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	<title>धर्म &#060; Ujjawal Prabhat | उज्जवल प्रभात</title>
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	<title>धर्म &#060; Ujjawal Prabhat | उज्जवल प्रभात</title>
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		<title>अक्षय तृतीया 2026: आज बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Apr 2026 05:36:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[अक्षय तृतीया 2026]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="589" height="366" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/04/45-5.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%af-%e0%a4%a4%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af%e0%a4%be-2026-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%ac%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be/">अक्षय तृतीया 2026: आज बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा!</a></p>
<p>आज, 19 अप्रैल को देशभर में अक्षय तृतीया का पावन पर्व मनाया जा रहा है। शास्त्रों में इस तिथि को सौभाग्य और अटूट सफलता का प्रतीक माना गया है। &#8216;अक्षय&#8217; का अर्थ है जिसका कभी क्षय यानी नाश न हो। मान्यता है कि आज के दिन किए गए पूजा-पाठ और दान-पुण्य का फल कभी कम &#8230;</p>
<p>आप पढ़ रहे हैं : UjjawalPrabhat.Com</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="589" height="366" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/04/45-5.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%af-%e0%a4%a4%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af%e0%a4%be-2026-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%ac%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be/">अक्षय तृतीया 2026: आज बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा!</a></p>

<p>आज, 19 अप्रैल को देशभर में अक्षय तृतीया का पावन पर्व मनाया जा रहा है। शास्त्रों में इस तिथि को सौभाग्य और अटूट सफलता का प्रतीक माना गया है। &#8216;अक्षय&#8217; का अर्थ है जिसका कभी क्षय यानी नाश न हो। मान्यता है कि आज के दिन किए गए पूजा-पाठ और दान-पुण्य का फल कभी कम नहीं होता। चलिए पढ़ते हैं अक्षय तृतीया की पूजा विधि।</p>



<p><strong>अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त<br /></strong>पंचांग के अनुसार, आज पूजा और खरीदारी के लिए यह समय सर्वोत्तम रहेगा &#8211;</p>



<p>अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त &#8211; सुबह 10 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक<br />अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने का समय &#8211; सुबह 10 बजकर 49 मिनट से 20 अप्रैल सुबह 5 बजकर 51 मिनट तक</p>



<p><strong>मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा विधि<br /></strong>सुबह जल्दी उठकर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और साफ-सुथरे विशेषकर पीले रंग के कपड़े पहनें।<br />मंदिर में चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और मां लक्ष्मी व भगवान विष्णु की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।<br />भगवान विष्णु का पंचामृत का अभिषेक चंदन का तिलक लगाएं और उनके भोग में तुलसी दल शामिल करें।<br />लक्ष्मी जी के चरणों में कमल का फूल अर्पित करें और उन्हें मखाने या चावल की खीर का भोग लगाएं।<br />पूाज के दौरान कनकधारा स्तोत्र, श्रीसूक्त या लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें।<br />पूजा में शुद्ध घी का दीपक जलाएं और श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी व भगवान विष्णु की आरती करें।</p>



<p><strong>करें इन मंत्रों का जप<br /></strong>महालक्ष्मी मंत्र &#8211; ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥ (कम से कम 108 बार जप करें)<br />लक्ष्मी गायत्री मंत्र &#8211; ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥<br />भगवान विष्णु मंत्र &#8211; ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः<br />कुबेर देव का मंत्र &#8211; ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥<br />अक्षय पुण्य प्राप्ति मंत्र &#8211; ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्यः सुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॐ ॥</p>



<p><strong>अक्षय फलों की प्राप्ति के लिए करें ये दान<br /></strong>आज के दिन अपनी सामर्थ्य अनुसार गरीबों को दान जरूर दें, क्योंकि आज किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है। मां लक्ष्मी की कृपा के लिए अक्षय तृतीया पर सफेद रंग की चीजों जैसे दूध, दही, शक्कर, खीर, शंख और सफेद कपड़े आदि का दान करें।</p>



