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	<title>धर्म &#060; Ujjawal Prabhat | उज्जवल प्रभात</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles.</description>
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	<title>धर्म &#060; Ujjawal Prabhat | उज्जवल प्रभात</title>
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	<item>
		<title>सूर्य देव को तांबे के लोटे से ही क्यों देते हैं अर्घ्य?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 May 2026 05:40:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[सूर्य देव]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="539" height="344" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/3-26.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%ac%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%87/">सूर्य देव को तांबे के लोटे से ही क्यों देते हैं अर्घ्य?</a></p>
<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ के महीने में सूर्य देव 15 मई को वृषभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इसलिए इस दिन वृषभ संक्रांति मनाई जाएगी। यह दिन सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य देव की साधना करने से कारोबार में &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="539" height="344" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/3-26.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%ac%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%87/">सूर्य देव को तांबे के लोटे से ही क्यों देते हैं अर्घ्य?</a></p>

<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ के महीने में सूर्य देव 15 मई को वृषभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इसलिए इस दिन वृषभ संक्रांति मनाई जाएगी। यह दिन सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है।</p>



<p>धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य देव की साधना करने से कारोबार में सफलता मिलती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इस दिन सूर्य देव को तांबे के लोटे से अर्घ्य देने का विधान है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर सूर्य देव को तांबे के लोटे से अर्घ्य क्यों दिया जाता है। अगर नहीं पता, तो आइए आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।</p>



<p><strong>क्या है वजह<br /></strong>सूर्य की प्रिय धातु है तांबा- हर धातु का संबंध किसी न किसी ग्रह से है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य देव की प्रिय धातु तांबा है। इसलिए उन्हें प्रसन्न और अर्घ्य देने के लिए तांबे के लोटे का प्रयोग किया जाता है।<br />अगर आपकी कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर है, तो ऐसे में रोजाना सूर्य को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। साथ ही मान-सम्मान में वृद्धि और जीवन में सफलता मिलती है।</p>



<p><strong>वृषभ संक्रांति 2026 शुभ मुहूर्त<br /></strong>वैदिक पंचांग के अनुसार, 15 मई को वृषभ संक्रांति मनाई जाएगी।<br />पुण्य काल- 15 मई को सुबह 05 बजकर 57 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक<br />महा पुण्य काल- सुबह 05 बजकर 30 मिनट से लेकर सुबह 07 बजकर 46 मिनट तक</p>



<p><strong>सूर्य देव को अर्घ्य देते समय इन बातों का रखें ध्यान<br /></strong>सूर्य देव को अर्घ्य देते समय &#8220;ॐ सूर्याय नम:&#8221; या &#8220;ॐ घृणि सूर्याय नम:&#8221; मंत्र का जप जरूर करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंत्रों का जप करने से मन में सकारात्मकता आती है और सूर्य देव की कृपा बरसती है।<br />सूर्य देव को अर्घ्य देने से पहले स्नान करें और साफ कपड़ें पहनें। ऐसा माना जाता है कि बिना स्नान के सूर्य देव को अर्घ्य देने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।<br />अर्घ्य देते समय जूते या चप्पल नहीं पहनने चाहिए। इस गलती को करने से सूर्य देव नाराज हो सकते हैं।<br />इसके अलावा मन में किसी के बारे में गलत न सोचें और किसी से वाद-विवाद न करें।</p>
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]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बड़ा मंगल 2026: शाम ढलने से पहले हनुमान जी को अर्पित करें ये 4 चीजें</title>
		<link>https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%b2-2026-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%a2%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%87/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 May 2026 05:14:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[हनुमान जी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="549" height="342" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/9-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%b2-2026-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%a2%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%87/">बड़ा मंगल 2026: शाम ढलने से पहले हनुमान जी को अर्पित करें ये 4 चीजें</a></p>
<p>आज 12 मई 2026 है और ज्येष्ठ मास का दूसरा &#8216;बड़ा मंगल&#8217;। हिंदू धर्म में इस दिन का महत्व किसी महापर्व से कम नहीं है। मान्यता है कि इसी महीने में हनुमान जी की मुलाकात प्रभु श्री राम से हुई थी। अधिकमास होने के कारण इस बार 8 बड़े मंगल का दुर्लभ संयोग बन रहा &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="549" height="342" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/9-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%b2-2026-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%a2%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%87/">बड़ा मंगल 2026: शाम ढलने से पहले हनुमान जी को अर्पित करें ये 4 चीजें</a></p>

