Down Syndrome Day: जानिए क्या होता है डाउन सिंड्रोम, जानें लें इसके लक्षण

डाउन सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चा मानसिक और शारिरिक विकारों से झूझता है. डाउन सिंड्रोम में बच्चा अपने 21वें गुणसूत्र की एक्स्ट्रा कॉपी के साथ पैदा होता है. इसलिए इसे ट्राइसॉमी-2 भी कहा जाता है. यह एक जेनेटिक डिसॉर्डर (आनुवांशिक विकार) भी है. यह बच्चे के शारीरिक विकास में देरी, चेहरे की विशेषताओं में फर्क और बौद्धिक विकास में देरी का कारण बनता है.

रिप्रोडक्शन (प्रजनन) के समय माता (xx) और पिता (xy) दोनों के क्रोमोसोम बच्चे तक पहुंचते हैं. इसमें कुल 46 क्रोमोसोम में से 23 माता के और 23 पिता से बच्चे को मिलते हैं. जब माता-पिता दोनों के क्रोमोसोम आपस में मिलते हैं तो उनमें से 21वें क्रोमोसोम का डिविजन नहीं हो पाता है. इस कारण 21वां क्रोमोसोम अपनी एक्ट्रा कॉपी बना देता है. इसी को ट्राइसॉमी-2 कहते हैं. यह एक्ट्रा क्रोमोसोम बच्चे में कई तरह के शारीरिक और मानसिक विकार पैदा करता है. नेशनल डाउन सिंड्रोम सोसायटी (एनडीएसएस) के अनुसार, अमेरिका में 700 बच्चों में से 1 बच्चा डाउन सिंड्रोम से पीड़ित होता है. अमेरिका में डाउन सिंड्रोम सबसे ज्यादा होने वाला आनुवांशिक विकार है.

ट्राईसॉमी– प्रत्येक कोशिका में गुणसूत्र 21 की एक एक्स्ट्रा कॉपी ही ट्राइसॉमी 21 कहलाती है. यह डाउन सिंड्रोम का सबसे आम रूप है.

मोजेक डाउन सिंड्रोम– मोजेक डाउन सिंड्रोम तब होता है, जब किसी व्यक्ति के शरीर में कोशिकाओं के 2 या इससे अधिक आनुवंशिक रूप से भिन्न सेट होते हैं.

ट्रांसलोकेशन- इस प्रकार के डाउन सिंड्रोम में 46 कुल क्रोमोसोम में से बच्चों के पास क्रोमोसोम 21 का केवल एक अतिरिक्त हिस्सा होता है.

आमतौर पर जन्म के समय डाउन सिंड्रोम वाले शिशुओं में कुछ विशिष्ट लक्षण होते हैं. फ्लैट चेहरा, बादाम शेप आंखें, उभरी हुई जीब, हाथों में लकीरें, सिर, कान, उंगलियां छोटी-चौड़ी होती हैं. बच्चों का कद छोटा होता है.

इस बीमारी से पीड़ित बच्चे सामान्य बच्चों से अलग व्यवहार करते हैं. इन बच्चों का मानसिक और सामाजिक विकास दूसरे बच्चों की तुलना में देरी से होता है. ऐसे बच्चे बिना सोचे-समझे खराब निर्णय ले लेते हैं. एकाग्रता की कमी होने के कारण डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चे में सीखने की क्षमता भी कम होती है.

अक्सर डाउन सिंड्रोम से पीड़ित लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. जन्मजात हृदय दोष, बहरापन, कमजोर आंखें, मोतियाबिंद, ल्यूकीमिया, कब्ज, स्लीप, नींद के दौरान सांस लेने में दिक्कत, दिमागी समस्याएं, हाइपोथायरायडिज्म, मोटापा, दांतों के विकास में देरी आदि इनमें शामिल हैं. डाउन सिंड्रोम वाले लोगों को भी संक्रमण का खतरा अधिक होता है. वे रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन, यूरीनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन और स्किन इन्फेक्शन से जूझ सकते हैं.

डाउन सिंड्रोम का कोई इलाज नहीं है. लेकिन विभिन्न प्रकार के समर्थन और शैक्षिक कार्यक्रम हैं जो इससे पीड़ित लोगों को समझने में और उनके परिवार की मदद करने में सक्षम हैं. एनडीएसएस (राष्ट्रीय डाउन सिंड्रोम समाज) में 300 से अधिक स्थानीय डाउन सिंड्रोम संगठन हैं, जो अपने स्थानीय क्षेत्र में डाउन सिंड्रोम से पीड़ित लोगों को बेहतर सेवा देने में मदद करते हैं.

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