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	<title>धर्म &#060; Ujjawal Prabhat | उज्जवल प्रभात</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles.</description>
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	<title>धर्म &#060; Ujjawal Prabhat | उज्जवल प्रभात</title>
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		<title>वट पूर्णिमा व्रत 2026: त्रिदेवों का आशीर्वाद दिलाएगा बरगद का पेड़</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Jun 2026 05:14:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[वट पूर्णिमा व्रत]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="841" height="442" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/1-47.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/1-47.jpg 841w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/1-47-768x404.jpg 768w" sizes="(max-width: 841px) 100vw, 841px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%b5%e0%a4%9f-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a3%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4-2026-%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5/">वट पूर्णिमा व्रत 2026: त्रिदेवों का आशीर्वाद दिलाएगा बरगद का पेड़</a></p>
<p>हिंदू धर्म में वट पूर्णिमा का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास और पुण्य फलदायी माना जाता है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की इच्छा से वट जिसे बरगद का पेड़ भी कहा जाता है, पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि, इसी दिन माता सावित्री &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="841" height="442" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/1-47.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/1-47.jpg 841w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/1-47-768x404.jpg 768w" sizes="(max-width: 841px) 100vw, 841px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%b5%e0%a4%9f-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a3%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4-2026-%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5/">वट पूर्णिमा व्रत 2026: त्रिदेवों का आशीर्वाद दिलाएगा बरगद का पेड़</a></p>

<p>हिंदू धर्म में वट पूर्णिमा का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास और पुण्य फलदायी माना जाता है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की इच्छा से वट जिसे बरगद का पेड़ भी कहा जाता है, पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि, इसी दिन माता सावित्री ने अपनी पत्नी व्रता धर्म का पालन करते हुए यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे।</p>



<p>इस वजह से वट पूर्णिमा का व्रत करने से अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस वर्ष वट पूर्णिमा का व्रत 29 जून 2026, सोमवार के दिन किया जा रहा है। वहीं इसके अलावा इस दिन 2 शुभ योग भी बन रहे हैं। जिससे इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। आइए जानते हैं वट पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि और धार्मिक महत्व।</p>



<p><strong>वट पूर्णिमा की तिथि<br /></strong>द्रिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि इस साल 29 जून को सुबह 03 बजकर 06 मिनट शुरू हो गई है, जो अगले दिन 30 जून को सुबह 5 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर ज्येष्ठ वट पूर्णिमा व्रत आज यानी 29 जून को किया जा रहा है।</p>



<p><strong>वट पूर्णिमा व्रत 2026 पूजा विधि<br /></strong>वट पूर्णिमा के दिन सुबह नहाकर साफ कपड़े पहनें और सच्चे मन से व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा करने के लिए थाली में रोली, अक्षत, फूल, मौली, धूप दीप, फल, मिठाई और जल का कलश रखें। इसके साथ ही वट के पेड़ पर जल चढ़ाकर रोली और अक्षत चढ़ाएं। इसके बाद धूप जलाकर पूजा करनी चाहिए।</p>



<p>इसके बाद पेड़ के चारों और कच्चा सूत या मौली लपेटते हुए सात या 108 बार परिक्रमा करें। भगवान विष्णु, माता सावित्री और वट पेड़ से परिवार की सुख-समृद्धि पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करें। पूजा के पश्चात ब्राह्माणों या जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा देना शुभ माना जाता है।</p>



<p><strong>वट पूर्णिमा व्रत का महत्व<br /></strong>सनातन धर्म में बरगद के पेड़ को त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप माना गया है। मान्यताओं के इसकी जड़ों में ब्रह्मा का वास, तन में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास रहता है। वट पूर्णिमा व्रत के दिन वृक्ष की पूजा करने से अखंड सौभाग्य के साथ संतान सुख की प्राप्ति होती है।</p>
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		<title>हनुमान नहीं, ये था बजरंगबली के बचपन का असली नाम! </title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 05:26:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[हनुमान]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="561" height="466" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/6-96.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%ac%e0%a4%b2/">हनुमान नहीं, ये था बजरंगबली के बचपन का असली नाम! </a></p>
<p>हममें से अधिकतर लोग सालों से हनुमान नाम का जाप और भजन करते आए हैं। कई लोगों को लगता है कि, उनका असली नाम यही है। लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि, उनका असल नाम कुछ ओर ही है। प्राचीन परंपराओं में देवी-देवताओं का नाम रखने से पहले घटनाओं और अनुभवों का खास ध्यान रखा &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="561" height="466" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/6-96.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%ac%e0%a4%b2/">हनुमान नहीं, ये था बजरंगबली के बचपन का असली नाम! </a></p>

