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उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम गुटबाजी को लेकर हैं चिंतित

देहरादून: अल्मोड़ा में कांग्रेस के नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति रद और पुराने जिलाध्यक्ष की बहाली के साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल की नाराजगी फौरी तौर पर दूर भले ही हो गई, लेकिन ये सवाल अब भी सियासी फिजा में तैर रहा है कि प्रदेश में पार्टी के भीतर गुटबाजी आगे भी जारी रहेगी, या इसे थामा जा सकेगा।

सिर्फ कुंजवाल ही नहीं, उनके साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व सांसद महेंद्र सिंह माहरा व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट भी पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को कठघरे में खड़ा करने से नहीं चूके हैं। अगले वर्ष लोकसभा चुनाव और चालू वर्ष में नगर निकाय चुनाव को देखते हुए कांग्रेस पार्टी के भीतर गुटीय खींचतान तेज हो गई है। इसे आगामी चुनावों की चुनौती के मद्देनजर पार्टी पर दबाव बनाने की कोशिशों के रूप में भी देखा जा रहा है। प्रदेश में विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेल चुकी कांग्रेस के सामने निकाय और लोकसभा चुनाव में बेहतर और दमदार प्रदर्शन का दबाव है। इस चुनौती को देखते हुए ही पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व सबको साथ चलने की हिदायत दे चुका है। 

इस हिदायत के बावजूद पार्टी में गुटबंदी थमने का नाम नहीं ले रही है। आलम ये है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता ही सार्वजनिक रूप से रोष जाहिर करने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश के भीतर पार्टी दो खेमों में बंटी नजर आ रही है। एक खेमा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश तो दूसरा खेमा पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का माना जा रहा है। कुंजवाल की नाराजगी पड़ी भारी पिछले कई मौकों पर ये दोनों ही खेमे आमने-सामने आ चुके हैं। 

प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बीती 24 जुलाई को विस्तारित बैठक भी इस खेमेबंदी से दूर नहीं रह सकी। पार्टी के वरिष्ठ नेता व जागेश्वर विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल ने बैठक में ही प्रदेश नेतृत्व के रुख पर सवाल खड़े कर दिए थे। कुंजवाल को हरीश रावत का करीबी माना जाता है। इस बैठक के करीब दस दिन के बाद प्रदेश में कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की सूची ने विवाद को हवा दे दी। अल्मोड़ा के जिलाध्यक्ष पद पर कुंजवाल के धुर विरोधी माने जाने वाले मोहन सिंह मेहरा की ताजपोशी ने कांग्रेस की अंदरूनी सियासत को गर्मा दिया। 

इससे खफा कुंजवाल ने प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह से शिकायत की, बल्कि 15 अगस्त तक जिलाध्यक्ष पद पर बदलाव नहीं होने की सूरत में इस्तीफा देने की धमकी दे डाली थी। आखिरकार पार्टी ने अल्मोड़ा जिलाध्यक्ष पद पर पीताबंर पांडे को बहाल कर कुंजवाल की नाराजगी दूर कर दी। लेकिन, अब भी पार्टी में असंतोष दूर होगा इसे लेकर संशय बना हुआ है। 

जोत सिंह बिष्ट उठा चुके अंगुली 

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के ही वरिष्ठ उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट प्रदेश में तीन महीना बीतने पर भी समन्वय समिति का गठन नहीं होने और जिला व शहर अध्यक्षों की सूची जारी करने से पहले सामूहिक विचार-विमर्श नहीं किए जाने को लेकर प्रदेश नेतृत्व को निशाने पर लेते हुए प्रदेश प्रभारी को पत्र लिख चुके हैं। 

हालांकि इस पत्र को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव गिरीश पुनेड़ा व प्रवक्ता नवीन पयाल पार्टी के प्रति जोत सिंह बिष्ट की निष्ठा पर अंगुली उठा चुके हैं। वहीं पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने भी कुंजवाल की नाराजगी के पक्ष में खड़ा होने में देर नहीं की। ऐसे में आने वाला समय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के लिए चुनौती से कम नहीं है। लोकसभा चुनाव तक दबाव की ये कोशिशें पार्टी के भीतर बढ़ना तय माना जा रहा है।

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