चंडीगढ़ पीजीआइ में शुरू होंगे पांच नए कोर्स, रिसर्च के खुलेंगे नए द्वार

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चंडीगढ़। यहां पीजीआइ में पांच नए कोर्स जल्द शुरू करने पर मुहर लग गई है। प्रशासन ने इनसे संबंधित इनपुट लेकर कोर्स शुरू करने के लिए मंजूरी दे दी है। पीडियाट्रिक्स और एनेस्थिसिया में पांच नए कोर्स शुरू होंगे। पीडियाट्रिक विभाग में चार नए कोर्स शुरू होने हैं, जो स्पेशलाइज्ड  होंगे। इनके शुरू होने से बच्चों के इलाज में सुविधाएं तो बेहतर मिलेंगी ही, इसके अलावा रिसर्च को भी बढ़ावा मिलेगा।चंडीगढ़ पीजीआइ में शुरू होंगे पांच नए कोर्स, रिसर्च के खुलेंगे नए द्वार

हर कोर्स में 15 से ज्यादा सीटें होंगी। इसके अलावा इन कोर्स में फैलोशिप भी शुरू की जाएगी, जिसके लिए बाहर से भी आवेदन स्वीकृत होंगे। पीजीआइ की एकेडमिक बॉडी ने इसको अप्रवूल दे दी है। स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी की औपचारिक सहमति के लिए इसको भेज दिया गया है। इन कोर्स के शुरू होने से पड़ोसी राज्यों के डॉक्टर्स को भी फायदा होगा, क्योंकि वो भी यहां ट्रेनिंग लेने आएंगे। 

जेनेटिक्स इन पीडियाट्रिक्स और  पीडियाट्रिक पल्मनरी से इलाज में मदद

ये कोर्स शुरू होने से बच्चों से जुड़े इलाज के क्षेत्र में एक्सपर्ट तैयार होंगे। जेनेटिक्स इन पीडियाट्रिक्स कोर्स करने से डॉक्टर जन्म से ही आनुवांशिक कमियों और कमजोरी से ग्र्रस्त 12 साल तक बच्चों का इलाज बेहतर तरीके से कर पाएंगे। इसके अलावा पीडियाट्रिक पल्मनरी की पढ़ाई के बाद सांस रोगों से जूझ रहे बच्चों को स्पेशलाइज्ड ट्रीटमेंट मिलेगा ।

सीनियर डॉक्टर्स को कोर्स की सीट पर कन्वर्ट करेंगे

पीजीआइ प्रशासन फैसला किया है कि कोर्स की सीटों पर संस्थान के सीनियर डॉक्टर्स को ही कन्वर्ट करेंगे। वे साथ-साथ पढ़ाई करेंगे। संबंधित विभाग की सीनियर फैकल्टी उनको पढ़ाएगी। इसके चलते पीजीआइ पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। पीजीआइ में सीनियर डॉक्टर (एसआर) की मासिक सैलरी करीब 85 हजार है।

फैलोशिप के लिए बाहरी राज्यों के कैंडिडेट्स होंगे

इन कोर्स में फैलोशिप भी होगी। इसके लिए 12 से 15 सीटें निर्धारित होंगी। इसके लिए हिमाचल, हरियाणा, पंजाब समेत बाहरी राज्यों से इच्छुक कैंडिडेट्स के आवेदन मांगे जाएंगे। ये सीट स्पांस्ड होंगी। इनके लिए पीजीआइ अपनी तरफ से किसी को कोई भुगतान नहीं करेगा। संबंधित राज्य ही कैंडिडेट्स को फैलोशिप देंगे।

रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा

इसके अलावा रिसर्च को भी बढ़ावा मिलेगा। कैंडिडेट्स एकेडमिक्स के अलावा पीडियाट्रिक्स में रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम कर सकेंगे। इससे बीमारियों के ट्रीटमेंट में भी काफी फायदा मिलेगा। रिसर्च को एकेडमिक्स से जोडऩे पर फायदा मिलेगा।

सिलेबस को लेकर काम शुरू

सभी कोर्स के सिलेबस को लेकर काम शुरू हो चुका है। सभी विभागों की सीनियर फैकल्टी इस पर काम कर रही है। इसके अलावा डीन एकेडमिक्स और रिसर्च भी लगातार इस दिशा में लगे हैं कि जल्द से जल्द सिलेबस तैयार किया जाए। संभावना है कि इसको लेकर बाहरी संस्थानों के एक्सपर्ट की मदद ली जाए।

डॉक्टर्स को ट्रेनिंग भी दी जाएगी

कोर्स की पढ़ाई के दौरान बाहरी एक्सपट्र्स को ट्रेनिंग भी दी जाएगी । इससे अन्य राज्यों के एक्सपर्ट को संबंधित विषय में गहराई तक पढ़ाई करवाई जाएगी। वो यहां से ट्रेनिंग लेकर अपने राज्यों के मरीजों के इलाज में इसका फायदा ले सकेंगे।

इन कोर्सेज को मिली झंडी

-डीएम इन जेनेटिक्स इन पीडियाट्रिक्स।

-डीएम इन पीडियाट्रिक पल्मनरी। 

-डीएम इन पीडियाट्रिक एनेस्थिसिया।

-डीएम एन पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर।

-एमएससी इन एनेस्थिसिया।

” सभी कोर्स को एकेडमिक कमेटी ने पास कर दिया है। हर कोर्स में सीनियर डॉक्टर्स को कन्वर्ट किया जाएगा। इसके अलावा फैलोशिप की 10 से 15 सीटें होंगी, जोकि बाहरी राज्यों द्वारा स्पांस्र्ड होंगी।

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