दिल्ली हाईकोर्ट ने अजय चौटाला को दी 21 दिनों की पैरोल, जानिये- क्या था JBT घोटाला

- in दिल्ली, राज्य

नई दिल्ली।  जूनियर बेसिक ट्रेंड (जेबीटी) शिक्षक भर्ती घोटाले में 10 साल की सजा पाए हरियाणा के पूर्व विधायक अजय चौटाला की याचिका स्वीकार करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट 21 दिनों की पैरोल दी है। बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस एसपी गर्ग की बेंच के सामने याचिका दायर कर अजय चौटाला के वकील ने मांग की थी कि सामाजिक मेलजोल बढ़ाने और अपने बेटे के लिए रिश्ता तलाशने के लिए उन्हें 2 महीने की पैरोल दी जाए। सजा का एलान होते ही दिल्ली में रोहिणी कोर्ट के बाहर जमा चौटाला समर्थक हिंसक हो गए और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने अजय चौटाला को दी 21 दिनों की पैरोल, जानिये- क्या था JBT घोटाला

वर्ष, 2015 में दिल्ली हाई कोर्ट ने शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े घोटाले के मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला, उनके बेटे अजय चौटाला और तीन अन्य को भ्रष्टाचार के जुर्म में दी गई 10 साल की कैद की सजा को बरकरार रखा था। न्यायाधीश सिद्धार्थ मृदुल ने शेर सिंह बडशामी और दो अन्य आईएएस अधिकारियों विद्याधर और संजीव कुमार की भी 10 साल कैद की सजा बरकरार रखते हुए कहा था कि उन्होंने शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया को कलंकित कर दिया और भ्रष्टाचार करके इस प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया है।

क्या है मामला?

जेबीटी शिक्षक भर्ती घोटाले को उजागर करने में अहम भूमिका तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक संजीव कुमार ने निभाई थी। संजीव कुमार ने ही इस मामले में उच्चतम न्यायालय में एक अर्जी दायर की थी। उच्चतम न्यायालय के आदेश पर सीबीआइ ने प्रारंभिक जांच वर्ष 2003 में शुरू की।

जांच में शिक्षकों की नियुक्ति में बरती गई अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद सीबीआइ ने जनवरी 2004 में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, उनके विधायक पुत्र अजय सिंह चौटाला, मुख्यमंत्री के तत्कालीन विशेष कार्य अधिकारी आइएएस विद्याधर, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार रहे शेर सिंह बड़शामी, राज्य के प्राथमिक शिक्षा निदेशक संजीव कुमार सहित कुल 62 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। सबसे ताज्जुब की बात यह रही कि मामले को उजागर करने में अहम भूमिका निभाने वाले संजीव कुमार को भी सीबीआइ ने इस मामले में आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ भी मामला दर्ज किया। सीबीआइ के अनुसार संजीव कुमार भी इस घोटाले में बराबर शामिल रहे थे। सीबीआइ के अनुसार उनका अन्य लोगों से विवाद होने पर ही उन्होंने घोटाले के खिलाफ आवाज उठाई।

मामले में सीबीआइ ने वर्ष 2008 में आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र पेश कर दिया। सीबीआइ ने आरोपपत्र में कहा कि वर्ष 1999- 2000 में राज्य के 18 जिले में हुई 3206 जेबीटी शिक्षकों की भर्ती के मामले में मानदंडों को ताक पर रखकर मनचाहे अभ्यर्थियों की बहाली की गई थी। इसके लिए शिक्षकों की भर्ती की जिम्मेवारी कर्मचारी चयन आयोग से लेकर जिला स्तर पर बनाई गई चयन कमेटी को सौंपी गई थी। जिसने फर्जी साक्षात्कार के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों की सूची तैयार की गई। इसके लिए जिलास्तरीय चयन कमेटी में शामिल शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर मनचाहे अभ्यर्थियों के चयन के लिए दिल्ली के हरियाणा भवन व चंडीगढ़ के गेस्ट हाउस में बैठकों में दबाव भी बनाया गया था।

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