<p>इससे लक्ष्मी जी की कृपा के साथ-साथ कुंडली में चंद्रमा की स्थित भी मजबूत होती है। साथ हीअक्षय तृतीया के दिन आप गरीबों व जरूरमंद लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार, अनाज जैसे गेहूं, चावल, या जौ आदि का दान कर सकते हैं। इससे साधक को शुभ फलों की प्राप्ति होती है और जीवन में शुभ परिणाम मिलने लगते हैं।</p>
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		<title>बिना इस आरती के अधूरी है अक्षय तृतीया की पूजा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Apr 2026 05:25:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[अक्षय तृतीया]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="867" height="448" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/04/4-14.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/04/4-14.jpg 867w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/04/4-14-768x397.jpg 768w" sizes="(max-width: 867px) 100vw, 867px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%85%e0%a4%95/">बिना इस आरती के अधूरी है अक्षय तृतीया की पूजा</a></p>
<p>शास्त्रों में कहा गया है कि किसी भी देवी-देवता की पूजा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती, जब तक अंत में श्रद्धापूर्वक उनकी आरती न की जाए। आरती पूजा में रह गई कमियों को दूर करती है। अक्षय तृतीया जैसे सिद्ध मुहूर्त पर, जब हर कोई मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के में जुटा होता &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="867" height="448" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/04/4-14.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/04/4-14.jpg 867w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/04/4-14-768x397.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 867px) 100vw, 867px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%85%e0%a4%95/">बिना इस आरती के अधूरी है अक्षय तृतीया की पूजा</a></p>

<p>शास्त्रों में कहा गया है कि किसी भी देवी-देवता की पूजा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती, जब तक अंत में श्रद्धापूर्वक उनकी आरती न की जाए। आरती पूजा में रह गई कमियों को दूर करती है। अक्षय तृतीया जैसे सिद्ध मुहूर्त पर, जब हर कोई मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के में जुटा होता है, तब आरती का महत्व और भी बढ़ जाता है।</p>



<p>अगर आप भी इस अक्षय तृतीया पर धन-धान्य और सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं, तो पूजा के अंत में मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की की आरती करना न भूलें, जो इस प्रकार हैं &#8211;</p>



<p><strong>॥माता लक्ष्मी की आरती॥<br /></strong>महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं,</p>



