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क्या आप जानते हैं रक्षा कलावा बांधने का सही नियम

हाथ में रंग बिरंगे धागे बांधने का मानो फैशन सा चल पड़ा है। अकसर मंदिरों में ये धागे बांधने वाले पंडित खड़े रहते है या फिर घर पर किसी खास पूजा के दौरान ये बांधे जाते है। लाल धागे वैसे हम मौली भी कहते है। लेकिन ये पतला लाल धागा बहुत कम लोग जानते है कि ये हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा पैदा करता है। हाथ में धागा अगर अपनी परेशानी या इष्ट देवता के हिसाब से बांधा जाएं तो इसके कई अच्छे परिणाम होते है।क्या आप जानते हैं रक्षा कलावा बांधने का सही नियम

लेकिन, गलती से ये धागा बिना मतलब या बिना समय के बांधा तो ये खतरनाक भी हो सकता है। ये हमारी रक्षा करता है इसलिए इसे रक्षासूत्र भी कहते है। लेकिन ये तभी रक्षा करेगा जब सही वक्त पर ये बांधा हो।

हमारे शास्त्रों में इसकी पूरी जानकारी है – ज्योतिष में रक्षासूत्र का महत्व है। इसलिए अगर हाथ पर धागा बांध रहें है तो पूरी विधि विधान के साथ बांधें। तो ही इसका पूरा लाभ आपको मिलेगा।

किस ग्रह और देवता के लिए कौन सा रक्षासूत्र-

शनि – शनि की कृपा के लिए नीले रंग का सूती धागा बांधना चाहिए।

बुध – बुध के लिए हरे रंग का सॉफ्ट धागा बांधना चाहिए।

गुरु और विष्णु – गुरु के लिए हाथ में पीले रंग का रेशमी धागा बांधना चाहिए।

शुक्र और लक्ष्मी – शुक्र या लक्ष्मी की कृपा के लिए सफेद रेशमी धागा बांधना चाहिए।

चंद्र और शिव – शिव की कृपा या चंद्र के अच्छे प्रभाव के लिए भी सफेद धागा बांधना चाहिए।

राहु-केतु और भैरव – राहु-केतु और भैरव की कृपा के लिए काले रंग का धागा बांधना चाहिए।

मंगल और हनुमान – भगवान हनुमान या मंगल ग्रह की कृपा के लिए लाल रंग का धागा हाथ में बांधना चाहिए।

कैसे बांधा मंदिर का लाल धागा जिसका मिलेगा सही फल-

जिस भी देवता या ग्रह के शुभफल के लिए धागा बांधना है, उसके लिए उसी वार को मंदिर जाएं। वैसे आप धागा पहले से लेकर रख सकते है। भगवान की मूर्ति की पूजा करें, प्रसाद चढ़ाएं फिर उस धागे को भगवान के पास छू जाएं ऐसा रख दें।मंदिर में पंडित से ही उस धागे को अपने सीधे हाथ में बंधवाएं। इसके लिए 11 या 21 रुपए पंडित को दक्षिणा भी दें। इस तरह बांधा गया धागा आपको काफी लाभ देगा। आपके लिए ये सुरक्षा का घेरा तैयार करेगा।

आखिर मंदिर का लाल धागा मौली यानि कलावा क्यों बांधते हैं? आखिर इसकी वजह क्या है औऱ इसके पीछे की कहानी क्या है?  

रक्षा सूत्र का महत्व 

ऐसा माना जाता है कि असुरों के दानवीर राजा बलि की अमरता के लिए भगवान वामन ने उनकी कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधा था। इसे रक्षाबंधन का भी प्रतीक माना जाता है। देवी लक्ष्मी ने राजा बलि के हाथों में अपने पति की रक्षा के लिए ये बंधन बांधा था।

मौली का अर्थ

‘मौली’ का शाब्दिक अर्थ है ‘सबसे ऊपर’. मौली का तात्पर्य सिर से भी है। मौली को कलाई में बांधने के कारण इसे कलावा भी कहते हैं। इसका वैदिक नाम उप मणिबंध भी है। शंकर भगवान के सिर पर चन्द्रमा विराजमान हैं, इसीलिए उन्हें चंद्रमौली भी कहा जाता है।

कैसे बनता है ये रक्षासूत्र

मौली कच्चे धागे से बनाई जाती है। इसमें मूलत: 3 रंग के धागे होते हैं- लाल, पीला और हरा, लेकिन कभी-कभी ये 5 धागों की भी बनती है , जिसमें नीला और सफेद भी होता है। 3 और 5 का मतलब कभी त्रिदेव के नाम की, तो कभी पंचदेव।

कहां-कहां बांधते हैं मौली 

मौली को हाथ की कलाई, गले और कमर में बांधा जाता है।मन्नत के लिए किसी देवी-देवता के स्थान पर भी बांधा जाता है।मन्नत पूरी हो जाने पर इसे खोल दिया जाता है।

मौली बांधने के नियम पर ध्यान दें

– पुरुषों और अविवाहित कन्याओं को दाएं हाथ में कलावा बांधना चाहिए।

– विवाहित स्त्रियों के लिए बाएं हाथ में कलावा बांधने का नियम है।

– जिस हाथ में कलावा बंधवा रहे हों, उसकी मुट्ठी बंधी होनी चाहिए। दूसरा हाथ सिर पर होना चाहिए।

– मौली कहीं पर भी बांधें, एक बात का हमेशा ध्यान रहे कि इस सूत्र को केवल 3 बार ही लपेटना चाहिए।

मौली करती है रक्षा 

मौली को कलाई में बांधने पर कलावा या उप मणिबंध कहते हैं।हाथ के मूल में 3 रेखाएं होती हैं जिनको मणिबंध कहते हैं।भाग्य और जीवनरेखा का उद्गम स्थल भी मणिबंध ही है। इन मणिबंधों के नाम शिव, विष्णु और ब्रह्मा हैं। इसी तरह शक्ति, लक्ष्मी और सरस्वती का भी यहां साक्षात वास रहता है। जब कलावा का मंत्र रक्षा हेतु पढ़कर कलाई में बांधते हैं तो ये तीन धागों का सूत्र त्रिदेवों और त्रिशक्तियों को समर्पित हो जाता है, जिससे रक्षा-सूत्र धारण करने वाले प्राणी की सब प्रकार से रक्षा होती है>

क्‍या कहते हैं शास्‍त्र 

शास्त्रों का ऐसा मत है कि मौली बांधने से त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु, महेश और तीनों देवियों- लक्ष्मी, पार्वती और सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है.

मंदिर का लाल धागा – वैसे मौली का चिकित्सीय पक्ष भी है… कलाई, पैर, कमर और गले में मौली बांधने के चिकित्सीय लाभ भी हैं। शरीर विज्ञान के अनुसार इससे त्रिदोष यानि वात, पित्त और कफ का संतुलन बना रहता है। ब्लड प्रेशर, हार्टअटैक, डायबिटीज और लकवा जैसे रोगों से बचाव के लिए मौली बांधना हितकर बताया गया है।

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