मुख्य सचिव मारपीट मामला: दिल्ली सरकार के गले की फांस बन सकता है आरोप पत्र

नई दिल्ली। मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के मारपीट के मामले में पुलिस की ओर से दाखिल किया गया आरोप पत्र दिल्ली सरकार के गले की फांस बन सकता है। आरोप पत्र का मूल आधार सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी वीके जैन का बयान है। जैन के माध्यम से ही केजरीवाल ने मुख्य सचिव को सुबह से देर रात तक बार-बार फोन करवाकर बैठक के बहाने अपने आवास पर बुलवाया था।मुख्य सचिव मारपीट मामला: दिल्ली सरकार के गले की फांस बन सकता है आरोप पत्र

चश्मदीद गवाह बने वीके जैन 

मुख्य सचिव के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाकर उसे भी आरोप पत्र में रखा गया है। घटना के दूसरे दिन 21 फरवरी की सुबह सिविल लाइंस थाना पुलिस ने वीके जैन से पूछताछ की थी। इसके बाद पुलिस ने 22 फरवरी को मजिस्ट्रेट के सामने बंद कमरे में उनका बयान दर्ज करवा दिया था। बयान में उन्होंने घटना की पूरी सत्यता उजागर कर दी थी। तभी पुलिस ने उन्हें केस का मुख्य चश्मदीद गवाह बना लिया था।

आरोप पत्र में इन बातों को भी रखा गया

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जैन ने अपने बयान में कहा था कि विधायक अमानतुल्लाह खां व प्रकाश जारवाल ने मुख्य सचिव का गला दबाकर सात थप्पड़ व घूंसे मारे थे। पुलिस अधिकारी के अनुसार, प्रोटोकॉल के तहत मुख्य सचिव से केवल मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री ही पूछताछ कर सकते हैं और उन्हें बैठक के लिए बुला सकते हैं, लेकिन इस केस में मुख्य सचिव को बुलाने के बाद केजरीवाल ने उन्हें विधायकों के सवालों के जवाब देने को कहा था। ऐसा करना भी नियम के खिलाफ था। उन्हें सोफे पर दो विधायकों के बीच में बैठाना भी गलत था। इन सब बातों को भी आरोप पत्र में रखा गया है।

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