फीफा विश्व कप को लेकर नए दावेदारों और पूर्व विजेता के बीच होगा कड़ा मुकाबला

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कौन बनेगा फीफा विश्व कप चैंपियन? इस सवाल का जवाब चार टीमों के में छुपा है। वे चार टीमें, जिन्होंने रूस विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह बना ली है। सेमीफाइनल की सेज सज चुकी है और बस इबारत लिखी जानी बाकी है।फीफा विश्व कप को लेकर नए दावेदारों और पूर्व विजेता के बीच होगा कड़ा मुकाबला
पहले अंतिम चार मुकाबले में 1998 का चैंपियन फ्रांस अब तक इस विश्व कप में अजेय बेल्जियम से टकराएगा तो दूसरे सेमीफाइनल में 1966 के विश्व विजेता इंग्लैंड की टक्कर छुपी रुस्तम क्रोएशिया से है। इन चारों टीमों की दावेदारी, हकीकत और आंकड़ों की जुबानी आपके सामने है। 
बेल्जियम का अब तक का सफर
ग्रुप दौर – पनामा को 3-0, ट्यूनीशिया को 5-2 और इंग्लैंड को 1-0 से हराया। 

नॉकआउट अंतिम 16 में जापान को 3-2 से हराया। क्वार्टरफाइनल में ब्राजील को 2-1 से मात दी।

बड़ा क्षण: दूसरे दौर में बेल्जियम जापान से 0-2 से पिछड़ रहा था, उसने विश्व कप इतिहास की यादगार वापसी कर मुकाबला 3-2 से जीता।

ताकत – मिडफील्डर केविन डि ब्रूइन प्लेमेकिंग में माहिर और खुद गोल करने की क्षमता। रोमेलु लुकाकू हर से गोल कर रहे हैं और गोल में सहायता कर रहे हैं।

कमजोरी – मैनचेस्टर सिटी के विंसेंट कंपनी चोट के बाद खेलने उतरे हैं, लेकिन यह बड़ा खिलाड़ी अब तक रंग में नहीं दिखा है।

कोच – रॉबर्टो मार्टिनेज – अब तक रेड डेविल्स ने अपने ही देश के कोच पर भरोसा किया है। विश्व कप में 1954 के बाद से मार्टिनेज बेल्जियम के पहले स्पेनिश कोच हैं। मार्टिनेज रणनीत बदलने में माहिर हैं। उनकी ब्राजील के खिलाफ 3-4-3 की रणनीति एकदम खरी बैठी। 

– 1986 में अर्जेंटीना से हारा बेल्जियम। बेल्जियम के लिए 9 अलग गोल स्कोर रहे हैं। 2006 में इटली और 2010 में फ्रांस के 10 खिलाड़ियों ने गोल किए थे।

– 14 सर्वाधिक गोल करने वाली टीम है बेल्जियम में। आत्मघाती गोल का सहारा मिला है। 

फ्रांस का अब तक का सफर

ग्रुप दौर – ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से, पेरू को 1-0 से हराया। डेनमार्क से गोलरहित ड्रॉ।

नॉकआउट अंतिम 16 में अर्जेंटीना को 4-3 से परास्त किया। क्वार्टरफाइनल में उरुग्वे को 2-0 से हराया।

मबापे ने टीम की ओर से इस विश्व कप में किए 3 गोल। एंटोनी ग्रीजमैन ने चार मैच में दो गोल दागे। 

ताकत – ग्रुप दौर के बाद नॉकआउट में मिडफील्ड और अग्रिम पंक्ति जबरदस्त फॉर्म में हैं। मबापे और ग्रीजमैन ने दिखाई ताकत। हालांकि, ओलिवर जिरू पर अंगुलियां उठ रही हैं, लेकिन उन्होंने भी गोल करने में सहायता की है।

कमजोरी – सभी खिलाड़ी अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह निभा रहे हैं, लेकिन मैनचेस्टर यूनाइटेड के लिए खेलने वाले पॉल पोग्बा अब तक उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक गोल किया था।