<p>हममें से अधिकतर लोग सालों से हनुमान नाम का जाप और भजन करते आए हैं। कई लोगों को लगता है कि, उनका असली नाम यही है। लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि, उनका असल नाम कुछ ओर ही है। प्राचीन परंपराओं में देवी-देवताओं का नाम रखने से पहले घटनाओं और अनुभवों का खास ध्यान रखा जाता था। हर नाम के पीछे एक कहानी छिपी होती थी।</p>



<p>जिस तरह मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था, तो उनका नाम महिषासुरमर्दिनी नाम पड़ गया। भगवान कृष्ण बंसी बजाते थे और उन्हें प्यार से बंसीवाला कहते थे। इसी तरह हनुमान जी के नाम के पीछे भी एक पौराणिक कथा जुड़ी है, आखिर अंजनी पुत्र केसरी नंदन का असल नाम हनुमान नहीं तो क्या है और हनुमान नाम कैसे पड़ा? आइए जानते हैं।</p>



<p><strong>हनुमान नाम का मतलब<br /></strong>हनुमान नाम संस्कृत के शब्द हनु से आया है, जिसका मतलब ठुड्डी या जबड़ा होता है। यह नाम उनके बचपन की एक खास घटना से जुड़ा है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, एक बार हनुमान जी ने बचपन में सूर्य को लाल फल समझ कर उसकी तरफ छलांग लगा दी।</p>



<p>जब उन्होंने सूर्य को लाल फल समझकर खाने की कोशिश की तो इंद्र ने उनपर वज्र से प्रहार कर दिया, जिससे अंजनी पुत्र का जबड़ा चोटिल हो गया। इसी घटना के बाद से ही उनका नाम हनुमान पड़ गया।</p>



<p>बचपन की इस घटना ने सब कुछ बदलकर रख दिया था। भगवान शिव के अवतार हनुमान जी की शक्तियों की कोई सीमा नहीं थीं। आकाश में चमकते सूर्य को पका फल समझकर उसकी ओर छलांग लगाना महज एक खेल नहीं बल्कि उनकी अपार क्षमता को दर्शाता है। लेकिन जब इंद्र द्वारा प्रहार किया गया तो हनुमान जी बेहोश हो गए। इस घटना से सभी देवी-देवता हैरान रह गए, आखिर इंद्र के प्रहार से बजरंगबली कैसे मूर्छित हो गए।</p>



<p>इस घटना के बाद हनुमान जी को समस्त देवी-देवताओं से अद्भुत वरदान की प्राप्ति होती है। उन्होंने सुनिश्चित किया कि, हनुमान जी को भविष्य में किसी भी अस्त्र-शस्त्र से कोई क्षति नहीं हो और उनमें अपार शक्ति आ जाएं। इसी कारण से हनुमान को वीर बजरंगबली के नाम से भी जाना जाता है। इस नाम का मतलब है कि, वज्र की तरह शरीर वाला।</p>



<p><strong>हनुमान जी का असल नाम क्या है?<br /></strong>वैसे तो हनुमान जी के एक नहीं बल्कि कई नाम हैं, जो दिव्य घटनाओं के आधार पर उन्हें मिले। अंजनी के लाल होने के कारण भक्त उन्हें अंजनेय बुलाते हैं, पवनदेव के पुत्र होने के कारण पवनपुत्र नाम पड़ा। वही बजरंगबली नाम उनकी शक्ति का प्रतीक है।</p>



<p>लेकिन एक नाम जो सबसे खास होने के बाद भी काफी कम लोग ही जानते हैं, वो है सुंदर। पौराणिक कथा बताती है कि, हनुमान जी का बचपन का असल नाम सुंदर था, जिसे उनकी माता अंजनी ने रखा था। हनुमान जी को बचपन में पवन के देवता, मरुत के पुत्र होने की वजह से मारुति भी कहते थे।</p>
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]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>आज का पंचांग 28 जून 2026: ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी पर बन रहे शुभ योग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 05:19:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="535" height="535" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/5-51.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%82%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97-28-%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%a8-2026-%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%87%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a0/">आज का पंचांग 28 जून 2026: ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी पर बन रहे शुभ योग</a></p>
<p>हिंदू धर्म में पंचांग का खास महत्व है। आज यानी 28 जून को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। रविवार का दिन मुख्य रूप भगवान सूर्य की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। आज सूर्य देव मिथुन और चंद्र देव वृश्चिक राशि में स्थित हैं। आइए एस्ट्रोलॉजर आनंद सागर पाठक से &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="535" height="535" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/5-51.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%82%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97-28-%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%a8-2026-%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%87%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a0/">आज का पंचांग 28 जून 2026: ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी पर बन रहे शुभ योग</a></p>

