आठ महीने बाद 77 स्थानों पर यातायात होगा सुचारु: AAP सरकार

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को जाम वाले 77 स्थानों से यातायात के सुचारु संचालन में आने वाली बाधाएं हटाने के लिए समयसीमा की जानकारी दी। दिल्ली सरकार ने बताया कि सड़कों की संरचना में मामूली सुधार जैसे अल्पकालिक उपायों में छह से आठ महीने का समय लगेगा। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में दिल्ली सरकार ने बताया कि सुचारु यातायात संचालन में आ रहीं बाधाएं हटाने के उपायों को उसने ‘अल्पकालिक’ और ‘दीर्घकालिक’ में विभाजित किया है। साथ ही सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में यातायात जाम की वजहों को भी बताया है।आठ महीने बाद 77 स्थानों पर यातायात होगा सुचारु: AAP सरकार

दिल्ली सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता वसीम ए. कादरी ने जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ के समक्ष पेश हलफनामे में बताया कि दीर्घकालिक उपायों के तहत सबवे, फुट ओवर ब्रिज, अंडरपास और यू-टर्न निर्माण की योजना और उसके लागत अनुमानों की मंजूरी में छह महीने का समय लगेगा। उसके बाद उसके निर्माण में 12 और महीनों का वक्त लगेगा। दिल्ली सरकार ने बताया कि उसने जाम वाले 77 स्थानों को तीन वर्गो में विभाजित किया है। इनमें 28 भीषण जाम वाले स्थानों को ‘ए’ वर्ग में, जाम वाले 30 स्थानों को ‘बी’ वर्ग में और कम जाम वाले 19 स्थानों को ‘सी’ वर्ग में रखा है।

राज्य सरकार ने बताया कि दिल्ली यातायात पुलिस ने जाम की समस्या के लिए कई कारणों की पहचान की है। इनमें सड़कों और फुटपाथों पर अतिक्रमण, सड़कों पर अवैध पार्किग, सड़कों की कम चौड़ाई, पैदल चलने वालों का बेतरतीब आवागमन और चौराहों का गलत डिजायन शामिल हैं। इनके अलावा पेट्रोल पंपों और सीएनजी स्टेशनों पर लगने वाली लाइनें; सड़कों पर पेड़ों, टॉयलेट और अन्य ढांचों की मौजूदगी; फुट ओवर ब्रिज, सबवे, जेब्रा क्रॉसिंग, यू-टर्न और अंडरपास की अनुपलब्धता को भी जाम का कारण बताया गया है।

एक हजार इलेक्टिक बसों की खरीद को सैद्धांतिक मंजूरी

दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे में बताया है कि राज्य मंत्रिमंडल ने 1,000 लो-फ्लोर इलेक्टिक बसों की खरीद को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है। उनके यहां जून-जुलाई, 2019 में पहुंच जाने की उम्मीद है। सरकार ने बताया कि वह हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली बसों के इस्तेमाल पर भी विचार कर रही है। इन्हें सीएनजी या इलेक्टिक वाहनों के मुकाबले ज्यादा किफायती माना जाता है।

दिल्ली को 11 हजार बसों की है जरूरत

दिल्ली सरकार सार्वजनिक परिवहन की गंभीर समस्या से जूझ रही है। सरकार ने हलफनामे में बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में सिर्फ 5,554 बसें दौड़ रही हैं जबकि जरूरत 11 हजार बसों की है। इस बेड़े को बढ़ाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन डिपो के लिए जमीन की अनुपलब्धता और दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) द्वारा बसों को हासिल करने के लिए टेंडरों की बार-बार असफलता की वजह से इसमें बाधा पड़ती रही है।

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