इन बड़ी चुनौतियों के चलते पतंजलि की ग्रोथ पर लग सकता है ब्रेक

बाबा रामदेव की पतंजलि लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ रही है। इसने देश के फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स यानी एफएमसीजी सेक्टर में हलचल पैदा की है और इस सेक्टर की हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) और प्रॉक्टर एंड गैंबल (P&G) जैसी दिग्गज कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। पतंजलि की आमदनी वित्त वर्ष 2012 में 500 करोड़ रुपये से कम थी, जो वित्त वर्ष 2016 में बढ़कर 10,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। कंपनी का अगला लक्ष्य 20,000 करोड़ रुपये की आमदनी हासिल करना है। इन बड़ी चुनौतियों के चलते पतंजलि की ग्रोथ पर लग सकता है ब्रेक

कंपनी का पिछला रिकॉर्ड शानदार रहा है। इसलिए नए लक्ष्य तक पहुंचने के उसके दमखम पर शक करना मुश्किल है, लेकिन अगर आप जमीनी हकीकत देखें तो स्थिति कुछ अलग नजर आती है। बाबा रामदेव का कारोबार लालच के जाल में फंस रहा है। इससे कंपनी को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले इसके डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क की ताकत घट रही है। पतंजलि की सफलता में इसके कम लागत वाले डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम का बड़ा रोल रहा है। इससे वह अपनी ताकतवर प्रतिद्वंद्वियों को टक्कर दे पाई है। हालांकि, अब इस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम की नींव पर काफी दबाव है। 

नए डिस्ट्रिब्यूटर्स की तलाश में पतंजलि, पुरानी चेन पर है दबाव 
इकनॉमिक टाइम्स प्राइम ने पतंजलि के सहयोगियों से बातचीत में पाया कि कंपनी बिक्री बढ़ाने के लिए लगातार नए डिस्ट्रिब्यूटर्स और ट्रेड के नए चैनल्स की तलाश कर रही है। इसका खामियाजा इसके पुराने डिस्ट्रिब्यूटर्स को उठाना पड़ रहा है। इस बारे में पतंजलि आयुर्वेद और इसके प्रवक्ता एस.के. तिजारावाला को भेजे गए सवालों का जवाब नहीं मिला। पतंजलि ने कारोबार की शुरुआत अपने चिकित्सालयों के जरिए बिक्री से की थी। टाटा स्ट्रैटेजिक मैनेजमेंट ग्रुप (TSMG) के हेड (रिटेल एंड कंज्यूमर प्रैक्टिस), पंकज गुप्ता का कहना है कि बाबा रामदेव के व्यक्तिगत आकर्षण से पतंजलि को ग्राहकों का विश्वास जीतने में मदद मिली। 

पतंजलि चिकित्सालयों की बिक्री घटी, डिस्ट्रिब्यूटर्स बढ़े 

TSMG के गुप्ता ने बताया कि चिकित्सालयों की सफलता से इस रुकावट को दूर करने और जनरल ट्रेड को कम मार्जिन पर कंपनी के साथ जोड़ने में मदद मिली। पतंजलि ने हाल के वर्षों में मार्केटिंग पर काफी जोर दिया है और कंपनी के रिटेलर्स और डिस्ट्रिब्यूटर्स की संख्या भी बहुत अधिक बढ़ गई है। हालांकि, शुरुआती दौर में कंपनी का साथ देने वाले चिकित्सालयों की बिक्री अब काफी घट गई है। मुंबई के एक उपनगर में चिकित्सालय चलाने वाले एक व्यक्ति ने बताया, ‘बाबाजी चाहते हैं उनके प्रॉडक्ट्स अधिक नजर आएं। किराना स्टोर अन्य प्रॉडक्ट्स भी बेच सकते हैं, लेकिन हम केवल पतंजलि के प्रॉडक्ट्स बेचने के लिए बाध्य हैं। किराना स्टोर प्रॉडक्ट्स पर अपनी मर्जी से डिस्काउंट दे सकते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं कर सकते।’ 

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