<p>हिंदू धर्म में पंचांग का खास महत्व है। आज यानी 28 जून को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। रविवार का दिन मुख्य रूप भगवान सूर्य की पूजा के लिए शुभ माना जाता है।</p>



<p>आज सूर्य देव मिथुन और चंद्र देव वृश्चिक राशि में स्थित हैं। आइए एस्ट्रोलॉजर आनंद सागर पाठक से जानते हैं आज की तिथि, शुभ-अशुभ योग, सूर्योदय, सूर्यास्त और राहुकाल (Aaj ka Panchang 28 June 2026) का समय समेत आदि जानकारी।</p>



<p>तिथि: शुक्ल चतुर्दशी<br />मास: ज्येष्ठ<br />दिन: रविवार<br />संवत्: 2083<br />तिथि: शुक्ल चतुर्दशी – अगले दिन तड़के 03बजकर 6 मिनट (29 जून) तक, फिर पूर्णिमा<br />योग: शुभ – दोपहर 01 बजकर 30 मिनट तक, फिर शुक्ल<br />करण: गरज – दोपहर 01 बजकर 54 मिनट तक<br />करण: वणिज – अगले दिन तड़के 03 बजकर 06 मिनट (29 जून) तक, फिर विष्टि (भद्रा)</p>



<p><strong>सूर्य और चंद्रमा की स्थिति<br /></strong>सूर्योदय का समय: प्रातः 05 बजकर 26 मिनट पर<br />सूर्यास्त का समय: सायं 07 बजकर 23 मिनट पर<br />चंद्रोदय का समय: सायं 06 बजकर 26 मिनट पर<br />चंद्रास्त का समय: अगले दिन तड़के 04 बजकर 22 मिनट (29 जून)</p>



<p><strong>सूर्य और चंद्रमा की राशियां<br /></strong>सूर्य देव: मिथुन राशि में स्थित हैं<br />चन्द्र देव: वृश्चिक राशि में (अगले दिन तड़के 01 बजकर 08 मिनट तक), फिर धनु राशि में प्रवेश</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त<br /></strong>अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक<br />अमृत काल: दोपहर 03 बजकर 15 मिनट से सायं 05 बजकर 03 मिनट तक</p>



<p><strong>आज के अशुभ समय<br /></strong>राहुकाल: सायं 05 बजकर 38 मिनट से सायं 07 बजकर 23 मिनट तक<br />गुलिकाल: दोपहर 03 बजकर 54 मिनट से सायं 05 बजकर 38 मिनट तक<br />यमगण्ड: दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से दोपहर 02 बजकर 09 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र</strong><br />आज चंद्रदेव ज्येष्ठा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।</p>



<p>ज्येष्ठा नक्षत्र: अगले दिन तड़के 01 बजकर 08 मिनट (29 जून) तक, फिर मूल</p>



<p>स्थान: 16°40’ वृश्चिक राशि से 30°00’ वृश्चिक राशि तक<br />नक्षत्र स्वामी: बुधदेव<br />राशि स्वामी: मंगलदेव<br />देवता: इंद्र (देवताओं के राजा)<br />प्रतीक: कुंडल, छाता या ताबीज</p>



<p><strong>सामान्य विशेषताएं:</strong> बुद्धिमान, चतुर, साहसी, तार्किक, स्वाभिमानी, संकट में माहिर, थोड़े गुस्सैल, कम मित्र वाले और लक्ष्य के प्रति कठोर।</p>
<p>आप पढ़ रहे हैं : UjjawalPrabhat.Com</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>रामायण और गीता जैसे धार्मिक ग्रंथ घर की किस दिशा में रखने चाहिए? </title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 05:08:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक ग्रंथ]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="833" height="536" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/6-95.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/6-95.jpg 833w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/6-95-768x494.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 833px) 100vw, 833px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a3-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae/">रामायण और गीता जैसे धार्मिक ग्रंथ घर की किस दिशा में रखने चाहिए? </a></p>
<p>ऐसा माना जाता है कि यदि आपके घर में हर एक चीज वास्तु के अनुसार रखी गई हो तो सुख -समृद्धि बनी रहती है। इसी वजह से आमतौर पर लोग वास्तु एक्सपर्ट की सलाह पर घर की चीजों की सही जगह निर्धारित करते हैं। घर में जिस तरह से मंदिर के लिए एक निश्चित स्थान &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="833" height="536" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/6-95.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/6-95.jpg 833w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/6-95-768x494.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 833px) 100vw, 833px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a3-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae/">रामायण और गीता जैसे धार्मिक ग्रंथ घर की किस दिशा में रखने चाहिए? </a></p>