<p>नमस्तुभ्यं सुरेश्वरि ।</p>



<p>हरि प्रिये नमस्तुभ्यं,</p>



<p>नमस्तुभ्यं दयानिधे ॥</p>



<p>पद्मालये नमस्तुभ्यं,</p>



<p>नमस्तुभ्यं च सर्वदे ।</p>



<p>सर्वभूत हितार्थाय,</p>



<p>वसु सृष्टिं सदा कुरुं ॥</p>



<p>ॐ जय लक्ष्मी माता,</p>



<p>मैया जय लक्ष्मी माता ।</p>



<p>तुमको निसदिन सेवत,</p>



<p>हर विष्णु विधाता ॥</p>



<p>उमा, रमा, ब्रम्हाणी,</p>



<p>तुम ही जग माता ।</p>



<p>सूर्य चद्रंमा ध्यावत,</p>



<p>नारद ऋषि गाता ॥</p>



<p>॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥</p>



<p>दुर्गा रुप निरंजनि,</p>



<p>सुख-संपत्ति दाता ।</p>



<p>जो कोई तुमको ध्याता,</p>



<p>ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥</p>



<p>॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥</p>



<p>तुम ही पाताल निवासनी,</p>



<p>तुम ही शुभदाता ।</p>



<p>कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी,</p>



<p>भव निधि की त्राता ॥</p>



<p>॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥</p>



<p>जिस घर तुम रहती हो,</p>



<p>ताँहि में हैं सद्&#x200d;गुण आता ।</p>



<p>सब सभंव हो जाता,</p>



<p>मन नहीं घबराता ॥</p>



<p>॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥</p>



<p>तुम बिन यज्ञ ना होता,</p>



<p>वस्त्र न कोई पाता ।</p>



<p>खान पान का वैभव,</p>



<p>सब तुमसे आता ॥</p>



<p>॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥</p>



<p>॥कुबेर जी की आरती॥<br />ॐ जय यक्ष कुबेर हरे,</p>



<p>स्वामी जय यक्ष जय यक्ष कुबेर हरे।</p>



<p>शरण पड़े भगतों के, भंडार कुबेर भरे।</p>



<p>॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे ॥</p>



<p>शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,</p>



<p>स्वामी भक्त कुबेर बड़े।</p>



<p>दैत्य दानव मानव से, कई-कई युद्ध लड़े ॥</p>



<p>॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे ॥</p>



<p>स्वर्ण सिंहासन बैठे, सिर पर छत्र फिरे,</p>



<p>स्वामी सिर पर छत्र फिरे।</p>



<p>योगिनि मंगल गावैं, सब जय जयकार करैं॥</p>



<p>॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे ॥</p>



<p>गदा त्रिशूल हाथ में, शस्त्र बहुत धरे,</p>



<p>स्वामी शस्त्र बहुत धरे।</p>



<p>दुख भय संकट मोचन, धनुष टंकार करे॥</p>



<p>॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥</p>



<p>भांति भांति के व्यंजन बहुत बने,</p>



<p>स्वामी व्यंजन बहुत बने।</p>



<p>मोहन भोग लगावैं, साथ में उड़द चने॥</p>



<p>॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥</p>



<p>यक्ष कुबेर जी की आरती,</p>



<p>जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे ।</p>



<p>कहत प्रेमपाल स्वामी, मनवांछित फल पावे।</p>



<p>ॐ जय यक्ष कुबेर हरे,</p>



<p>स्वामी जय यक्ष जय यक्ष कुबेर हरे।</p>
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]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>क्या आपने भी पहनी है तुलसी की माला? तो भूलकर भी न करें ये गलितयां</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 05:36:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[तुलसी की माला?]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="908" height="452" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/04/5-28.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/04/5-28.jpg 908w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/04/5-28-768x382.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 908px) 100vw, 908px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a5%80/">क्या आपने भी पहनी है तुलसी की माला? तो भूलकर भी न करें ये गलितयां</a></p>
<p>सनातन धर्म में तुलसी की लकड़ी से बनी माला को अत्यंत पवित्र और चमत्कारी मानी जाती है। इसे गले में धारण करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ कई शारीरिक लाभ भी मिलते हैं। हालांकि, शास्त्रों के अनुसार तुलसी की माला पहनने के कुछ विशेष नियम हैं, जिनका पालन करने पर ही इसका पूर्ण &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="908" height="452" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/04/5-28.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/04/5-28.jpg 908w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/04/5-28-768x382.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 908px) 100vw, 908px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a5%80/">क्या आपने भी पहनी है तुलसी की माला? तो भूलकर भी न करें ये गलितयां</a></p>

<p>सनातन धर्म में तुलसी की लकड़ी से बनी माला को अत्यंत पवित्र और चमत्कारी मानी जाती है। इसे गले में धारण करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ कई शारीरिक लाभ भी मिलते हैं। हालांकि, शास्त्रों के अनुसार तुलसी की माला पहनने के कुछ विशेष नियम हैं, जिनका पालन करने पर ही इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है।</p>



<p><strong>तुलसी माला पहनने के अद्भुत लाभ<br /></strong>नियमानुसार तुलसी का माला धारण करने वाले साधक पर सदैव भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है।<br />जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे सुख-शांति व समृद्धि आती है।<br />यह मन को शांत करने का काम करता है, साथ ही इससे आध्यात्मिकता बढ़ाती है और स्वास्थ्य में भी लाभ देखने को मिलता है।<br />यह माला नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा प्रदान करती है और एकाग्रता बढ़ाने का काम करती है।</p>



<p><strong>धारण करने का शुभ दिन और समय<br /></strong>तुलसी माला को स्नान करने के बाद, भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करते हुए पूरी श्रद्धा के साथ गले में धारण करना चाहिए। तुलसी की माला पहनने के लिए सोमवार, बुधवार और गुरुवार का दिन सबसे शुभ माना गया है। इसे अमावस्या के दिन धारण करने से बचना चाहिए। तुलसी माला पहनने के लिए ‘प्रदोष काल’ सबसे उत्तम माना गया है। आप किसी योग्य ज्योतिषी से शुभ मुहूर्त भी निकलवा कर उसमें भी तुलसी माला धारण कर सकते हैं।</p>



<p><strong>ध्यान रखें ये जरूरी नियम<br /></strong>तुलसी माला पहनने वाले व्यक्ति को सात्विक जीवन शैली अपनानी चाहिए। यदि इन नियमों का उल्लंघन होता है, तो जीवन में बाधाएं आ सकती हैं।<br />माला धारण करने के बाद लहसुन, प्याज, मांस-मछली और मदिरा (शराब) आदि का त्याग कर देना चाहिए। माला की पवित्रता बनाए रखने के लिए आप जब भी किसी कारण से माला को उतारें, तो दोबारा पहनने से पहले उसे गंगाजल या साफ जल से धोकर शुद्ध जरूर करें।<br />तुलसी माला धारण करने वाले व्यक्ति को स्वच्छता का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।<br />अशुद्ध अवस्था में इसे उतार देना चाहिए और स्नान आदि के बाद ही दुबारा धारण करना चाहिए।</p>



