़े स्थापना कार्य। 
  • लोक शिकायत का निस्तारण व सभी प्रार्थनापत्रों का स्टाफ में आवंटन। 
  • मानव संसाधन प्रबंध व अनुशासन। 
  • थाने का बजट संबंधी कार्य। 
  • मालखाना, शस्त्रों, लाइब्रेरी व लॉकअप का रख रखाव। 
  • कोर्ट से संबंधित सम्मन, नोटिस व अन्य वैधानिक आदेशों का संपादन व उससे जुड़ी अनुपालन आख्या भेजने में भार साधक अधिकारी का सहयोग। 
  • जन सुनवाई में सहयोग। 
  • अपली/रिव्यू, रिट के मामले। 

अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षक (अपराध) 

  • अपराध से जुड़े सभी मामलों की जिम्मेदारी व उनसे जुड़ी रिपोर्ट भेजना। 
  • एफआइआर छोड़कर सीसीटीएनएस योजना के सभी कामों को देखना। 
  • अपराध व यूपी 100 की पाक्षिक/मासिक समीक्षा। 
  • चुनावी अपराधों की रोकथाम के लिए कार्ययोजना।
  • गंभीर अपराधों मका निरीक्षक व पीडि़त पक्ष को सुरक्षा प्रदान करना। विवेचना करना व करवाना। 
  • साइबर क्राइम की विवेचना। 
  • विवेचना से जुड़े सभी रजिस्टर व प्रमुख अभिलेखों का रख रखाव। 
  • अपराधियों की निगरानी व उनके डेजोयिर का रख रखाव। निरोधक कार्रवाई। 

अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षक (कानून-व्यवस्था)

  • थानाक्षेत्र से जुड़ी कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी। 
  • अपराध पर नियंत्रण के लिए विभिन्न ड्यूटियों पर पुलिस पार्टियों को भेजना। 
  • यातायात व्यवस्था, बीट पेट्रोलिंग व नाकाबंदी के बंदोबस्त। 
  • एंटी रोमियो स्क्वाड। 
  • प्राकृतिक आपदा, जुलूस-धरना प्रदर्शन, त्योहार व अन्य प्रमुख आयोजनों पर पुलिस का बंदोबस्त व अतिरिक्त पुलिस बल की मांग। 
  • ड्यूटी निर्धारण व नियमित चेकिंग। 
  • यूपी 100 की गाडिय़ों का प्रबंधन व रखरखाव। 

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