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जन्म से लेकर 19 साल तक के बच्चों का इलाज होगा डीआइसी: रीता बहुगुणा जोशी

नोएडा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जरिए प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि यहां के सभी नागरिक स्वस्थ रहें। इस देश के बच्चे जब स्वस्थ होंगे तभी देश स्वस्थ होगा। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक हर साल करीब 2 करोड़ बच्चों का जन्म होता है, जिसमें से करीब 16 लाख बच्चे जन्मजात किसी बीमारी से ग्रस्त होते हैं। ऐसे में उन बच्चों का विकास नहीं हो पाता है।जन्म से लेकर 19 साल तक के बच्चों का इलाज होगा डीआइसी: रीता बहुगुणा जोशी

ऐसे बच्चों को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ करने के लिए डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआइसी) का निर्माण किया गया है। ये बातें पिछले दिनों महिला एवं शिशु कल्याण मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई के डीईआइसी सेंटर के उद्घाटन के दौरान कहीं।

डीईआइसी सेंटर को चलाने की जिम्मेदारी निजी संस्थाओं को दी गई है। प्रदेश के प्रत्येक जिले में सेंटर की स्थापना की जानी है। अब तक पांच सेंटरों की स्थापना की जा चुकी है। इनमें से तीन गौतमबुद्ध नगर में स्थापित हैं।  उन्होंने चाइल्ड पीजीआइ के सभागार में अधिकारियों व अन्य के साथ बैठक की। इससे पहले नाइट एंगल इंस्टीट्यूट की छात्राओं ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। जानकारी दी गई कि डीईआइसी में जन्म से लेकर 19 साल तक के बच्चों का इलाज किया जाएगा।

आंकड़ों के मुताबिक ज्यादातर बच्चों की मौत 1 से 10 साल के बीच होती है, जिसके चलते प्रदेश में बच्चों के मृत्यु दर के आंकड़ों में लगातार इजाफा हो रहा है। प्रदेश सरकार जल्द ऐसी योजना बनाने जा रही है, जिससे गर्भ के समय ही बच्चों में होने वाली बीमारियों के बारे में जानकारी मिल जाएगी। इससे समय रहते हुए उसका इलाज किया जा सके। इसके चलते प्रदेश में हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है।

वहीं, प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य विभाग को मिशन इंद्रधनुष चलाने का निर्देश भी दिया गया है। जिलाधिकारी बीएन ¨सह ने इस मौके पर बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने 8 बाल कल्याण टीम का गठन किया है। यह टीम हर गांव में जाकर बच्चों की जांच करेंगी। जो बच्चे बीमार अवस्था में मिलेंगे, उन्हें डीईआइसी सेंटर भेजा जाएगा।

वहीं चाइल्ड पीजीआइ के निदेशक डॉ. एके भट्ट ने कहा कि इस केंद्र के शुरू होने से नागरिकों को काफी फायदा होगा। वहीं सीएमओ डॉ. अनुराग भार्गव ने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत टीम संस्थागत प्रसव केंद्रों जन्म के समय, 6 माह, 6 वर्ष तक के बच्चों का आंगनबाड़ी केंद्र और 6 से 10 वर्ष तक के प्राथमिक विद्यालय और 10 से 19 वर्ष तक के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण प्राथमिक विद्यालयों में किया जाएगा। डेडिकेटेड मोबाइल टीम बच्चों का वजन लंबाई, आंख, कान, नाक की जांच करती है। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की सलाहकार अरुण कुमार, हरिओम, चाइल्ड पीजीआइ के सीईओ शरद, सांसद प्रतिनिधि संजय बाली आदि मौजूद रहे।

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