<p><strong>माला टूट जाने पर क्या करें?<br /></strong>अगर आपकी तुलसी की माला पुरानी होकर खराब हो जाए या अचानक टूट जाए, तो उसे कभी भी कूड़े में या फिर इधर-उधर नहीं फेंकना चाहिए। टूटी हुई माला को सम्मान के साथ किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर दें या फिर अपने घर के तुलसी के पौधे की मिट्टी में डाल दें। उसके स्थान पर नई माला को शुद्ध करके धारण करें।</p>
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]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>एकादशी पर किन चीजों का दान माना गया है सबसे शुभ? हर किसी को पता होने चाहिए ये नियम </title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 05:21:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="689" height="393" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/04/6-51.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a8/">एकादशी पर किन चीजों का दान माना गया है सबसे शुभ? हर किसी को पता होने चाहिए ये नियम </a></p>
<p>वैशाख माह की शुक्ल एकादशी पर मोहिनी एकादशी आती है, जो इस बार 27 अप्रैल को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि पर दान-पुण्य करने से साधक को भगवान विष्णु की कृपा की प्राप्ति होती है। लेकिन आपको एकादशी पर किए गए दान-पुण्य का लाभ तभी मिलता है, जब आप इससे जुड़े नियमों का भी ध्यान रखें। &#8230;</p>
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<p>वैशाख माह की शुक्ल एकादशी पर मोहिनी एकादशी आती है, जो इस बार 27 अप्रैल को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि पर दान-पुण्य करने से साधक को भगवान विष्णु की कृपा की प्राप्ति होती है। लेकिन आपको एकादशी पर किए गए दान-पुण्य का लाभ तभी मिलता है, जब आप इससे जुड़े नियमों का भी ध्यान रखें।</p>



<p><strong>एकादशी पर दान करने के लाभ<br /></strong>एकादशी पर दान करने से भगवान विष्णु की कृपा तो मिलती ही है, साथ ही साधक को अक्षय पुण्य प्राप्त होते हैं। इस दिन दान करने से कई तरह के दोषों से मुक्ति मिलती है। एकादशी पर किया गया दान, साधक को भगवान विष्णु की कृपा दिलाता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।</p>



<p>यह दान पिछले जन्मों के पापों से मुक्ति दिलाने में भी सहायक है। साधक को मानसिक शांति के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति भी मिलती है। एकादशी के दिन सच्चे मन से दान करने पर सुख, समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति होते है।</p>



<p><strong>करें इन चीजों का दान<br /></strong>एकादशी पर अन्न जैसे गेंहू, दाल आदि का दान करना सर्वोत्म माना गया है। एकादशी के दिन चावल नहीं खाते, लेकिन अनाज के रूप में चावल का दान किया जा सकता है।<br />प्रभु श्रीहरि की कृपा के लिए आप एकादशी के दिन जल (कलश), फल और धार्मिक पुस्तकों आदि का दान कर सकते हैं।<br />इस दिन पर अपनी क्षमता के अनुसार, गरीबों को धन का दान करना या भोजन करवाना भी सर्वोत्तम है।<br />एकादशी के दिन पीले रंग की वस्तुओं जैसे पीले रंग के कपड़ों, चने की दाल और गुड़ का दान किया जाता है, क्योंकि यह रंग प्रभु श्रीहरि को प्रिय है।<br />एकादशी पर गायों की सेवा करने और गायों के लिए चारा या दान करने से विशेष पुण्य मिलता है।<br />द्वादशी तिथि पर ब्रह्मणों को भोजन करवाने के साथ-साथ दान-दक्षिणा देकर विदा करना चाहिए और इसके बाद एकादशी व्रत का पारण करना चाहिए।</p>