<p>आज 12 मई 2026 है और ज्येष्ठ मास का दूसरा &#8216;बड़ा मंगल&#8217;। हिंदू धर्म में इस दिन का महत्व किसी महापर्व से कम नहीं है। मान्यता है कि इसी महीने में हनुमान जी की मुलाकात प्रभु श्री राम से हुई थी। अधिकमास होने के कारण इस बार 8 बड़े मंगल का दुर्लभ संयोग बन रहा है।</p>



<p>आज के दिन यदि आप हनुमान जी को अपनी समस्याओं के अनुसार &#8216;गुप्त&#8217; रूप से ये चीजें अर्पित करते हैं, तो बजरंगबली आपके जीवन के सभी कष्टों को पल भर में हर लेंगे।</p>



<p><strong>मानसिक शांति और बाधा मुक्ति के लिए<br /></strong>अगर आपके काम बनते-बनते बिगड़ रहे हैं या मन अशांत रहता है, तो यह बड़े मंगल के दिन यह छोटा-सा उपाय जादू की तरह काम करेगा। एक साबुत लौंग (फूल वाली) लें और उसे चुपचाप हनुमान जी के मंदिर में उनके चरणों में रख दें। माना जाता है कि लौंग चढ़ाने से कार्य में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और साधक को अद्भुत मानसिक शांति प्राप्त होती है।</p>



<p><strong>मिलेगी असीम कृपा<br /></strong>हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे सरल रास्ता प्रभु श्री राम का नाम है। उन्हें तुलसी दल अत्यंत प्रिय है। ऐसे में बड़े मंगल के दिन 108 तुलसी के पत्ते लें (आप 11, 21 या 51 भी ले सकते हैं)। इन पत्तों पर चंदन से &#8216;राम&#8217; नाम लिखें और इनकी एक माला बनाकर हनुमान जी को पहना दें। माना जाता है कि बिना किसी को बताए अर्पित की गई तुलसी माला का फल कई गुना बढ़ जाता है।</p>



<p><strong>डर और आलस्य को भगाने के लिए<br /></strong>अगर आप भीतर से कमजोर महसूस करते हैं या आलस्य के कारण काम रुक रहे हैं, तो यह उपाय आपके काम आ सकता है। दूसरे बड़े मंगल पर हनुमान जी के मंदिर में एक माचिस अर्पित करें। माचिस चढ़ाते समय मन-ही-मन प्रार्थना करें, कि प्रभु आपके जीवन के डर, आलस्य और नकारात्मकता के अंधकार को दूर करें। इस उपाय को करने से मन में नया जोश तो भरता ही है, साथ ही कामकाज की रफ्तार भी बढ़ती है।</p>



<p><strong>मान-सम्मान और धन वृद्धि के लिए<br /></strong>दूसरे बड़े मंगल के दिन हनुमान जी को पीला वस्त्र चढ़ाना आपकी किस्मत के बंद दरवाजे खोल सकता है। ऐसे में आज के दिन आप हनुमान जी को पीले रंग का रुमाल या छोटा-सा कपड़ा चढ़ा सकते हैं। बड़े मंगल के दिन गुप्त रूप से किया गया यह दान न केवल घर के क्लेश खत्म करता है, बल्कि आपके मान-सम्मान में भी वृद्धि करता है।</p>
<p>आप पढ़ रहे हैं : UjjawalPrabhat.Com</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ज्येष्ठ माह में बन रहा 4 एकादशी का दुर्लभ संयोग</title>
		<link>https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%87%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a0-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%a8-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-4-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%be/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 05:33:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[ज्येष्ठ माह]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="571" height="474" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/5-45.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%87%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a0-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%a8-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-4-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%be/">ज्येष्ठ माह में बन रहा 4 एकादशी का दुर्लभ संयोग</a></p>
<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, अधिक मास की वजह से 2 ज्येष्ठ माह होंगे। सनातन धर्म में अधिक मास का विशेष महत्व है। अधिक मास की शुरुआत 17 मई से होगी। 2 ज्येष्ठ माह होने की वजह से 4 एकादशी का शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी व्रत को करने से साधक &#8230;</p>
<p>आप पढ़ रहे हैं : UjjawalPrabhat.Com</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="571" height="474" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/5-45.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%87%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a0-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%a8-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-4-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%be/">ज्येष्ठ माह में बन रहा 4 एकादशी का दुर्लभ संयोग</a></p>

<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, अधिक मास की वजह से 2 ज्येष्ठ माह होंगे। सनातन धर्म में अधिक मास का विशेष महत्व है। अधिक मास की शुरुआत 17 मई से होगी।</p>



<p>2 ज्येष्ठ माह होने की वजह से 4 एकादशी का शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी व्रत को करने से साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है। साथ ही भगवान विष्णु की कृपा से बिगड़े काम पूरे होते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि ज्येष्ठ माह में कब कौन-सी एकादशी का व्रत किया जाएगा।</p>



