Home > मनोरंजन > पुण्यतिथि विशेष: मोहम्मद रफी, जिन्होंने फकीर से सीखी थी गायकी

पुण्यतिथि विशेष: मोहम्मद रफी, जिन्होंने फकीर से सीखी थी गायकी

सिनेमाजगत में चार दशक से ज्यादा वक्त तक लोगों के दिलों पर राज करने वाले प्रख्यात गायक मोहम्मद रफी की आज (31 जुलाई) पुण्यतिथि है. रफी साहब बॉलीवुड के वो कोहिनूर हैं, जिसकी चमक वक्त के साथ बढ़ती ही जा रही है. 19वीं सदी का दौर हो या फिर 21वीं सदी का रफी साहब के गाने जुबां पर आते ही एक समा सा बांध जाते हैं. रफी साहब के किसी भी गाने को एक बार सुनने के बाद लगता है मानो वो बजता रहे और बजता ही रहे. कानों में गाने के बोल पड़ते ही लगता है मानो दिल को सुकून मिल गया हो. पुण्यतिथि विशेष: मोहम्मद रफी, जिन्होंने फकीर से सीखी थी गायकी

वैसे तो रफी साहब के सारे गाने की सुपरहिट हैं, लेकिन कुछ गाने ऐसे भी हैं, जो 21वीं सदी के युवाओं की रोम-रोम में बसे हुए हैं. ये गाने हैं आज मौसम बड़ा बेईमान है, तारीफ करूं क्या उसकी, चाहूंगा मैं तुझे, अभी ना जाओ छोड़कर, एहसान तेरा होगा मुझ पर जैसे लिरिक्स को भुला पाना नामुमकीन है. 

फकीर की नकल कर सीखा गाना
जहां चाह है वहीं पर तो राह है…रफी साहब पर ये लाइनें सटीक बैठती हैं. किसी प्रोफेशनल गुरु को चुनने की बजाय रफी साहब ने गांव के फकीर की नकल कर गाना सीखा था. महज 13 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पहली परफॉर्मेंस दी. इसके बाद उन्होंने उस्ताद अब्दुल वहीद खां, पंडित जीवन लाल मट्टू और फिरोज निजामी से शास्त्रीय संगीत का ज्ञान लिया, इसके बाद उन्होंने केएल सहगल के लिए गाने गए, फिर पंजाबी, आकाशवाड़ी और कई ऐसे गाने और नगमें आए, जिसने उनकी आवाज को अमर कर दिया. 

रियाज के बाद बैडमिंटन खेलते थे साहब
कई बार प्रेस कॉर्फेंस में ये बात कहते आए हैं, कि जब भी रफी गाने की रिकॉर्डिंग होती थी तो वो भिंडी बाजार से हलवा लाते और खाते थे. इतना ही नहीं गाने के शौकीन रफी साहब सुबह 3 बजे उठकर रियाज में लग जाया करते थे और पक्षियों को अपनी सुरीली आवाज से उठाने के बाद बैडमिंटन खेला करते थे. कहा जाता है कि ऐसा करने से उनकी अंतर आत्मा को एक अलग सा सुकून मिलता था. 

रफी ने की थी दो शादियां
मधुर आवाज के धनी रफी साहब ने दो शादियां की थी. उनकी पहली शादी गांव में बशीरा से हुई थी, लेकिन अंग्रेजों से आजादी के बाद बशीरा को भारत में रहने से इनकार कर दिया, जिसके बाद वह लाहौर चली गईं. उसके बाद उन्होंने दूसरी शादी बिलकिस से की, जो आखिरी सांसों तक उनके साथ रही.

मौत से ठीक पहले होनी थी रिकॉर्डिंग 
कहा जाता है कि 30 जुलाई, 1980 में मुंबई, बंबई हुआ करता था. तब देर शाम घर पहुंचे रफी ने अपनी पत्नी ने कहा था कि वह 31 जुलाई के दिन गाना नहीं गा पाएंगे, क्योंकि वह दिल और दिमाग दोनों रूप से थक चुके हैं. जिस पर उनकी पत्नी ने जवाब दिया था कि उन्हें गाने से इनकार कर देना चाहिए, लेकिन आवाज़ के बेताज़ बादशाह, जो दिल से भी राजा था, उसने साफ लब्जों में कह दिया था, संगीतकार श्यामल मित्रा कोलकाता से बड़ी उम्मीद लेकर आए हैं. 

31 जुलाई को जब श्यामल मित्रा उनके घर पहुंचे तो रफी साहब ने अभ्यास शुरू किया. तभी अचानक उन्हें दर्द उठा. आनन-फानन में रफी साहब को नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया, सुविधाओं की कमी होने के कारण वक्त रहते ही उन्हें बॉम्बे अस्पताल में भर्ती कराया गया. रात का घना अंधेरा और मॉनसून की बारिश की वो मधुर आवाज के बीच डॉक्टरों ने इस बात का ऐलान कर दिया कि आज वो आवाज खामोश हो गई, जिसने संगीत दुनिया को मंत्रमुग्ध किया था. उनका आखिरी गाना ‘श्याम फिर क्यों उदास है दोस्त/ तू कंही आस पास है दोस्त’ है जिसे उनकी मृत्यु से कुछ वक्त पहले ही रिकॉर्ड किया गया था. रफी साहब को दुनिया छोड़े बेशक से 38 साल का वक्त बीत चुका हो, लेकिन जैसे लगता कल की बात हो. वो आवाज को रिकॉर्ड करने की तैयारी कर रहे हों. 

Loading...

Check Also

वीडियो: भारतीय फिल्मे जिसमे दिखाया जाने वाला लव मेकिंग…..रियल था

भारत में सेक्स एक ऐसा विषय है जिस पर लोग कम से कम बात करना …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com