कोच – डिडिएर डेशचैंप – लगातार दूसरे विश्व कप में फ्रांस के कोच हैं। 1998 में विश्व विजेता बनी टीम के कप्तान रह चुके हैं। विश्व कप में बतौर कोच यह उनका रिकॉर्ड 11 मैच होगा। ज्यादा नहीं चलने के बावजूद दिखा रहे हैं पोग्बा पर भरोसा।

फैक्ट – विश्व कप में दो मैच फ्रांस ने 1938, 1986 में बेल्जियम से जीते हैं।

खास-खास

– 32 साल पहले दोनों देश फ्रांस और बेल्जियम सेमीफाइनल में पहुंचे थे। तब फ्रांस ने ब्राजील को अंतिम आठ में हराया। दोनों टीम तीसरे और चौथे स्थान के लिए भिड़ीं, जिसमें फ्रांस को बेल्जियम पर 4-2 से जीत मिली।

– 1998 में विश्व चैंपियन बनने वाली फ्रांस टीम के सदस्य थिएरा हेनरी वर्तमान में बेल्जियम टीम के सहायक कोच हैं। बेल्जियम कैंप में हेनरी की मौजूदगी फ्रांस के लिए बड़ा झटका साबित हो सकी है। वह फ्रांस की फुटबॉल की रग-रग से वाकिफ हैं।

इंग्लैंड का अब तक का सफर

ग्रुप दौर – ट्यूनीशिया को 2-1 से, पनामा को 6-1 से हराया। बेल्जियम के हाथों 0-1 की शिकस्त झेली।

नॉकआउट में अंतिम-16 में कोलंबिया के खिलाफ 1-1 से बराबरी के बाद शूटआउट से जीता मुकाबला। क्वार्टरफाइनल में स्वीडन को 2-0 से हराया।

सबसे बड़ा क्षण – कोलंबिया के खिलाफ जॉर्डन पिकफोर्ड ने शूटआउट के दौरान बाक्के की पेनल्टी रोक रचा इतिहास। विश्व कप में पहली बार शूटआउट में जीता इंग्लैंड।

ताकत – कप्तान हैरी केन ने उदाहरण के साथ टीम को अब तक लीड किया है। खुद गोल किए और दूसरों को प्रेरित किया। लंबे समय बाद इंग्लिश टीम ने कुछ करने की भूख दिख रही है।

कमजोरी – अंग्रिम पंक्ति में कोच गैरेथ साउथगेट के लिए रहीम स्टर्लिंग की फॉर्म चिंता का विषय है। स्टर्लिंग ने लंबे समय से गोल नहीं किया है। चार मैचों में उन्होंने सिर्फ असिस्ट किया है।

कोच – गैरेथ साउथगेट – उन्होंने युवा टीम को बखूबी प्रेरित किया है। बेल्जियम के खिलाफ महत्वहीन मुकाबलों को छोड़ दें तो उन्होंने परिणाम भी बेहतर दिए हैं। वह खुद इंग्लैंड के लिए लंबे समय तक खेल चुके हैं। 

स्टार खिलाड़ी – हैरी केन ने चार मैचों में 6 गोल दागे हैं। उन्होंने कुल 363 मिनट खेला। गोल पर 10 बार प्रयास किया। 6 बार लक्ष्य पर निशाना साधा। कुल 88 पास किए।

फैक्ट – 6 गोल करने वाले हैरी केन अगर एक और गोल कर देंगे तो 1986 में छह गोल कर गोल्डन बूट जीतने वाले गैरी लिनेकर का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। केन ने तीन गोल पेनल्टी किक पर किए हैं। उनके नाम एक हैट्रिक भी दर्ज है।

क्रोएशिया का अब तक का सफर

ग्रुप दौर – नाइजीरिया को 2-0 से, अर्जेंटीनो को 3-0 से और आइसलैंड को 2-1 से मात दी।