<p><strong>ज्येष्ठ माह कब कौन-सी एकादशी है?<br /></strong>वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह में अपरा एकादशी (Apra Ekadashi 2026), पद्मिनी एकादशी, परमा एकादशी और निर्जला एकादशी व्रत किया जाएगा।</p>



<p><strong>अपरा एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त<br /></strong>इस बार अपरा एकादशी व्रत 13 मई को किया जाएगा।<br />ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 12 मई को दोपहर 02 बजकर 52 मिनट पर<br />ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 13 मई को दोपहर 01 बजकर 29 मिनट पर<br />व्रत पारण का समय- सुबह 05 बजकर 31 मिनट से 08 बजकर 14 मिनट तक</p>



<p><strong>पद्मिनी एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त<br /></strong>वैदिक पंचांग के अनुसार, पद्मिनी एकादशी 27 मई (Padmini Ekadashi 2026) को मनाई जाएगी।<br />पद्मिनी एकादशी एकादशी तिथि की शुरुआत- 26 मई को सुबह 05 बजकर 10 मिनट पर<br />पद्मिनी एकादशी एकादशी तिथि का समापन- 27 मई को सुबह 06 बजकर 21 मिनट पर<br />व्रत पारण का समय- सुबह 05 बजकर 25 मिनट से 07 बजकर 56 मिनट तक</p>



<p><strong>परमा एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त<br /></strong>इस बार परमा एकादशी 11 (Parma Ekadashi 2026) जून को मनाई जाएगी।<br />अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 11 जून को रात 12 बजकर 57 मिनट पर<br />अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 11 जून रात 10 बजकर 36 मिनट पर<br />व्रत पारण का समय- सुबह 05 बजकर 23 मिनट से 08 बजकर 10 मिनट पर</p>



<p><strong>निर्जला एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त<br /></strong>इस बार निर्जला एकादशी व्रत 25 जून (Nirjala Ekadashi 2026) को किया जाएगा।<br />ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 24 जून को शाम 06 बजकर 12 मिनट पर<br />ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 25 जून को रात 08 बजकर 09 मिनट पर<br />व्रत पारण का समय- 26 जून को सुबह 05 बजकर 25 मिनट से 08 बजकर 13 मिनट तक</p>



<p><strong>एकदाशी का महत्व<br /></strong>धार्मिक मान्यता के अनुसार, अपरा एकादशी व्रत करने से साधक को धन और पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही पापों से छुटकारा मिलता है।<br />पद्मिनी एकादशी व्रत करने से तीर्थों की यात्रा के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।<br />परमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी की पूजा और व्रत करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। जीवन में समृद्धि का वास होता है।<br />निर्जला एकादशी व्रत को अधिक कठिन माना जाता है। इस व्रत को निर्जला किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से साल की सभी एकादशियों के बराबर का पुण्य मिल जाता है।</p>
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]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>90% लोग नहीं जानते मृत्युंजय स्तोत्र पढ़ने की विधि! सोमवार को ऐसे करें इसका पाठ</title>
		<link>https://ujjawalprabhat.com/90-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%97-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a4%af/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 05:30:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मृत्युंजय स्तोत्र]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="712" height="468" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/3-21.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/90-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%97-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a4%af/">90% लोग नहीं जानते मृत्युंजय स्तोत्र पढ़ने की विधि! सोमवार को ऐसे करें इसका पाठ</a></p>
<p>सनातन धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है। सोमवार का दिन देवों के देव महादेव की पूजा-अर्चना के लिए शुभ माना जाता है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिव जी की साधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और बिगड़े काम पूरे &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="712" height="468" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/3-21.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/90-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%97-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a4%af/">90% लोग नहीं जानते मृत्युंजय स्तोत्र पढ़ने की विधि! सोमवार को ऐसे करें इसका पाठ</a></p>

<p>सनातन धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है। सोमवार का दिन देवों के देव महादेव की पूजा-अर्चना के लिए शुभ माना जाता है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिव जी की साधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और बिगड़े काम पूरे होते हैं।</p>



<p>इस दिन पूजा के दौरान शिव मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्तोत्र का पाठ करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। साथ ही घबराहट, चिंता और डिप्रेशन की समस्या से छुटकारा मिलता है।</p>



