2 मई तक दुनिया के लिए खतरनाक, शनि-मंगल में भयंकर परिवर्तन

भारतीय ज्योतिष की अपनी विशेषता है। जब दो या दो से अधिक ग्रहों का एक राशि में गोचर हो तो यह किसी भी शुभ या अशुभ योग, ऋण आदि का निर्माण करता है। साथ ही ऐसी स्थिति में दो ग्रहों का स्थान संबंध या परस्पर दृष्टि होने से ब्रह्मांड पर इसका कोई न कोई विशेष प्रभाव होना भी स्वाभाविक है। किन्हीं भी शुभ ग्रहों की युति शुभ फलदायी होती है और अशुभ ग्रहों की युति कष्टकारी होती है। ज्योतिष सिद्धांतों के अनुसार शनि और मंगल, दोनों को पाप ग्रहों की संज्ञा दी गई है और दोनों एक-दूसरे के पूर्ण शत्रु हैं।

2 मई तक दुनिया के लिए खतरनाक, शनि-मंगल में भयंकर परिवर्तन

 

 

मंगल ग्रह 7 मार्च, 2018 को भारतीय समयानुसार संध्या 6.27 बजे मूल नक्षत्र के प्रथम चरण में होते हुए धनु राशि में प्रवेश करेंगे और 2 मई 2018 बाद दोपहर 4.19 तक इसी राशि में विचरण करेंगे। अत: शनि जो वर्तमान में इसी राशि में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं इन दोनों ग्रहों की युति, संबंध और स्वभाव साथ ही दोनों नक्षत्र भी अग्नि तत्व हिंसक होने से कुछ विपरीत परिस्थितियां अर्थात इस गोचरीय काल में कुछ अप्रिय घटनाओं की स्थितियां उत्पन्न होंगी।

 

इन दोनों ग्रहों का आपस में विपरीत होना विश्व में अशांति, अमंगल, भय आदि की परिस्थितियां घटित होंगी। हमारे ज्योतिष शास्त्रों में इन दोनों ग्रहों की युति को द्वंद्व योग की संज्ञा दी गई है अर्थात खून-खराबा, प्राकृतिक आपदाओं व अमंगल घटनाएं घटित होने का संकेत है, शास्त्रों में मंगल को शक्ति, हठ, भूमि, सेना, खून, विस्फोट,  आग आदि का कारक माना गया है जबकि दूसरी ओर शनि को आलस्य, न्याय, भूमि के अंदर से निकलने वाले गैस आदि पदार्थ, धरती का कम्पन और तोड़-फोड़ व शत्रु आदि व्यक्ति का कारक माना गया है।

 

जब कभी भी ब्रह्मांड में इन दोनों ग्रहों का स्थान, दृष्टि संबंध बना है तो भूमि पर विनाशकारी भूकम्प हुए हैं व प्राकृतिक विपदाएं, कृषि संबंधी व अमानवीय विस्फोटक घटनाएं घटित हुई हैं। यदि हम पिछले सौ-दो सौ वर्षों में घटित भूकम्पों, व प्राकृतिक आपदाओं का आकलन करें तो पाएंगे कि इन दोनों ग्रहों का पूर्ण योगदान रहा है।

 

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