नॉकआउट अंतिम 16 में डेनमार्क को 1-1 की बराबरी के बाद शूटआउट में हराया। क्वार्टरफाइनल में मेजबान रूस को 2-2 के बाद शूटआउट में हराया। 

सबसे बड़ा क्षण – इस देश ने ग्रुप दौर में जबरदस्त ताकत दिखाई और अपने तीनों मुकाबले जीते।

ताकत – पूरी टीम मैदान पर योगदान देने को आतुर है। इसका उदाहरण आठ खिलाड़ियों का टीम के लिए 10 गोल करना है। 

कमजोरी – शानदार ग्रुप दौर के बाद क्रोएशिया ने रक्षण की चूक से नॉकआउट में शुरुआत में ही गोल खाए हैं। इंग्लैंड के खिलाफ उसे शुरुआती गोल की भूल से बचने की जरूरत है।

कोच – ज्लाट्को दालिच – उन्होंने टीम को मुश्किल समय में संभाला है। जब विश्व कप में क्रोएशिया की क्वालिफाई करने की उम्मीदें लगभग खत्म होने वाली थीं तब उन्होंने उक्रेन के खिलाफ जीत दिलाई और प्लेऑफ में पहुंचाया। 

स्टार खिलाड़ी – मोड्रिक ने पांच मैचों में दो गोल किए हैं। इंग्लैंड के खिलाफ क्रोएशिया को उनसे करिश्माई प्रदर्शन की उम्मीद होगी।

खास-खास

– 1998 विश्व कप में क्रोएशिया के डेवर सुकेर को 6 गोल करने के लिए गोल्डन बूट मिला था। आज यही सूकेर क्रोएशियाई फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं और टीम का हौसला बढ़ाने के लिए रूस में मौजूद हैं। सुकेर इस क्रोएशियाई टीम की प्रेरणा हैं।

– 20 साल बाद क्रोएशिया की टीम विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंची है। फ्रांस से हारने के बाद उसने तीसरे स्थान के मुकाबले में नीदरलैंड्स को हराया था।

– दो पेनल्टी शूटआउट में जीत के साथ क्रोएशियाई टीम के गोलकीपर सुबासिच हीरो बन गए हैं। इंग्लैंड के खिलफ वह सभी की निगाहों में रहेंगे।

– इंग्लैंड टीम ने विश्व कप में 11 गोल  कर 1966 के विश्व कप में अपने प्रदर्शन की बराबरी की है।

सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन विश्व कप में 

1966 में विश्व कप का चैंपियन रहा था इंग्लैंड। क्रोएशिया की टीम 1998 में तीसरे स्थान पर रही। दोनों ही टीमें 2014 विश्व कप के पहले दौर में बाहर हुईं।

हेड टू हेड

कुल सात मैच में इंग्लैंड ने चार जीते जबकि क्रोएशिया ने दो। एक मैच ड्रॉ रहा। विश्व कप में दोनों के बीच पहली बार मुकाबला होगा। अंतिम बार 2009 विश्व कप क्वालिफाइंग के दौरान दोनों टीमें टकराईं, जिसमें इंग्लैंड को 5-1 से जीत मिली।

2018 विश्व कप में इंग्लैंड और क्रोएशिया का प्रदर्शन

विश्व रैंकिंग – इंग्लैंड 12वें नंबर पर, क्रोएशिया की रैंकिंग 20।
मैच – दोनों टीमों ने पांच-पांच मैच खेले अब तक।
गोल- इंग्लैंड ने 11 गोल किए जबकि क्रोएशिया ने 10 गोल दागे।
गोल पर निशाने – इंग्लैंड ने 70 निशाने गोल पर दागे जबकि क्रोएशिया की फेहरिस्त 78 पर पहुंची।
लक्ष्य पर निशाने – इंग्लैंड ने 21, क्रोएशिया ने 19।
पीला कार्ड – इंग्लैंड के खाते में 5 जबकि क्रोएशिया के खाते में 12 आए।

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