<p><strong>शिव मृत्युंजय स्तोत्र पाठ विधि<br /></strong>ब्रह्म मुहूर्त या प्रदोष काल में शिव मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है।<br />स्नान करने के बाद पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं।<br />दीपक और धूप जलाएं।<br />भगवान गणेश का ध्यान करें।<br />शिवलिंग पर जल या दूध से अभिषेक करें।<br />प्रभु को बेलपत्र, फूल और अक्षत अर्पित करें।<br />इसके बाद शिव मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ करें।<br />आखिरी भगवान शिव की आरती करें।<br />शिव चालीसा का पाठ करें।<br />जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें।<br />फल और मिठाई का भोग लगाएं।<br />आखिरी में लोगों में प्रसाद बाटें और खुद भी ग्रहण करें।</p>



<p><strong>॥ शिव मृत्युंजय स्तोत्र ॥<br /></strong>रत्नसानुशरासनं रजताद्रिश्रृंगनिकेतनं</p>



<p>शिञ्जिनीकृतपन्नगेश्वरमच्युतानलसायकम्।</p>



<p>क्षिप्रदग्धपुरत्रयं त्रिदशालयैरभिवंदितं</p>



<p>चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥</p>



<p>पंचपादपपुष्पगन्धिपदाम्बुजद्वयशोभितं</p>



<p>भाललोचनजातपावकदग्धमन्मथविग्रहम्।</p>



<p>भस्मदिग्धकलेवरं भवनाशिनं भवमव्ययं</p>



<p>चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥</p>



<p>मत्तवारणमुख्यचर्मकृतोत्तरीयमनोहरं</p>



<p>पंकजासनपद्मलोचनपूजितांगघ्रिसरोरुहम्।</p>



<p>देवसिद्धतरंगिणी करसिक्तशीतजटाधरं</p>



<p>चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥</p>



<p>कुण्डलीकृतकुण्डलीश्वरकुण्डलं वृषवाहनं</p>



<p>नारदादिमुनीश्वरस्तुतवैभवं भुवनेश्वरम्।</p>



<p>अंधकान्तकमाश्रितामरपादपं शमनान्तकं</p>



<p>चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥</p>



<p>यक्षराजसखं भगाक्षिहरं भुजंगविभूषणं</p>



<p>शैलराजसुतापरिष्कृतचारुवामकलेवरम्।</p>



<p>क्ष्वेडनीलगलं परश्वधधारिणं मृगधारिणं</p>



<p>चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥</p>



<p>भेषजं भवरोगिणामखिलापदामपहारिणं</p>



<p>दक्षयज्ञविनाशिनं त्रिगुणात्मकं त्रिविलोचनम्।</p>



<p>भुक्तिमुक्तिफलप्रदं निखिलाघसंघनिबर्हणं</p>



<p>चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥</p>



<p>भक्तवत्सलमर्चतां निधिमक्षयं हरिदम्बरं</p>



<p>सर्वभूतपतिं परात्परमप्रमेयमनूपमम्।</p>



<p>भूमिवारिनभोहुताशनसोमपालितस्वाकृतिं</p>



<p>चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥</p>



<p>विश्वसृष्टिविधायिनं पुनरेव पालनतत्परं</p>



<p>संहरन्तमथ प्रपंचमशेषलोकनिवासिनम्।</p>



<p>क्रीडयन्तमहर्निशं गणनाथयूथसमाव्रतं</p>



<p>चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥</p>



<p>रुद्रं पशुपतिं स्थाणुं नीलकण्ठमुमापतिम्।</p>



<p>नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥</p>



<p>कालकण्ठं कलामूर्तिं कालाग्निं कालनाशनम्।</p>



<p>नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥</p>



<p>नीलकण्ठं विरुपाक्षं निर्मलं निरूपद्रवम्।</p>



<p>नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥</p>



<p>वामदेवं महादेवं लोकनाथं जगद्गुरुम्।</p>



<p>नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥</p>



<p>देवदेवं जगन्नाथं देवेशमृषभध्वजम्।</p>



<p>नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥</p>



<p>अनन्तमव्ययं शान्तमक्षमालाधरं हरम्।</p>



<p>नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥</p>



<p>आनन्दं परमं नित्यं कैवल्यपदकारणम्।</p>



<p>नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥</p>



<p>स्वर्गापवर्गदातारं सृष्टिस्थित्यन्तकारिणम्।</p>



<p>नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥</p>



<p>॥ इति श्रीपद्मपुराणान्तर्गत उत्तरखण्डे श्रीमृत्युञ्जयस्तोत्रं सम्पूर्णम्। ॥</p>



<p><strong>शिव मंत्र (Shiv Mantra)</strong></p>



<ol class="wp-block-list">
<li>सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।</li>
</ol>