<p>ऐसा माना जाता है कि यदि आपके घर में हर एक चीज वास्तु के अनुसार रखी गई हो तो सुख -समृद्धि बनी रहती है। इसी वजह से आमतौर पर लोग वास्तु एक्सपर्ट की सलाह पर घर की चीजों की सही जगह निर्धारित करते हैं।</p>



<p>घर में जिस तरह से मंदिर के लिए एक निश्चित स्थान तय किया जाता है, उसी तरह से धार्मिक ग्रंथों जैसे रामायण, भगवत गीता या अन्य पुस्तकें भी सही स्थान पर रखने की सलाह दी जाती है। घर के पूजा वाले स्थान पर ही ग्रंथों को रखना ठीक है या फिर इसे किसी अन्य स्थान पर रखना ठीक है?</p>



<p>इनके लिए कौन सी दिशा उचित है? क्या इन पुस्तकों या ग्रंथों को आप बेडरूम या स्टडी रूम में रख सकते हैं? ऐसे ही कई सवालों का जवाब हमारे मन में बार-बार आता है। अगर आप इन पुस्तकों को भी सही स्थान और दिशा में रखते हैं तो इसके शुभ फल जीवन में दिखाई देते हैं। आइए आपको बताते हैं इन ग्रंथों को रखने की सही दिशा और स्थान के बारे में।</p>



<p><strong>किस दिशा में रखें धार्मिक ग्रंथ?<br /></strong>वास्तु में ऐसा कहा जाता है कि पूजा की सभी पुस्तकें जैसे धार्मिक ग्रंथों को घर की पूर्व दिशा में रखना चाहिए। वहीं पूजा का स्थान ईशान कोण यानी उत्तर पूर्व दिशा में रखना चाहिए।</p>



<p>वास्तु में ऐसा कहा जाता है यदि पूजा का स्थान इस दिशा में है तो सकारात्मक लाभ मिलते हैं। वहीं जब बात पूजा की पुस्तकों की होती है तो हमेशा इन ग्रंथों को सम्मानपूर्वक ही रखने की सलाह दी जाती है। वहीं सूर्य को ज्ञान का धर्म का प्रतीक माना जाता है, इसलिए ही इन्हें सूर्योदय की दिशा पूर्व में रखने की सलाह दी जाती है।</p>



<p><strong>धार्मिक ग्रंथ किस स्थान पर रखने चाहिए?<br /></strong>आपको हमेशा धार्मिक ग्रंथ अपने आराध्य देव की मूर्ति या तस्वीर के बाईं ओर रखने चाहिए। कई लोग घर के मंदिर की शेल्फ में ही ग्रंथ रख देते हैं, लेकिन आपको ऐसा करने से बचना चाहिए। आपको कभी भी धार्मिक पुस्तकों को मंदिर के ऊपर भी नहीं रखना चाहिए। धार्मिक पुस्तकों को कभी भी ऐसे स्थान पर नहीं रखना चाहिए जहां आस-पास गंदगी हो या फिर बेडरूम में रखने से बचना चाहिए।</p>



<p><strong>धार्मिक ग्रंथ रखते समय ध्यान रखें वास्तु के नियम<br /></strong>अगर आप कोई भी धार्मिक ग्रंथ जैसे रामायण, भगवत गीता या कोई भी धार्मिक पुस्तक जैसे हनुमान चालीसा या कोई भी पुराण रख रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि आप इन सभी पुस्तकों को एक के ऊपर एक करके न रखें। इन सभी पुस्तकों के लिए घर में एक अलग शेल्फ बनवाएं और इसमें पुस्तकें खड़ी स्थिति में न रखें। धार्मिक ग्रंथों और पुराणों को हमेशा लाल या पीले कपड़े में लपेटकर रखें जिससे इसकी ऊर्जा बाहर न जाए। आपको कभी भी धार्मिक ग्रंथ काले या नीले कपड़े में नहीं रखना चाहिए।</p>



