देश में पहली बार पहली बार जैव ईंधन से चलने वाले विमान ने देहरादून से भरी उड़ान, CM रावत ने दिखाई हरी झंडी

- in उत्तराखंड

देहरादून : देश में पहली बार जैव ईंधन से चलने वाले विमान ने देहरादून से उड़ान भरी। विमानन कंपनी स्पाइस जेट के टर्बोपोर्प क्यू 400 विमान को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को जौलीग्रांट एयरपोर्ट से फ्लैग ऑफ किया। इसके बाद विमान ने दिल्ली के लिए उड़ान भरी। यह उड़ान सफल रही।

दुनिया में पहले कहां उड़े जैव ईंधन विमान

– इस साल जनवरी में आस्ट्रेलियाई कैरियर क्वांटास के ड्रीमलाइनर बोइंग 787-9 विमान ने लॉस एंजिलिस और मेलबर्न के बीच उड़ान भरी था। 15 घंटे की उड़ान के लिए मिश्रित ईंधन का उपयोग किया गया था। इसमें 10 प्रतिशत जैव ईंधन मिलाया गया था। 

– साल 2011 में अलास्का एयरलाइंस ने जैव ईंधन से चलने वाले कुछ विमान शुरू किए थे जिसके ईंधन में 50 फीसद खाद्य तेल का इस्तेमाल किया गया था। 

– इसके साथ-साथ केएलएम ने भी साल 2013 में कुछ जैव ईंधन विमान न्यूयॉर्क और एम्सटर्डम में शुरू  किए थे।

भारत की मंशा

भारत तेल आयात पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। इसीलिए जैव ईंधन को प्रचारित करने की मंशा है। 10 अगस्त 2018 को जैव ईंधन दिवस के मौके पर दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति जारी की थी। इसमें आनेवाले चार सालों में एथेनॉल का उत्पादन तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। अगर ऐसा होता है तो तेल आयात के खर्च में 12 हजार करोड़ रुपये तक बचाए जा सकते हैं।

यह होगा फायदा

जैव ईंधन सब्जी के तेलों, रिसाइकल ग्रीस, काई, जानवरों के फैट आदि से बनता है। जीवाश्म ईंधन की जगह इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। दरअसल, एयरलाइंस इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आइएटीए) नामक ग्लोबल एसोसिएशन ने लक्ष्य रखा है कि उनकी इंडस्ट्री से पैदा होने वाले कॉर्बन को 2050 तक 50 फीसद कम किया जाए। एक अनुमान के मुताबिक, जैव ईंधन के इस्तेमाल से एविएशन क्षेत्र में उत्सर्जित होने वाले कार्बन को 80 फीसद तक कम किया जा सकता है।

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