<p>उज्जयिन्यां महाकालं ओम्कारम् अमलेश्वरम्॥</p>



<p>परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।</p>



<p>सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥</p>



<p>वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।</p>



<p>हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥</p>



<p>एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।।</p>



<ol start="2" class="wp-block-list">
<li>ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।</li>
</ol>



<p>उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥</p>
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		<title>सोमवार के दिन भोलेनाथ को अर्पित करें ये 4 चीजें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 05:24:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[भोलेनाथ]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="795" height="418" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/5-44.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/5-44.jpg 795w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/5-44-768x404.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 795px) 100vw, 795px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%ae%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%85/">सोमवार के दिन भोलेनाथ को अर्पित करें ये 4 चीजें</a></p>
<p>दांपत्य जीवन में कड़वाहट और तनाव किसी भी व्यक्ति के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन केवल महादेव ही नहीं, बल्कि माता पार्वती की संयुक्त आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यदि आपके वैवाहिक जीवन में दूरियां आ गई हैं, तो शिव-गौरी का आशीर्वाद आपके रिश्ते को पुनर्जीवित &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="795" height="418" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/5-44.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/5-44.jpg 795w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/5-44-768x404.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 795px) 100vw, 795px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%ae%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%85/">सोमवार के दिन भोलेनाथ को अर्पित करें ये 4 चीजें</a></p>

<p>दांपत्य जीवन में कड़वाहट और तनाव किसी भी व्यक्ति के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन केवल महादेव ही नहीं, बल्कि माता पार्वती की संयुक्त आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यदि आपके वैवाहिक जीवन में दूरियां आ गई हैं, तो शिव-गौरी का आशीर्वाद आपके रिश्ते को पुनर्जीवित कर सकता है। चलिए पढ़ते हैं इस दिन के कुछ खास उपाय।</p>



<p><strong>शिव-गौरी में जरूर करें ये काम<br /></strong>सोमवार के दिन सुबह स्नान के बाद शिव मंदिर जाएं और महादेव व माता पार्वती की संयुक्त पूजा करें।<br />शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, दही और शहद (पंचामृत) से अभिषेक करें। मान्यता है कि पंचामृत से अभिषेक करने पर वैवाहिक जीवन की कड़वाहट खत्म होती है और पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है।<br />सोमवार के दिन शिवलिंग पर गौरी-शंकर रुद्राक्ष या पंचमुखी रुद्राक्ष की माला अर्पित करें। यह अटूट बंधन का प्रतीक माना जाता है।<br />21 बेलपत्र लें और उन पर चंदन से &#8216;राम&#8217; लिखें। इन्हें शिवलिंग पर चढ़ाते समय मन-ही-मन अपने साथी के साथ सुखद जीवन की प्रार्थना करें।<br />शिवलिंग पर चंदन के साथ केसर का तिलक लगाएं। इस उपाय को करने से दांपत्य जीवन में सुख बढ़ाता है।</p>



<p><strong>करें इस मंत्रों का जप<br /></strong>सोमवार के दिन पूजा के दौरान रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का कम-से-कम 11 या 108 बार जप करें &#8211;</p>



<p><strong>&#8220;हे गौरी शंकर अर्धांगिनी यथा त्वं शंकर प्रिया।<br />तथा मां कुरु कल्याणी कान्त कान्तां सुदुर्लभाम्॥&#8221;</strong></p>



<p><strong>शीघ्र विवाह के लिए उपाय<br /></strong>यदि विवाह में देरी हो रही है या बार-बार बाधाएं आ रही हैं, तो ये उपाय आपके काम आ सकते हैं।</p>



<p>सोमवार के दिन शिवलिंग पर केसर मिला हुआ दूध चढ़ाएं। इससे जल्दी विवाह के योग बनने लगते हैं।<br />जो जातक मनचाहे जीवनसाथी की चाह रखते हैं, उन्हें 16 सोमवार का व्रत करना चाहिए।<br />शिव मंदिर में 11 बूंदी के लड्डू चढ़ाएं और इसके बाद इन्हें जरूरतमंदों में बांट दें।</p>



<p><strong>भूल से भी न करें ये काम<br /></strong>अगर आप इन नियमों का पालन करते हैं, तो भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और इससे जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।</p>



<p>किसी बड़े-बुजुर्ग, स्त्री, माता-पिता, साधु-संतों या मेहमानों का अपमान न करें।<br />तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) से दूर रहें।<br />शिवलिंग की पूजा में हल्दी, कुमकुम, सिंदूर या तुलसी भूलकर भी न चढ़ाएं। इन चीजों को शिव पूजा में वर्जित माना जाता है।</p>
<p>आप पढ़ रहे हैं : UjjawalPrabhat.Com</p>
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