नसों में चोट लगने के बाद न करें ये 5 काम, हो सकता है भारी नुकसान

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शरीर के सभी अंगों में स्वच्छ रक्त और ऑक्सीजन की निरंतर आपूर्ति करने वाली धमनियों (आर्टरीज) में लगी चोट हाथ या पैर खोने का कारण बन सकती हैं। देश में लोगों और यहां तक कि कुछ डॉक्टरों में भी धमनियों की चोटों के प्रति समुचित जानकारी का अभाव है। एक अनुमान के मुताबिक देश में धमनी की चोटों से ग्रस्त लगभग 50 प्रतिशत लोग लापरवाही और उचित इलाज के अभाव में अपने हाथ या पैर गंवा बैठते हैं, जबकि विकसित देशों में धमनी की चोट के कारण हाथ या पैर गंवाने के मुश्किल से चार प्रतिशत मामले होते हैं।

कारणनसों में चोट लगने के बाद न करें ये 5 काम, हो सकता है भारी नुकसान

सड़क दुर्घटनाओं, चाकू और तलवार जैसे धारदार हथियारों से चोट लगने और गोली, बारूद या अन्य विस्फोटकों से गहरा जख्म हो जाने पर कई बार खून की धमनियां आर-पार पूरी तरह फट जाती हैं। इस वजह से भयंकर रक्तस्राव होता है, जिससे शरीर में रक्त की कमी हो जाती है। इसके अलावा धमनियों के फटने से दूसरे अंगों में खून की आपूर्ति भी बंद हो जाती है। ऐसी स्थिति में मरीज को ब्लड बैंक के अलावा एंजियोग्राफी जैसी अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित अस्पताल में वैस्क्युलर या कार्डियोवैस्क्युलर सर्जन की निगरानी में तत्काल ऑपरेशन करवाना जरूरी होता है, अन्यथा मरीज के हाथ या पैर काटने पड़ सकते हैं। कई बार मौत भी हो सकती है।

हड्डी का फ्रैक्चर और धमनी दुर्घटनाओं में हाथ या पैर की हड्डियों में फ्रैक्चर होने पर आम तौर पर अनेक अस्थि व जोड़ रोग विशेषज्ञ धमनियों में लगी चोट की अनदेखी कर देते हैं। अस्थि विशेषज्ञ अपना ज्यादा ध्यान फ्रैक्चर पर लगाते हैं। इससे धमनियों में लगी चोट के इलाज में देरी होती है और चोटग्रस्त धमनियां इतनी अधिक खराब हो जाती हैं कि ऑपरेशन के भी सफल होने की संभावना कम हो जाती है। इसलिए दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्थि चिकित्सक के अलावा वैस्क्युलर सर्जन को भी दिखाना चाहिए ताकि धमनियों की चोट का सही समय पर समुचित इलाज हो सके।

फ्रैक्चर जुडऩे के बाद पैर या हाथ में झनझनाहट या दर्द धमनियों में चोट का संकेत हो सकते हैं और ऐसी अवस्था में मरीज को वैस्क्युलर सर्जन से निश्चित तौर पर परामर्श करना चाहिए। कई बार चोटिल धमनी की दीवार कमजोर होने के कारण ट्यूमर बन जाता है। इसे वैस्क्युलर एन्युरिज्म कहा जाता है।

गलत तरीके से इंजेक्शन देना

गलत तरीके से दिया जाने वाला इंट्रावेनस इंजेक्शन भी विकलांगता का बहुत बड़ा कारण है। अक्सर देखने में आता है कि अकुशल और अप्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी लापरवाही के कारण इंट्रावेनस इंजेक्शन रक्त की शिराओं (वेन्स) में लगाने के बजाय इसे धमनी (आर्टरी) में लगा देते हैं। ऐसी अवस्था में हाथ या पैर की अंगुलियों में तेज दर्द होता है और झनझनाहट होती है। धीरे-धीरे हाथ व पैर की अंगुलियां काली पडऩे लगती हैं। बाद में पूरा हाथ काला पड़ जाता है। ऐसे में मरीज की जान बचाने के लिए हाथ को काटकर अलग करना पड़ता है।

इसलिए हमेशा खून की नस में लगाए जाने वाले इंट्रावेनस इंजेक्शन कभी कोहनी (एल्बो) पर नहीं लगाना चाहिए। यह इंजेक्शन हाथ, कलाई के बालों वाले क्षेत्र में लगाना चाहिए, क्योंकि यह जगह सुरक्षित है, जहां पर इंट्रावेनस इंजेक्शन के धमनी (आर्टरी) में गलती से लगने का खतरा नहीं होता।

क्या करें

कई बार यह भी देखा गया है कि लोग चोट लगने पर मालिश करवाते हैं, लेकिन इससे चोटग्रस्त धमनियां और अधिक क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और उनके दोबारा ठीक होने की संभावना कम हो जाती है। हाथ, पैर और उंगलियों में झनझनाहट, दर्द या ठंडापन, त्वचा पर लाल रंग के गोल निशान उभरने और हाथ या पैर की उंगलियों के निर्जीव प्रतीत होने जैसे लक्षण धमनी की चोट के संकेत हो सकते हैं।

जांचें

धमनियों की चोटों की जांच के लिए डॉप्लर स्टडी, डिजिटल सबट्रैक्शन एंजियोग्राफी या परंपरागत एंजियोग्राफी की मदद ली जाती है। इन परीक्षणों के बगैर धमनी की चोट के बारे में सही-सही और पूरा आकलन नही हो पाता। डॉप्लर स्टडी के जरिए धमनी में चोट लगने का पता चल सकता है, लेकिन एंजियोग्राफी के जरिए धमनी में लगी चोट के बारे में सभी तरह की जानकारियां हासिल हो सकती हैं। इसलिए धमनी की चोट से ग्रस्त व्यक्ति को उसी अस्पताल में ले जाया जाना चाहिए, जहां एंजियोग्राफी की सुविधा उपलब्ध हो।

ऑपरेशन ही कारगर

एंजियोग्राफी जैसी आधुनिक तकनीकों और कृत्रिम रक्त नलियों के विकास की बदौलत धमनी की चोट के ऑपरेशन आज काफी कारगर बन चुके हैं। इन तकनीकों की मदद से चोटग्रस्त धमनी की मरम्मत या फिर इसका पुनर्निर्माण किया जा सकता है। धमनी के पुनर्निर्माण के लिए मरीज की दूसरी टांग से नस निकाल कर धमनी का निर्माण किया जाता है। कई बार कृत्रिम धमनी का भी इस्तेमाल किया जाता है। क्षतिग्रस्त धमनी की मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण संभव नहीं होने पर धमनी का बाईपास ऑपरेशन किया जाता है।

अस्पताल पहुंचने में देरी न करें

धमनी से संबंधित चोटों के ऑपरेशन की सफलता मुख्य तौर पर इस बात पर निर्भर करती है कि मरीज को कितनी जल्दी वैस्क्युलर सर्जन के पास लाया जाता है। अगर मरीज धमनी में चोट लगते ही वैस्क्युलर सर्जन के पास पहुंच जाए तो पैर और हाथ बचाने की उम्मीद काफी अधिक रहती है।

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