<p>अगर आप घर में धार्मिक ग्रंथ रखते समय यहां बताए वास्तु नियमों का पालन करेंगी तो आपके जीवन में सदैव खुशहाली बनी रहेगी और इसके पूर्ण लाभ मिलेंगे।</p>
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		<title>जुलाई में कब-कब पड़ रहा है प्रदोष व्रत?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jun 2026 04:48:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदोष व्रत]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="784" height="522" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/7-89.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/7-89.jpg 784w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/7-89-768x511.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 784px) 100vw, 784px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%aa%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%aa/">जुलाई में कब-कब पड़ रहा है प्रदोष व्रत?</a></p>
<p>हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत महत्‍व बताया गया है। इस व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने के लिए रखा जाता है। यह व्रत पितृ दोष शांति और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्‍त करने के लिए भी रखा जाता है। हिंदू द्रिक पंचांग के आधार पर जुलाई 2026 में दो प्रदोष व्रत आएंगे और &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="784" height="522" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/7-89.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/7-89.jpg 784w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/7-89-768x511.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 784px) 100vw, 784px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%aa%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%aa/">जुलाई में कब-कब पड़ रहा है प्रदोष व्रत?</a></p>

<p>हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत महत्&#x200d;व बताया गया है। इस व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने के लिए रखा जाता है। यह व्रत पितृ दोष शांति और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्&#x200d;त करने के लिए भी रखा जाता है। हिंदू द्रिक पंचांग के आधार पर जुलाई 2026 में दो प्रदोष व्रत आएंगे और दोनों ही रविवार के दिन पड़ रहे हैं। ऐसे में इन्&#x200d;हें रवि प्रदोष कहा जाएगा। चलिए इन दोनों व्रतों की सही तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त आपको बाताते हैं।</p>



<p><strong>आषाढ़ कृष्ण पक्ष रवि प्रदोष व्रत 2026<br /></strong>इस बार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष का रवि प्रदोष व्रत रविवार 12 जुलाई 2026 को मनाया जाएगा। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है। ऐसे में शिव और सूर्य का संयोग बहुत ही शुभ माना गाया है। इस दिन भक्&#x200d;त व्रत रखकर इन दोनों का ही आशीर्वाद पा सकते हैं। साथ ही इस संयोग से जीवन में मान-सम्&#x200d;मान बढ़ता है और दीर्घ आयु मिलती है।</p>



<p><strong>आषाढ़ कृष्ण पक्ष रवि प्रदोष व्रत एंव पूजा का मुहूर्त<br /></strong>12 जुलाई 2026 को प्रात: 2 बजकर 4 मिनट पर त्रयोदशी तिथि का आरंभ होगा और रात्रि 10 बजकर 29 मिनट पर त्रयोदशी तिथि समाप्&#x200d;त हो जाएगी। प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शाम 7 बजकर 22 मिनेट से लेकर रात्रि 9 बजकर 24 मिनट तक का समय सबसे शुभ है।</p>



<p><strong>आषाढ़ शुक्ल पक्ष रवि प्रदोष व्रत 2026<br /></strong>आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष का रवि प्रदोष व्रत रविवार 26 जुलाई 2026 को मनाया जाएगा। आषाढ़ में पड़ने वाले प्रदोष व्रत में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करने से, सभी पापों से मुक्ति मिलती है। धार्मिक शास्&#x200d;त्रों के आधार पर यह वो समय होता है, जब भगवान शिव प्रसन्&#x200d;न होते हैं और भक्&#x200d;तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।</p>



<p><strong>आषाढ़ शुक्ल पक्ष रवि प्रदोष व्रत एंव पूजा का मुहूर्त<br /></strong>26 जुलाई 2026 को दोपहर 1 बजकर 57 मिनट पर त्रयोदशी तिथि आरंभ होगी और 27 जुलाई 2026 को शाम 4 बजकर 14 मिनट पर तिथि समाप्&#x200d;त हो जाएगी। प्रदोष व्रत की पूजा 26 जुलाई को शाम 7 बजकर 16 मिनट से लेकर रात्रि 9 बजे से लेकर 21 मिनट तक की जा सकती है।</p>



<p><strong>आषाढ़ माह में पड़ने वाले रवि प्रदोष का महत्&#x200d;व<br /></strong>आषाढ़ माह में पड़ने वाले रिव प्रदोष का व्रत रखने से भक्&#x200d;त निरोग रहता है और समाज में उसका यश भी बढ़ता है। साथ ही भगवान शिव और सूर्य देव की विशेष कृपा भी प्रप्&#x200d;ता होती है।</p>
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