<p><strong>एकादशी दान-पुण्य के मुख्य नियम<br /></strong>एकादशी के दिन स्नान-ध्यान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करके दान आदि करना चाहिए।<br />एकादशी का दान हमेशा सात्विक और शुद्ध होना चाहिए।<br />तामसिक भोजन या वस्तुओं का दान भूलकर भी न करें।<br />कभी भी दिखावे के लिए दान न करें, हमेशा श्रद्धापूर्वक ही दान करना चाहिए।<br />दान हमेशा बिना किसी अपेक्षा के निस्वार्थ भाव से किया जाना चाहिए।</p>
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		<title>माता सीता की पूजा में करना न भूलें ये काम, वरना अधूरी रह जाएगी आपकी आराधना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 06:18:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[माता सीता]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="589" height="413" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/04/67-31.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be/">माता सीता की पूजा में करना न भूलें ये काम, वरना अधूरी रह जाएगी आपकी आराधना</a></p>
<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल सीता नवमी का पावन पर्व शनिवार, 25 अप्रैल को मनाया जाएगा। शीघ्र विवाह और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस दिन माता सीता और प्रभु श्री राम की संयुक्त रूप से (एक साथ) पूजा की जाती है। आइए जानते हैं माता जानकी की पूजा से जुड़ी अहम बातें, जिनके &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="589" height="413" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/04/67-31.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be/">माता सीता की पूजा में करना न भूलें ये काम, वरना अधूरी रह जाएगी आपकी आराधना</a></p>

<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल सीता नवमी का पावन पर्व शनिवार, 25 अप्रैल को मनाया जाएगा। शीघ्र विवाह और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस दिन माता सीता और प्रभु श्री राम की संयुक्त रूप से (एक साथ) पूजा की जाती है। आइए जानते हैं माता जानकी की पूजा से जुड़ी अहम बातें, जिनके बिना यह पूजा अधूरी मानी जाती है।</p>



<p><strong>पूजा में शामिल करना न भूलें ये चीजें<br /></strong>चूंकि माता सीता धन की देवी मां लक्ष्मी का ही अवतार हैं, इसलिए उनकी पूजा में इन चीजों का होना जरूरी है &#8211;</p>



<p>माता सीता को कमल या गुड़हल का फूल अत्यंत प्रिय माने गए हैं।<br />पूजा में अर्पित करने के लिए पीले रंग के वस्त्र या लाल चुनरी का इस्तेमाल जरूर करें।<br />अखंड सौभाग्य के लिए माता को सिंदूर, चूड़ी, बिंदी सहित 16 शृंगार अर्पित करना चाहिए।<br />भोग के लिए पूजा में पीले फल, गुड़ या घर में बनी शुद्ध मिठाइयां शामिल कर सकते हैं।<br />माता सीता के भोग में तुलसी दल भी जरूर शामिल करना चाहिए।<br />पूजा के दौरान गाय के घी का दीपक भी जरूर जलाना चाहिए।</p>



<p><strong>पूजा में जरूर करें ये शुभ कार्य<br /></strong>वैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए माता सीता को 16 शृंगार की सामग्री करें और लाल चुनरी जरूर चढ़ाएं। सीता नवमी या किसी भी राम-जानकी पूजा में &#8216;जानकी चालीसा&#8217;, &#8216;जानकी स्तुति&#8217; और &#8216;श्री रामायण जी&#8217; का पाठ जरूर करें। इसके बिना आराधना अधूरी मानी जाती है। माता सीता की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए आप सीता नवमी के अवसर पर छोटी कन्याओं को भोजन भी करवा सकते हैं।</p>



<p><strong>मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद<br /></strong>सीता नवमी की पूजा के समय माता जानकी के माथे पर सिंदूर लगाएं। इसके बाद उसी सिंदूर को प्रसाद स्वरूप अपने माथे (मांग) पर लगाएं। इससे अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। इसके साथ ही माता सीता की पूजा में जानकी स्तुति का पाठ भी जरूर करना चाहिए।</p>



<p><strong>इस तरह करें मंत्र जप<br /></strong>पूजा में माता सीता के मंत्रों का जप हमेशा &#8216;तुलसी की माला&#8217; से ही करना चाहिए। दांपत्य जीवन में आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए आपको &#8216;ॐ पतिव्रतायै नमः&#8217; मंत्र का जप करना चाहिए। इसके साथ ही माता जानकी और प्रभु राम की कृपा के लिए &#8220;ॐ जानकीवल्लभाय नमः&#8221; मंत्र का 108 बार जप करें।</p>
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